नजीर: कड़ाके की ठण्ड में कुछ इस तरह नदी में उतरे युवा, ये है बड़ी वजह

नजीर: कड़ाके की ठण्ड में कुछ इस तरह नदी में उतरे युवा, ये है बड़ी वजह

Nitin Srivastava | Publish: Jan, 14 2018 08:46:13 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

नदी की बदली हुई सूरत बुंदेली सेना की मेहनत को साफ बयां कर रही है...

चित्रकूट. दो दिनों तक चलने वाले मकर संक्राति के अवसर पर जहां एक तरफ आस्थावानों के बीच पवित्र नदियों में स्नान दान कर पुण्य लाभ अर्जित करने की लालसा है। वहीं समाज में ऐसे भी लोग हैं जो इन सबसे परे उन पवित्र नदियों के अस्तित्व को बचाने की मुहीम में जुटे हैं जिनकी पहचान प्रदूषण की वजह से आज खतरे में आ गई है। गंगा-यमुना जैसी बड़ी नदियों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है तो वहीं हर इलाके की अपनी पहचान क्षेत्रीय नदियों की दशा भी चिंतनीय स्थिति में पहुंच गई है। पावन पर्वों पर जहां आस्था का सैलाब इन जीवनदायिनी पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर पाप से से मुक्ति और मोक्ष की कामना करता है। वहीं इन नदियों की मिटती हुई हस्ती पर न तो सिस्टम को गौर करने की फुर्सत है और न ही बाकी दिनों में इन पवित्र नदियों की स्वच्छता को लेकर आस्थावानों की टोलियां फिक्रमन्द नजर आती हैं। इन सबके इतर समाज में आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो किसी कामना से रहित अपनी धरोहरों को बचाने के लिए आगे रहते हैं और मौसम स्थिति परिस्थिति की परवाह न करते हुए अपने कर्तव्यपालन में जुटे रहते हैं। ऐसे लोग किसी पुरस्कार के मोहताज तो नहीं परंतु उनके ये कार्य अन्य लोगों के लिए नज़ीर जरूर बन सकते हैं जो यह समझते हैं जल जंगल और जमीन को बचाने इन्हें सहेजने का काम सिर्फ सरकारी मशीनरी और सिस्टम का है। कुछ ऐसा ही संदेश दे रही है चित्रकूट की बुंदेली सेना और युवा। जिन्होंने इस ठण्ड में अपने स्वास्थ्य की परवाह न करते हुए मकर संक्रांति पर होने वाले स्नान के लिए पवित्र मंदाकिनी नदी को साफ कर दिया। नदी की बदली हुई सूरत इनकी मेहनत को साफ बयां कर रही है।

 

देश की पवित्र नदियों की दुर्दशा पर घड़ियाली आंसू बहाते समाज के धार्मिक ठेकेदारों मठाधीशों सिस्टम के नुमाइंदों को शायद इन तस्वीरों से कुछ सीख मिल जाए कि स्वयं की पहल से ही समाज में कुछ बदलाव सम्भव है और प्रदूषण की भेंट चढ़ती जीवनदायिनी नदियों को बचाने के लिए खुद को सबसे पहले आगे आना होगा। गंगा यमुना की तरह बुन्देलखण्ड की आस्था का प्रमुख केंद्र भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में बहने वाली पवित्र मंदाकिनी नदी भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। परंतु जनपद की बुंदेली सेना और युवाओं ने अपनी इस मां के आंसुओं को पोछने का बीड़ा उठाया है और कई वर्षों से बिना किसी का मुंह ताके नदी की सफाई में जुटे हैं।

 

कड़ाके की ठण्ड में उतरे नदी में

ठण्डी हवाओं और सूरज की गुनगुनी धूप के बीच सुबह से ही युवाओं नदी में उतरकर गंदगी को साफ करना शुरू कर दिया। मुख्यालय स्थित मंदाकिनी पुल घाट पर स्नानार्थियों की सुविधा के लिए बुंदेली सेना ने पूरे घाट की सफाई करते हुए नदी में एकत्र गंदगी को अपने हांथों से उठाकर फेंका। बोझ के बोझ पॉलीथिन यह स्पष्ट कर रहे थे कि समाज खुद कितना संजीदा है अपनी धरोहरों को लेकर। नदी के किनारों पर एकत्र कचड़ों को फेंकने में युवाओं को परेशानी तो हुई लेकिन कई घण्टे की मेहनत ने उसका सुखद परिणाम भी दिया और थोड़े समय के लिए ही सही नदी का चेहरा बदला हुआ नजर आया।

 

छेड़ रखा है सफाई का अभियान

बुन्देली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि उन्होंने जनपद के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर सफाई का अभियान छेड़ रखा है जिनमे मंदाकिनी नदी की सफाई और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर स्वच्छता उनका और उनके साथियों का प्रमुख मिशन है। अक्सर मौका निकालकर सभी को एकत्र करते हुए दोनों स्थलों पर सफाई और स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। बुन्देली सेना प्रमुख का कहना है कि बुन्देलखण्ड में वैसे भी जल संकट है और अगर नदियों को बचाने के लिए हम बुन्देलखण्डवासी खुद आगे नहीं आएंगे तो इन्हें कौन बचाएगा।

 

कर रहे जागरूक

इन सबके बीच अपनी आदत से मजबूर आस्थावान नदी में फूलमाला व् अन्य चीजें भी फेंकते नजर आए यह देखकर भी कि युवा नदी में उतरकर सफाई अभियान में जुटे हैं। बुन्देली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के मुताबिक लोगों को जागरूक करने का काम भी किया जाता है लेकिन लोग अपनी आदत से बाज नहीं आते परंतु इन सबसे बेफिक्र हम अपना कर्तव्य अपनी विरासत के प्रति निभाते हैं और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।

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