यात्रा पर निकला शोधार्थियों का दल, अगूढ़ तथ्यों की करेंगे खोज

अनसुलझे, अगूढ़ धार्मिक स्थानों के रहस्य, उसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान दिलाने के उद्देश्य से शोधार्थियों का एक दल चित्रकूट दर्शन यात्रा पर निकला है|

By: आलोक पाण्डेय

Published: 11 Sep 2017, 04:14 PM IST

चित्रकूट, चित्रकूट के अनसुलझे अगूढ़ धार्मिक स्थानों के रहस्य, उसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान दिलाने के उद्देश्य से शोधार्थियों का एक दल पंद्रह दिनों के चित्रकूट दर्शन यात्रा पर निकला है|जिसमें ऐतिहासिक जानकार से लेकर धर्म के मर्मज्ञ और समाजसेवी शामिल हैं| बुंदेलखण्ड के सबसे सुंदर प्राकृतिक स्थानों में माना जाने वाला चित्रकूट अपनी धार्मिक पहचान के लिए जाना जाता है| यात्रा में शामिल लोग जनपद के उन महत्वपूर्ण स्थानों से पहले खुद रूबरू होंगे जिनके बारे में विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों पुराणों और शास्त्रों में उल्लिखित किया गया है|

इस पवित्र धरती की कंदराओं गुफाओं और जंगलों में जनकल्याण के लिए तपस्या की और ऐसे ही अनसुलझे और अगूढ़ रहस्यों तथ्यों की खोज पर निकली यह यात्रा चित्रकूट को देश ही नहीं दुनिया के भी मानचित्र पर लाने की कोशिश में लगी है| सोशल मीडिया के माध्यम से जनपद के महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों के बारे में अवगत कराया जा रहा है जिससे दूर दूर तक ऐसे स्थानों की महत्ता पहुंचाई जा सके और लोग इन धरोहरों से परिचित हो सकें|

गौरतलब है कि चित्रकूट भगवान राम की तपोभूमि स्थल माना जाता है और मान्यता है कि इस पवित्र धरती पर श्री राम ने अपने वनवासकाल के साढ़े ग्यारह वर्ष बिताए थे| कई धार्मिक उल्लेखों में इस बात का उल्लेख तथ्यों के साथ किया गया है और खास बात तो यह कि आज भी कई ऐसे स्थान हैं जो कहीं न कहीं यह प्रमाणित करते हैं कि इस स्थान पर किसी दिव्य शक्तिओं का निवास हुआ करता था| इसके अलावा बहुत सी ऐसी गुफाए, कंदराएं और शिलाएं हैं जिन पर शैलचित्र बने हुए हैं| अनसुलझी भाषाओं में कुछ लिखा हुआ है, इन्ही अगूढ़ अबूझ और रोचक तथ्यों की खोज में शोधार्थियों का यह दल पंद्रह दिनों की कठिन यात्रा पर निकला है जो कई दुर्गम स्थानों से होकर गुजरेगा|

देश दुनिया में पहचान दिलाना है मुख्य उद्देश्य

चित्रकूट की धार्मिक ऐतिहासिक धरोहरों के विषय में काफी समय से अध्ययन कर रहे और जानकारी रखने वाले यात्रा के संयोजक संतोष बंसल ने बताया कि उनके दल में कई धार्मिक ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तरीके के जानकार लोग शामिल हैं जो ठोस तथ्यों और प्रमाणों के साथ चित्रकूट के महत्वपूर्ण स्थानों के विषय में देश दुनिया के लोगों को अवगत कराएंगे| उनके मुताबिक यात्रा मुख्यालय से होते हुए कई दुर्गम इलाकों में पहुंचेगी और वहां पर मौजूद धार्मिक ऐतिहासिक स्थानों से लोगों को रूबरू कराएगी| संतोष बंसल विगत कई वर्षों से चित्रकूट के पर्यटन विकास के लिए प्रयासरत और संघर्षरत हैं|

इस तरह मिल रहे प्रमाण

गणेश बाग़, कोटि तीर्थ, बांके सिद्ध, देवांगना घाटी स्फटिक शिला सती अनुसूईया आश्रम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान हैं| इन स्थानों के बारे में विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक बातें उल्लिखित की गई हैं जिनका प्रमाण इन जगहों पर मौजूद तथ्य खुद ब खुद स्पष्ट कर देते हैं| मराठी पेशवाओं द्वारा बनवाए गए ऐतिहासिक गणेश बाग़ की ऐतिहासिकता वहाँ की स्थापत्य कला स्वयं प्रकट करती है तो वाणी की सिद्धि के लिए ऋषियों मुनियों की तपोभूमि बांके सिद्ध गुफा आज भी किसी रहस्य से कम नहीं है| मुख्यालय से कुछ दूर स्थित देवांगना घाटी के विषय में उल्लेख एवम् मान्यता है कि यहां श्री राम के वनवासकाल के दौरान उनका दर्शन करने आए देवताओं की पत्नियां रुकी थीं जिससे इस स्थान का नाम देवांगना पड़ गया| मानिकपुर और मारकुंडी में कई गुफाएं हैं जिनमे शैलचित्र बने हुए हैं|

ऋषि मुनियों के साधना स्थल पर होगा शोध

यात्रा में शामिल शोधकर्ता ऋषि अत्रि, सती अनुसुईया ऋषि वाल्मिकी, कपिल, महर्षि गौतम और सुतीक्ष्ण जैसे तेजस्वी ऋषियों की तपोभूमि के विषय में अध्ययन और शोध कर उन तथ्यों को विश्व पटल पर रखेंगे| इसके अलावा मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा बनवाए गए बालाजी मंदिर पर्यटन से जुड़े प्राकृतिक जल प्रपातों दैवीय घटनाओं की गवाह रही शिलाओं और आदि मानवों की गुफाओं के अगूढ़ रहस्यों को भी खोजने व सुलझाने का प्रयास शोधकर्ताओं द्वारा किया जाएगा जिससे चित्रकूट व बुन्देलखण्ड को देश दुनिया में एक अलग पहचान मिल सके|

आलोक पाण्डेय
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