लगातार बरामद हो रही शराब, जारी है इस गोरखधंधे का खेल

पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे अवैध शराब बनाने का गोरखधंधा जारी है

By: आकांक्षा सिंह

Published: 17 Nov 2017, 01:55 PM IST

चित्रकूट. निकाय चुनाव के तहत अवैध शराब की धर पकड़ के लिए चल रहे पुलिसिया अभियान के बीच एक सच्चाई जो निकलकर सामने आ रही है वो यह कि पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे अवैध शराब बनाने का गोरखधंधा जारी है. आए दिन अलग अलग स्थानों से अलग अलग मात्रा में बरामद हो रही शराब इस बात की तस्दीक करती है किस तरह आम दिनों में यह काला कारोबार बेख़ौफ़ होकर संचालित किया जाता है शराब माफियाओं द्वारा. निकाय चुनाव के तहत सख्ती करने का दम्भ भर रही पुलिस के पास इस बात का खुद कोई संतोषजनक जवाब नहीं है कि जब प्रतिदिन अवैध शराब पकड़ी जा रही है तो आखिर ये आती कहां से हैं. सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश की सीमा से तथा जनपद के कई इलाकों में अवैध शराब की बिक्री बदस्तूर जारी रहती है. चुनाव के दृष्टिगत इस काले कारोबार पर सख्ती बरत रही ख़ाकी अन्य दिनों में चुप्पी साधे रहती है और आबकारी विभाग की तो महिमा ही अपरंपार है. शायद ही इस विभाग की कोई बड़ी कार्यवाही इस गोरखधंधे के खिलाफ की हुई दिखाई पड़े. मुख्यालय से लेकर जनपद के कई ऐसे स्थान हैं जहां से पुलिस प्रतिदिन अवैध शराब बरामद करती है और इसके बावजूद भी इस गैरकानूनी धंधे का तिलिस्म टूट नहीं रहा है.

जनपद में अवैध शराब के काले कारोबार के माफियाओं को शायद पुलिस प्रशासन का कोई भय नहीं है. आए दिन अवैध शराब के साथ पकड़े जा रहे शागिर्द तो सलाखों के पीछे पहुंच जाते हैं लेकिन बड़ी मछलियां बच जाती हैं. किसी भी चुनाव में शराब की डिमांड और उसकी खपत बढ़ जाती है यह तो किसी से छिपा नहीं परंतु चुनाव के बाद विभागों की सक्रियता भी शून्य हो जाती है यह भी एक कडुवी सच्चाई है. पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे शराब की भट्टियां बेख़ौफ़ होकर जलती हैं.

 

मुख्यालय से लेकर आस पास के इलाकों में होता धंधा

अवैध शराब की भट्टियां मुख्यालय से सटे गांव टिकुरा, सीतापुर ग्रामीण, कपसेठी, सोनेपुर, बनकट, तथा कुली तलैया आदि गांवों में धड़ल्ले से धधकती हैं. इन इलाकों में कई सालों से अवैध शराब का कारोबार होता आ रहा है. कई बार तो चंद कर्मचारियों के साथ छापा मारने पहुंची आबकारी विभाग की टीम पर इस धंधे से जुड़े लोगों ने हमला तक कर दिया. कई बार पुलिस व् आबकारी विभाग की संयुक्त कार्यवाही में इस काले कारोबार पर छापा मारा गया लेकिन कार्यवाही के बाद शराब की भट्टियां फिर सुलगने लगती हैं न जाने कौन सा वरदान है शराब माफियाओं को. राजापुर तथा मानिकपुर थाना क्षेत्रों में भी इस धंधे को बेख़ौफ़ होकर संचालित किया जाता है.

 

भट्टियां तोड़ी जाती हैं फिर बन जाती हैं

अवैध शराब के इस काले कारोबार में महिलाएं ढाल की तरह इस्तेमाल की जाती हैं. जहां भी प्रशासनिक कार्यवाही होती है उस क्षेत्र में महिलाएं जो इस काम से जुडी हैं वो सामने आ जाती हैं. पुलिस व् आबकारी विभाग की टीम को सबसे मुश्किल हालातों का सामना इसी दौरान करना पड़ता है जब शराब की भट्टियां तोड़ने पहुंची टीमों के सामने महिलाएं खड़ी हो जाती हैं. ऐसे में पुलिस को सख़्ती बरतने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पुलिस इन महिलाओं को पकड़ने की हिम्मत भी नहीं दिखा पाती. इधर किसी तरह भट्टियां तोड़ी गईं और उधर पुलिस के रुख़सत होते ही नई भट्टियां फिर तैयार हो गईं. मुख्यालय के कछारी इलाकों में नदी के किनारे कई भट्टियां सुलगती रहती हैं.

 

आए दिन बरामद हो रही शराब

निकाय चुनाव को देखते हुए हलचल में आई ख़ाकी की कार्यवाही में आए दिन अवैध शराब और अभियुक्त पकड़े जा रहे हैं बावजूद इसके इसके ये शराब कहाँ कहाँ किस किस कोने में बन रही है और कहाँ कहाँ से लाई जा रही है इसका तिलिस्म टूट नहीं पा रहा. कहीं से 10 कहीं से 20 कहीं से 50 तो कहीं से 5 लीटर अवैध शराब प्रतिदिन बरामद हो रही है तो ऐसे में यह प्रश्न जरूर उठता है कि किस स्तर पर यह गोरखधंधा संचालित हो रहा है

 

क्या कहते हैं ज़िम्मेदार

अवैध शराब के इस काले कारोबार के बारे में एसपी प्रताप गोपेंद्र का कहना है कि निकाय चुनाव को देखते हुए पुलिस सख्ती बरत रही है और प्रतिदिन कार्यवाही की जा रही है. आबकारी विभाग से सूचना मांगी गई है ऐसे स्थानों की जहां यह काम किया जाता है. चुनाव के बाद भी इस अवैध व् गैरकानूनी कार्य के खिलाफ अभियान जारी रहेगा. एसपी के मुताबिक अवैध शराब बनाने व् बेंचने वालों पर नजर रखी जा रही है.

आकांक्षा सिंह
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