सुलखान की पुलिस को सीधी टक्कर देगा दस्यु सरगना बबुली!

बीहड़ में आतंक व दहशत का पर्याय पुलिस को खुली चुनौती देते हुए बेख़ौफ़ होकर चहलकदमी कर रहा सात लाख का इनामी खूंखार डकैत यूपी पुलिस से सीधी टक्कर लेने के लिए तैयार है।

By: आकांक्षा सिंह

Published: 06 May 2017, 12:49 PM IST

चित्रकूट।  बीहड़ में आतंक व दहशत का पर्याय पुलिस को खुली चुनौती देते हुए बेख़ौफ़ होकर चहलकदमी कर रहा सात लाख का इनामी खूंखार डकैत यूपी पुलिस से सीधी टक्कर लेने के लिए तैयार है। जी हां गैंग की फायर पावर (हथियारों का जख़ीरा) देखकर ये अंदाजा काफी हद तक स्पष्ट हो जाता है कि यदि पुलिस व दस्यु बबुली कोल गैंग में सीधी मुठभेड़ होती है तो पुलिस को काफी मुश्किलातों का सामना करना पडेगा। 

अगर डकैतों व पुलिस की आमने सामने हुई अब तक कि मुठभेड़ का जिक्र किया जाए तो आज से 8 वर्ष पहले जून के महीने में जनपद के जमौली गांव में लगभग हजार पुलिस कर्मियों को एक मात्र डकैत घनश्याम केवट ने नाको चने चबवा दिए थे।इस मुठभेड़ में घनश्याम की गोली से 6 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। ऐसे में मुठभेड़ के लिए पुलिस कितनी काबिल व तैयार है इस बात को समझा जा सकता है। अब जबकी बीहड़ में डकैत बबुली कोल आतंक का नया अध्याय लिख रहा है और इनाम भी काफी हो गया है तो पुलिस के लिए चुनौती भी बढ़ गई है कि इस खौफ़ के बादशाह का जल्द से जल्द सफाया हो और बीहड़ को दहशत से मुक्ति मिले। 

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दस्यु गैंग के पास मौजूद अत्याधुनिक हथियारों से लैस शार्प शूटर पुलिस के किसी भी दांव का जवाब देने को तैयार हैं तो वहीं पुलिस के हथियार सिर्फ साफ़ सफाई तक ही सीमित रहते हैं। कई कई महीनों तक ये हथियार गरजने के लिए तरसते रहते हैं और पुलिस की कॉम्बिंग की शोभा बढ़ाते हैं। अप्रैल से लेकर जून तक गैंग से सीधी मुठभेड़ की सम्भावना को लेकर जंगलों में ख़ाक छानती ख़ाकी की नाक के नीचे से दस्यु गैंग निकल जाता है और कॉम्बिंग करती पुलिस को कानो कान खबर तक नहीं होती। बीहड़ के सूत्रों के मुताबिक डकैत बबुली कोल अपनी फायर पावर को मजबूत करने की जुगत में लगा है और पुलिस सिर्फ कॉम्बिंग तक सीमित है।

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बीहड़ के खूंखार बादशाहों की दुनिया में डकैत ददुआ ठोकिया बलखड़िया रागिया ऐसे नाम हैं जिन्हें अत्याधुनिक हथियारों का शौक था और इनकी फायर पावर पुलिस के सामने कम नहीं थी। 22 जुलाई 2007 को चित्रकूट बांदा की सीमा पर स्थित फतेहगंज के जंगल में 7 एसटीएफ के जवानों को गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाने वाले खूंखार डकैत ठोकिया ने उस पूरी वारदात को अत्याधुनिक हथियारों के बल पर अंजाम दिया था। विदेशी राइफलों से लेकर देशी व फैक्ट्री मेड राइफलें व बंदूकें पिस्टल व अन्य हथियार ठोकिया गैंग की ताकत थे। सबसे ख़ास बात यह कि बीहड़ में डकैतों के ये अत्याधुनिक हथियार एक दूसरे गैंग में पहुंच जाते हैं। मसलन ददुआ गैंग के कई हथियार ठोकिया व बलखड़िया गैंग के पास उसके (ददुआ) खात्में के बाद पहुंच गए और ठोकिया व बलखड़िया के सफ़ाए के बाद वर्तमान में सात लाख के इनामी डकैत बबुली कोल के पास इन दोनों गैंग के अत्याधुनिक हथियार गैंग की मजबूत रीढ़ हैं।

बबुली की फायर पावर

इनाम के साथ हथियारों के जखीरों को जमा करने में भी दस्यु बबुली कोल अन्य गैंगों को कोसों पीछे छोड़ता है और पुलिस को चुनौती देता है। फायर पावर की बात करें तो दस्यु बबुली कोल गैंग में, 375 बोर की दो मैग्नम राइफल, दो से चार एसएलआर, पांच थ्री नॉट थ्री(303) राइफल, पांच 315 बोर राइफल, तीन से चार डबल बैरल और पांच पिस्टल (9 एमएम) रिवाल्वर(6 राउंड) मौजूद हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गैंग कहीं से भी पुलिस से कमतर नहीं है और पुलिस को सीधी टक्कर लेने के लिए अपने जवानों को भी ऐसे अत्याधुनिक हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण देने की जरूरत है। 8 वर्ष पहले जब घनश्याम केवट से मुठभेड़ हो रही थी तो कई ऐसे पुलिसकर्मी यहां तक कि उच्च स्तर के अधिकारी भी हथियारों को संचालित करने में दिक्कत महसूस कर रहे थे क्योंकि पुलिस को शायद ही बराबर अभ्यास कराया जाता हो।

इन सबके बीच एक लाख के इनामी दस्यु गोप्पा, 50 हजार का इनामी दस्यु लवलेश, 50 हजार का इनामी डकैत गौरी यादव भी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं. इन दस्यु गैंगों के खात्में के लिए पुलिस को ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है और खुद को पारंगत करने की कि किसी भी चुनौती से निपटने में कदम पीछे न हटें और 8 वर्ष पहले घनश्याम केवट वाली मुठभेड़ के हालात न बनें।
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आकांक्षा सिंह
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