सिर्फ तीन दिन के अंदर 100 परिवार हो गए बेघर, ...कौन लेगा इनकी खबर?

 खुद के सामने जलते अपने घरौंदे को देखकर उनकी आंखों में अब बचे हैं तो सिर्फ आंसू। घर जलने के साथ ही उनके सपने भी राख के ढेर में तब्दील हो गए।

चित्रकूट. खुद के सामने जलते अपने घरौंदे को देखकर उनकी आंखों में अब बचे हैं तो सिर्फ आंसू। घर जलने के साथ ही उनके सपने भी राख के ढेर में तब्दील हो गए। किसी की आंखे यह सोचकर गमगीन है कि अब बेटी की विदाई किस दरवाजे से करेंगे तो कोई इसलिए गुमसुम है कि पाई पाई जोड़कर बनाई गई उसकी गृहस्थी आग की भेंट चढ़ गई और सबकुछ जलकर ख़ाक हो गया। जी हां बात हो रही है चित्रकूट के उन लगभग 100 पीड़ित परिवारों की जिन्होंने आग की लपटों में अपने आशियाने खो दिए। इन परिवारों के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट सिर छुपाने को लेकर है। आखिर जाएं तो जाएं कहां, सो खुले आसमान के नीचे दिन रात बिताने को मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा मदद की आस के इंतजार में बैठे ये पीड़ित परिवार बार बार अपने जले हुए घरों को देखकर मायूस हो जाते हैं, आखिर हो भी क्यों न इन घरों से उनकी कई यादें जो जुडी थीं।


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100 परिवार हो गए बेघर

जनपद में तीन दिन के अंदर आग के कहर ने लगभग 100 परिवारों को बेघर कर दिया। रविवार को पहाड़ी थाना क्षेत्र स्थित पथरा गांव में आग की लपटों में डेढ़ दर्जन के करीब घर पूरी तरह से स्वाहा हो गए थे तो वहीं मंगलवार को जनपद के राजापुर थाना क्षेत्र स्थित दलित बाहुल्य गांव कुसेली में आग के रौद्र रूप ने लगभग 70 घरों को अपनी आगोश में लेते हुए जलाकर ख़ाक कर दिया। इन घरों में सहेज कर रखे गए रुपए-पैसे, अनाज, जेवरात, गृहस्थी सबकुछ जलकर राख हो गए। अब बची हैं तो सिर्फ वो काली राख और जली दीवारें जो आग की भयानकता को स्वयं बयां करती हैं। राजापुर के जिस दलित बाहुल्य गांव कुसेली में आग ने सबसे ज्यादा कहर ढाया। वहां अग्नि पीड़ित चार परिवारों में उनकी बेटियों के हाथ पीले (शादी) होने थे। मगर अब सबकुछ तबाह हो गया। ऐसे में इस बात की चिंता से अब ये परिवार गमजदा हैं कि अब शादी कैसे होगी।



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प्रशासन वं समाजसेवियों ने मदद के लिए हांथ बढ़ाएं

पहाड़ी के पथरा गांव में बुद्धवार को जनपद के समाजसेवियों व प्रशासनिक कारिंदों ने पीड़ित डेढ़ दर्जन से अधिक परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। लेकिन इन परिवारों के सामने घर का संकट खड़ा है जिस पर प्रशासनिक अमले की तरफ से गृह अनुदान देने का आश्वासन दिया गया है। वहीं राजापुर के कुसेली गांव में भी समाजसेवियों व प्रशासनिक अमले ने मदद के हांथ बढ़ाए और पीड़ितों को घरों के पुनः निर्माण के लिए अनुदान देने का वादा किया। कुल मिलाकर भले ही इन पीड़ित परिवारों को थोड़ी बहुत अनुदान राशि मिल जाए लेकिन वो गृहस्थी और यादें अब कैसे वापस आएगी ये सोचकर इन पीड़ितों की आंखे शून्य में निहारती हैं।
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नितिन श्रीवास्तव
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