covid-19-लॉकडाउन: इंसान की इंसानियत भी परख रहा ये वक्त

सरकार व प्रशासन के अलावा समाज की मानवता भी इस विकट विषम परिस्थिति में इस अदृश्य दानव से लड़ने में किसी ढाल की तरह अपनी भूमिका निभा रही है

चित्रकूट: "कोरोना" जो आज पूरी दुनिया में ख़ौफ का दूसरा नाम बन चुका है जिसकी दहशत से इंसानी वजूद कांप उठा है. जिसने समाज को एक फांसले पर रहने को मजबूर कर दिया जिसकी वजह से दुनिया के कई खासकर विकासशील देशों में लोगों की रोजी रोटी रोजगार पर संकट आ गया है ऐसे वक्त में इंसानियत की परख भी हो रही. सरकार व प्रशासन के अलावा समाज की मानवता भी इस विकट विषम परिस्थिति में इस अदृश्य दानव से लड़ने में किसी ढाल की तरह अपनी भूमिका निभा रही है. ऐसी कई तस्वीरें उदाहरण इस समय मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर देखी जा सकती हैं जिसमें इंसान-इंसान की मदद करता नज़र आ रहा है.

देखने को मिल रहीं मानवता की परख


पूरा देश लॉकडाउन होने के बाद गरीबों मजदूरों के सामने आर्थिक से लेकर पेट भरने तक का विकराल संकट उत्पन्न हो गया है. हालांकि सरकार व प्रशासन पूरी कोशिश में है कि कोई भूखा न रहने पाए लेकिन इतने बड़े देश के लगभग हर कोने में वो लोग मौजूद हैं जिन तक सिस्टम की नजर पहुंचने में देर हो जाती है. ऐसे में समाज के संजीदा लोग मदद को आगे आ रहे हैं. जनपद में भी ऐसे कई लोग गरीबों दिहाड़ी मजदूरों भिक्षा मांगने रेहड़ी पटरी वालों की मदद को आगे आ रहे हैं. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से अपील की जा रही है कि किसी भी तरह की जरूरत पड़ने पर वे आगे आने को तैयार हैं.

हर स्तर पर हो रही मदद की पहल

जनपद में हर स्तर पर लोग गरीबों की मदद को आगे आ रहे हैं. बतौर उदाहरण किसी ने अपनी डेयरी से गरीबों के शिशुओं के लिए सुबह शाम आधा लीटर दूध देने की पेशकश की है तो कई युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से किसी के भी भूखे होने की जानकारी उनके फोन नम्बर पर देने की अपील की है. बतौर उदाहरण युवा रचनाकार समाजसेवी सौरभ द्धिवेदी की नजर रात में खुले आसमान के नीचे पड़े एक गरीब पर पड़ी तो उन्होंने मानवता दिखाते हुए उसके खाने पीने का इंतजाम किया। बकौल सौरभ इस भयानक संकट काल में वे और उनके कुछ दोस्त एक ग्रूप बनाकर ऐसे लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। ये चंद उदाहरण हैं मानवता के ऐसे कई प्रयास लगातार किए जा रहे हैं इसी समाज के द्वारा जिस पर इस कलयुग काल में"स्वार्थी" होने का ठप्पा लग चुका है.

आकांक्षा सिंह Desk/Reporting
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