सरकार के पास नहीं है बुंदेलखण्ड से बेरोजगारों के पलायन का कोई आंकड़ा, भाजपा सांसद के पत्र से हुआ बड़ा खुलासा

भाजपा सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय से पूछा था कि बुन्देलखण्ड में रोजगार देने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं?

By: Hariom Dwivedi

Published: 13 Mar 2018, 07:27 PM IST

चित्रकूट. विभिन्न दुश्वारियों से जूझ रहे बुन्देलखण्ड के बेरोजगारों के पलायन का कोई या किसी भी प्रकार का आंकड़ा केंद्र सरकार के पास मौजूद नहीं है। जी हां यह खुलासा हुआ है चित्रकूट बांदा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा के पत्र में। इस पत्र में उन्होंने बुंदेलखण्ड से बेरोजगारी के कारण होने वाले पलायन को लेकर केंद्र सरकार से प्रश्न किया था। सरकार ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि बुन्देलखण्ड के प्रवासी कामगारों के सम्बन्ध में केंद्रीय स्तर पर कोई आंकड़ा (डेटा) नहीं रखा जाता है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जब बुन्देलखण्ड को बुन्देलखण्ड के नाम से जाना जाता है तो फिर उसकी समस्याओं से सम्बंधित विभिन्न आंकड़ों को केंद्रीय स्तर पर क्यों नहीं रखा जाता। बहरहाल इस उत्तर से यह साफ जाहिर है कि बुन्देलखण्ड को लेकर हुक्मरान कितने संजीदा हैं धरातल पर।

वर्षों से कई मूलभूत समस्याओं से कराह रहे बुन्देलखण्ड की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है बेरोजगारी. इस दंश रूपी डंक की मार से आज तक न जाने कितने परिवारों नौजवानों ने अपनी मिट्टी को त्याग दिया है और हमेशा के लिए पलायन कर गए। दूसरी तरफ प्रदेश और खुद बुन्देलखण्ड में रोजगार के उचित अवसर न मिलने पर प्रतिवर्ष हजारों युवा कामगार बाहर विभिन्न राज्यों में जीवकोपार्जन के लिए पलायन कर जाते हैं। बावजूद इसके केंद्रीय स्तर पर इस बात का कोई डेटा (आंकड़ा) ही उपलब्ध नहीं है कि कितने बुन्देलखण्डी प्रवासी कामगार पलायन कर गए हैं।

सांसद ने उठाया था मुद्दा
लोकसभा में भाजपा सांसद (चित्रकूट बांदा लोकसभा) भैरव प्रसाद मिश्रा ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय से पूछा था कि बुन्देलखण्ड से बेरोजगारी के कारण हजारों लोग पलायन कर रहे हैं। क्या मंत्रालय को इस बारे में कोई जानकारी है और बुन्देलखण्ड में रोजगार देने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं? सांसद के प्रश्न के उत्तर में मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि केंद्रीय स्तर पर बुन्देलखण्ड के प्रवासी कामगारों के सम्बन्ध में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि ऐसा कोई भी आंकड़ा नहीं रखा जाता और जहां तक रोजगार देने की बात है तो केंद्र सरकार के विभिन्न प्रकार के लघु और कुटीर उद्योगों की योजनाओं के माध्यम से रोजगार देने का प्रयास किया जा रहा है। इस जवाब में भी बुन्देलखण्ड के लिए कोई विशेष बात नहीं की गई।

तो छला जा रहा है बुन्देलखण्ड को
जब आंकड़े ही नहीं तो पैकेज किस मापदण्ड के तहत। सरकार के पास देश के गरीबों के आंकड़े तो हैं लेकिन बुन्देलखण्ड से पलायन सम्बन्धी आंकड़े आज तक उपलब्ध नहीं हो पाए। न तो सरकारी और न ही किसी स्वयंसेवी संस्था ने आज तक इस तरह के आंकड़ों और सच्ची तस्वीरों को रखने की जुर्रत महसूस की, जबकि चुनावों में बुन्देलखण्ड में यदि कोई सबसे बड़ा मुद्दा बनता है तो वह है पलायन और बेरोजगारी और इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार के आंकड़ों का खाना निल है।

की जाएगी पहल
इस बारे में सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा का कहना है कि केंद्र और प्रदेश सरकार से बुन्देलखण्ड में बेरोजगारी की समस्या को लेकर और गंभीर होने की पहल की जाएगी। पलायन काफी हो चुका है मगर अब प्रयास यह रहेगा सरकार का कि बुन्देलखण्ड को आगे ले जाया जाए।

 

Show More
Hariom Dwivedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned