धन की बर्बादी का सबब बन रहे पुरातत्व संरक्षित स्थल कैसा होगा पर्यटन विकास

जिन जिम्मेदारों के कंधों पर इनके रख रखाव प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी है वही नुमाइंदे कुम्भकरणी नींद में हैं.

By: Neeraj Patel

Published: 15 Sep 2020, 04:55 PM IST

चित्रकूट: कई प्राचीन धार्मिक व ऐतिहासिक धरोहरों को संजोए जिले का पर्यटन विकास जिम्मेदारों की अनदेखी की भेंट चढ़ रहा है. मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से जहां आम लोग जनपद के दर्शनीय पर्यटक स्थलों के बारे में जानकारियां देश दुनिया तक पहुंचाते हैं वहीं जिन जिम्मेदारों के कंधों पर इनके रख रखाव प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी है वही नुमाइंदे कुम्भकरणी नींद में हैं. जनपद के अधिकांश पुरातत्व स्थल धन की बर्बादी का सबब बन रहे हैं. इन स्थलों पर पुरातत्व विभाग की न तो कोई संजीदगी है और न ही कोई विशेष देखरेख. अलबत्ता इसके नाम पर लाखों करोड़ों रुपये हर साल जरूर व्यय होने की जानकारी मिलती है. इसी अव्यवस्था को लेकर अब सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास शुरू किया है.

प्राकृतिक ऐतिहासिक व प्राचीन तथा धार्मिक धरोहरों को अपनी आगोश में समेटे भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट आजादी के बाद से अब तक जिम्मेदारों की अदूरदर्शिता के कारण पर्यटन के पटल पर शून्य रहा है. इसका उदाहरण ये है कि यहां न जाने कितने दर्शनीय स्थल मौजूद हैं पर्यटन की दृष्टि से किंतु आज तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण वे नेपथ्य के पीछे ही रहे हैं. यही नहीं कई ऐतिहासिक धार्मिक प्राचीन स्थल पुरातत्व विभाग द्वारा सरंक्षित भी हैं लेकिन उनकी देख रेख नगण्य है. हालांकि इसके लिए हर साल काफी पैसा खर्च होता है लेकिन विभाग सिर्फ पुरातत्व सरङ्क्षण का बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है. ऋषियन धाम गणेश बाग सूर्य मंदिर आदि ऐसे दर्शनीय स्थल हैं जो पुरातत्व स्थल के रूप में सरंक्षित हैं.


इस उदासीनता को लेकर बुंदेली सेना संगठन ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए ठोस कदम उठाए जाने की मांग की है. संगठन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि उनके संगठन ने हमेशा जिले के पुरातात्विक स्थलों के सरङ्क्षण की मांग की है. कई स्थल पुरातत्व सरङ्क्षण के तहत हैं भी लेकिन इनकी देखरेख प्रचार प्रसार नगण्य हैं. बल्कि इसके नाम पर भारी धनराशि खर्च हो जाती है. इसलिए अब उनके संगठन ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री से इस मामले में ठोस कदम उठाए जाने की मांग करते हुए पत्र भेजा है. जिलाध्यक्ष के मुताबिक यदि जल्द कोई जवाब नहीं आता तो संगठन खुद केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात कर वास्तविकता से अवगत कराएगा. जिले के ये दर्शनीय स्थल पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं.

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