बॉलीवुड में गुलाबी गैंग कमांडर की दस्तक, "जाको राखे साइयां" फि़ल्म से हो रही फि़ल्मी सफर की शुरुआत

बॉलीवुड में गुलाबी गैंग कमांडर की दस्तक,

Ashish Pandey | Publish: Sep, 03 2018 09:30:01 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मेरठ में शुरू होने जा रही है उनके फिल्म की शूटिंग।

 

चित्रकूट. महिला अधिकारों के लिए संघर्ष के रूप में देश दुनिया में एक अलग मुकाम बना चुकीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल अब बॉलीवुड में दस्तक देने जा रही हैं। संपत पाल अपनी पहली हिंदी फि़ल्म में लीड रोल में नजर आएंगी। फि़ल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है और संपत पाल की भूमिका का फिल्मांकन(शूटिंग) भी जल्द ही यूपी के मेरठ में फिल्माया जाएगा। गुलाबी गैंग कमांडर वैसे तो इससे पहले भी माया नगरी में बिग बॉस, कौन बनेगा करोड़ पति जैसे कार्यक्रमों में शिरकत करके अपनी उपस्थिति एक सशक्त महिला के रूप में दर्ज करा चुकी हैं लेकिन फि़ल्म इंडस्ट्री में यह उनका पहला कदम होगा बतौर फि़ल्मी पात्र के रूप में। संपत पाल के जीवन पर आधारित गुलाब गैंग फि़ल्म भी बन चुकी है बॉलीवुड में जिसमें मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

फि़ल्मी सफर पर निकलीं गुलाबी गैंग कमांडर
बुन्देलखण्ड की आयरन लेडी के रूप में पहचानी जाने वालीं गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल अब अपने जीवन के एक नए सफर पर निकल रहीं हैं। "जाको राखे साइयां" नाम की फि़ल्म में मुख्य भूमिका के रूप में गुलाबी गैंग कमांडर के इस सफर की शुरुआत हो रही है। फि़ल्म के निर्देशक हैं इरशाद खान। फि़ल्म में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कॉमेडियन राजपाल यादव, जाकिर हुसैन आदि अभिनेता भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फि़ल्म का मुहूर्त शॉट बीते 28 अगस्त को फिल्माया जा चुका है।

चिर परिचित भूमिका में नजर आएंगी संपत पाल
पत्रिका से दूरभाष पर बातचीत के दौरान जानकारी देते हुए गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल ने बताया कि फि़ल्म में भी उनकी भूमिका उनके चिरपरिचित अंदाज व व्यक्तित्व के अनुरूप महिला अधिकारों की लड़ाई लडऩे वाली एक महिला के रूप में होगी जो व्यवस्था की अव्यवस्था के खिलाफ सशक्त तरीके से लड़ते हुए आवाज उठाती है और अधिकारियों को सबक सिखाती है। गुलाबी गैंग कमांडर ने बताया कि उनकी शूटिंग 5 से 7 सितम्बर तक मेरठ में होनी है। फि़ल्मी सफर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यदि वे आज सिर्फ चूल्हे चौके में बंधी होतीं तो शायद यहां तक नहीं पहुंचती। बुंदेलखण्ड की महिलाओं की पहचान आज देश दुनिया में यदि उनकी वजह से हो रही है तो ये उनके लिए गर्व की बात है। असल जिंदगी की तरह फि़ल्म में भी वो जीने मरने से नहीं डरतीं इसलिए फि़ल्म का नाम पड़ा जाको राखे साइयां। संपत पाल ने कहा कि पुरुष और स्त्री बराबर हैं और दोनों को एक दूसरे को समझना होगा, लेकिन महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए चुप भी नहीं रहना चाहिए।

Ad Block is Banned