Workshop: जेल में पहुंचे वक्ताओं ने कैदियों से कही यह बात, मनुष्य और पशु में बताया अंतर

हमारे अंदर की सोच ही हमें कैदी या आजाद बनाती है।

By: ashish mishra

Published: 22 Jul 2021, 12:27 PM IST


छिंदवाड़ा. सामाजिक संस्था श्यामा फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा बुधवार को कैदी जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन जिला जेल में किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे अंदर की सोच ही हमें कैदी या आजाद बनाती है। यदि हम अपनी सोच को सकारात्मक बना लें तो यही जेल जीवन हमारे लिए सौगात बन सकता है। कार्यक्रम में प्रसिद्ध चिंतक और विचारक भोपाल से रितेश शुक्ल, रायपुर से रवि मानव, बैतूल से सुनील द्विवेदी व आनंद राठौर, जिला जेल अधीक्षक यजुवेन्द्र बाघमारे मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सुनील द्विवेदी ने कहा कि जेल या कैद हमारी सोच में है। जेल में हवा, पानी, मिट्टी, सूरज, आकाश सब कुछ मिल रहा है। हम जाने अनजाने में जो गलती कर सजा भुगत रहे हैं हमें उसको भूलकर नया जीवन शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था द्वारा किताबों से लेकर जरूरत की हर वो सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी जो कैदियों को हुनरमंद बनाने के लिए आवश्यक है। रवि मानव ने कहा कि ये वक्त भी गुजर जाएगा...इसको आधार वाक्य बनाकर जेल जीवन को जीना चाहिए। जीवन यात्रा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं यदि हम समभाव से उसको देखेंगे तो खुश रहेंगे अन्यथा हमेशा दुखी भाव लेकर समय को व्यर्थ गंवाएंगे। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता भोपाल के रितेश शुक्ल ने कहा कि हम सभी को अपनी चेतना को जागृत करना है। एक मनुष्य और पशु में यही अंतर है कि मनुष्य के पास चेतना है। हम इस चेतना को एक कंप्यूटर के रूप में उपयोग कर सकते हैं और इसके माध्यम से अपने अंदर एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे विद्यार्थियों की तलाश है जो पढऩा चाहते हैं और आगे बढऩा चाहते हैं। ऐसे लोगों को हर तरह का निशुल्क मार्गदर्शन देने को तैयार हैं।
जेल अधीक्षक ने सभी का आभार व्यक्त किया। कहा कि वे जेल के सभी कैदियों को परिवार की तरह मानते हैं। हर तरह से उनको आगे बढऩे में मदद का प्रयास करते हैं। अब उम्मीद है कि वक्ताओं के मार्गदर्शन से कैदियों के जीवन में बदलाव आएगा।

ashish mishra Desk
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