आशियानों से लेकर खेत खलिहानों तक लपटों का कहर, तबाह हो रहा सब कुछ

फसलों के नष्ट होने से कई किसान सदमें आ गए हैं।

 

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Published: 25 Apr 2018, 06:40 PM IST

चित्रकूट. कई दुश्वारियों से जूझते किसानों पर अग्निदेव का कहर भी कम नहीं हो रहा है। आए दिन लपटों की आगोश में किसानों के आशियानों से लेकर उनकी फसलें जलकर राख हो रही हैं। नहीं थम रहा है आग का कहर। गांवों व खेत खलिहानों पर अग्निदेव की कुदृष्टि जारी है। छोटी छोटी चिंगारियां विकराल रूप धारण करते हुए घर के घर स्वाहा कर रही हैं तो वहीं खेत खलिहानों में अन्नदाताओं की मेहनत के रूप में रखी फसलों को तबाह कर रही हैं। कहीं हाईटेंशन तार तो कहीं कूड़ों के ढेर से निकली चिंगारी ग्रामीणों और किसानों पर भारी पड़ रही है। आग लगने की ऐसी ही अलग-अलग घटनाओं में दर्जन भर किसानों की फसलें जलकर राख हो गईं। फसलों के नष्ट होने से कई किसान सदमें आ गए हैं।

गर्मी का पारा चढऩे के साथ-साथ आग की तपन भी अपने पूरे रौ में है। चिंगारी को जरा सा हवा का साथ मिला नहीं कि वो भयंकर लपटों में परिवर्तित हो जाती है। सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है किसानों को। एक अनुमान के मुताबिक मार्च के अंतिम सप्ताह से लेकर अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक कम से कम सैकड़ों किसानों की लाखों की फसलें जलकर पूरी तरह राख हो गई हैं। शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब कहीं खेत खलिहान में आग लगने की घटना न हो।

डेढ़ दर्जन किसानों की फसलें राख

जनपद के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आग लगने से दर्जन भर किसानों की फसलों को पूरी तरह नुकसान पहुंचा है। राजापुर थाना क्षेत्र के मझगांव गांव में सुंदरलाल नाम के किसान के ट्यूबवेल में अज्ञात कारणों के चलते लगी आग के कहर से किसान रामनरेश, शिवनरेश, नत्थू, सुरेन्द्र, राजेन्द्र, वीरेंद्र, राधेश्याम, रामकिशोर, तुलसा देवी, शालिक राम, छोटू, व् राजू की लगभग 35 बीघे की फसल जलकर राख हो गई। इसी तरह की अन्य घटनाओं में अलग-अलग स्थानों पर आग लगने से आधा दर्जन किसानों की मेहनत जलकर राख हो गई।

रोजी रोटी का संकट

बेरहम आग की लपटों से जलकर राख हो रही फसलों की वजह से किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो रहा है। अधिकतर पीडि़त किसान मुआवजे के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। कई लघु व सीमांत किसान अग्निदेव के प्रकोप से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। पशुओं को भी दाना पानी का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। घटनाओं के बारे में सम्बंधित तहसीलों के एसडीएम से जब बात की गई तो उनका कहना था कि फसल दुर्घटना योजना के तहत जो भी सहायता होगी वो पीडि़तों को दिलाई जाएगी।

फेल साबित हो रही फायर ब्रिगेड सेवा

इन सबके बावजूद जनपद की फायर ब्रिगेड सेवा पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। जहां भी आग लगने की घटनाएं होती हैं वहां फायर ब्रिगेड को पहुंचने में कई कई घण्टे न लगें यह सम्भव ही नहीं। आक्रोशित ग्रामीण दमकल कर्मियों को खरी खोटी तो सुनाते हैं लेकिन इस आस में अपने को काबू में कर लेते हैं कि शायद फायर ब्रिगेड के आने पर कुछ थोड़ा बहुत ही उनकी गृहस्थी बच जाए।

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