Young farmer: स्टीविया की खेती से मालामाल हो रहा युवा किसान

किसानी आज वे ही लोग करना चाहते हैं जिनके खून में माटी बसी हो। पीढिय़ों से जिनके परिवार में लोग खेती से जुड़े हों, बात अब पुरानी हो चली है।

By: babanrao pathe

Published: 03 Jul 2021, 11:20 AM IST

छिंदवाड़ा. खेती किसानी आज वे ही लोग करना चाहते हैं जिनके खून में माटी बसी हो। पीढिय़ों से जिनके परिवार में लोग खेती से जुड़े हों, यह बात अब पुरानी हो चली है। आज कुछ युवा ऐसे भी है जो अच्छी खासी पढ़ाई करने के बाद नौकरी नहीं खेती किसानी में अपना भाग्य आजमा रहे। आधुनिक तरीके से खेती कर वे लाखों रुपए की आमदानी भी कर रहे हैं।

छिंदवाड़ा के परासिया महाराष्ट्र बैंक के पीछे रहने वाले श्रृंगार विश्वकर्मा ने स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर से कृषि संकाय में स्नातक किया है। तेलंगाना के आचार्य एन.जी. रंगा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने के बाद वर्तमान में उत्तर प्रदेश के चंद्रशेखर आजाद टेक्नोलॉजी एण्ड रिसर्च सेंटर से पीएचडी कर रहा है। कृषि क्षेत्र में काम करने वाली विभिन्न निजी कम्पनियों में अच्छे वेतन पर नौकरी मिल रही थी, लेकिन श्रृंगार नौकरी करना नहीं नौकरी देने वाला बनना चाह रहा था। पढ़ाई के दौरान ही आधुनिक खेती किसानी की तरफ रुझान बढ़ गया था। श्रृंगार एक बार उड़ीसा निवासी अपने दोस्त हितेश कुमार जोशी के घर पहुंचा। चाय में स्टीविया थी। चर्चा के दौरान हितेश ने ही स्टीविया की खेती करने की सलाह दी। दो साल पूर्व गांव लौटकर श्रृंगार ने स्टीविया की खेती शुरू कर दी और आज साल के 4 लाख रुपए दो एकड़ जमीन से कमा रहा है।

क्या है स्टीविया
स्टीविया एक औषधी पौधा है, इसे मधुरगुणा के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में छिंदवाड़ा के किसानों के लिए यह नई किस्म की खेती है। औषधि चीनी की तरह मीठी होती है और घर के आंगन या गार्डन में उगाई जा सकती है। इसमें कैलोरी नहीं के बराबर होती है और ना ही इससे कोई हानि पहुंचती। इसकी पत्तियों को सुखाकर सामान्य पानी में डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाए तो पानी का स्वाद मीठा हो जाता है। बड़े स्तर पर पत्तियों का दृव्य निकाला जाता या फिर पाउडर भी तैयार होता।

आंध्रप्रदेश और मप्र में सप्लाई
श्रृंगार विश्वकर्मा ने बताया कि वर्तमान में छिंदवाड़ा में स्टीविया के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं, इसीलिए इसकी मांग न के बराबर है। दोस्त के माध्यम से आंध्रप्रदेश में सबसे अधिक सप्लाई देता है। मप्र के कुछ हिस्सों में भी वह स्टीविया बेच रहा है जिससे उसे दो एकड़ जमीन से सालाना 4 लाख रुपए की आमदानी हो रही है। चार रुपए का एक पौधा उसने अपने दोस्त हितेश के माध्यम से ही बुलवाए हैं। इसके अलावा श्रृंगार विश्वकर्मा वर्मी कम्पोस्ट खाद, काली हल्दी की भी खेती करता है। घर की दीवार पर अंदर और बाहर गार्डन तैयार करने का शौक है।

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babanrao pathe Reporting
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