अन्नदाताओं की मेहनत को राख करतीं हाई टेंशन लाईनें, हर साल लाखों की फसल होती है कुर्बान

किसानों की गाढ़ी कमाई से तैयार फसलें हर साल इन तारों की चिंगारी की शिकार होती हैं...

चित्रकूट. विभिन्न दुश्वारियों से जूझते अन्नदाताओं की मेहनत को गर्मी की दस्तक शुरू होते ही नजर लग जाती है हाई टेंशन लाइनों की। मौसम की मार सूखा अन्ना प्रथा समस्या से जूझती किसानों की फसलें एक और विकट मुसीबत झेलती हैं अपना वजूद बचाने को। इस मुसीबत का नाम है हाई टेंशन लाइन यानि खेतों के ऊपर से गुजरी 11 हजार से लेकर 25 हजार हाई वोल्टेज की तारें। गाढ़ी कमाई से तैयार फसलें प्रतिवर्ष इन तारों की चिंगारी की शिकार होती हैं और कभी कभार तो तारें टूटकर खेतों में गिर जाती हैं और मिनटों में लहलहाती फसलें स्वाहा हो जाती हैं। सबसे खास बात यह कि इस समस्या का समाधान आज तक नहीं निकाला गया कि यदि ऐसा कोई नुकसान हो तो किसान को उसकी मेहनत की भरपाई कब कैसे और किस तरह होगी। जबकि प्रतिवर्ष सैंकड़ों बीघे की लाखों की फसलें कुर्बान हो जाती हैं इन हाई टेंशन लाइनों की चपेट में आकर।

 

किसान की फसलें नहीं हैं सुरक्षित

यूं तो पूरे देश का किसान दिन प्रतिदिन विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है और बुंदेलखण्ड का किसान तो दो कदम आगे है इस विषय में क्योंकि किसी भी दृष्टिकोण से उसकी फसलें सुरक्षित नहीं। अन्ना जानवरों का आतंक मौसम की मार सूखे की त्रासदी से जूझती फसलें किसी तरह गर तैयार भी होती हैं तो उसपर नजर लगी रहती है ऊपर वाले कि यानि खेतों के ऊपर से गुजरी हाई टेंशन लाइनों की। गर्मी की चहलकदमी शुरू हुई नहीं कि इन तारों का कहर लहलहाते खेतों में टूटने लगता है और आँखों के सामने अन्नदाताओं की कमाई राख हो जाती है।

 

प्रतिवर्ष लाखों का नुकसान सैकड़ों बीघे राख

हाई टेंशन लाइनों की चपेट में आकर प्रतिवर्ष लाखों की फसलें जलकर राख हो जाती हैं और सैकड़ों बीघे की फसलें बलि की वेदी पर अग्नि के हवाले हो जाती हैं। सूर्य देव की त्यौरियां जैसे जैसे चढ़नी शुरू होती है वैसे वैसे आग का प्रकोप फसलों पर कहर बनकर टूटता है। सबसे बड़ी मुसीबत हैं हाई टेंशन लाइनें। जरा सी भी चिंगारी फसलों के लिए घातक सिद्ध होती है।

 

चार किसानों की फसलें राख

हाई वोल्टेज तारों की चिंगारी चार किसानों के लिए काल बन गईं। मानिकपुर क्षेत्र में तीन किसानों की लाखों की फसल जलकर राख हो गई जबकि रैपुरा गांव में एक अन्नदाता की मेहनत चिंगारी की भेंट चढ़ गई। किसान जब तक आग पर काबू पाते तब तक सबकुछ नष्ट हो चुका था। आग की चपेट में एक गाय भी आ गई और उसकी मौत हो गई।

 

समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं

प्रतिवर्ष इस तरह के नुकसान का दर्द झेलने वाले किसानों की इस समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है आज तक। 11 हजार वोल्ट की तारें तो काफी हद तक जिले के विद्युत् विभाग के अतर्गत आती हैं जिससे इन तारों की वजह से नुकसान होने पर पीड़ित जनपद स्तर पर विभागीय चक्कर तो लगा सकता है लेकिन 25 हजार वोल्ट की तारें बड़े बड़े पावर हाउसों से गुजरी होती हैं इसलिए इनसे नुकसान होने पर किसान कहां जाएं यह उनकी समझ में नहीं आता और यदि वे जनपद पर गुहार लगाते भी हैं तो उन्हें काफी चक्कर लगाना पड़ता है। बहरहाल जरूरत इस बात की है कि कोई ऐसी पहल की जाए जिससे इस तरह के नुकसान होने पर किसान एक उचित फोरम पर गुहार लगा सके अन्यथा प्रतिवर्ष कितने का नुकसान होता होगा यह शायद खुद सिस्टम को भी नहीं पता।

नितिन श्रीवास्तव
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned