पाला बदलने में माहिर रहे हैं बीड़ी किंग से सांसद बने श्यामाचरण सपा व भाजपा से रहा है पुराना नाता

पाला बदलने में माहिर रहे हैं बीड़ी किंग से सांसद बने श्यामाचरण सपा व भाजपा से रहा है पुराना नाता

Akansha Singh | Publish: Mar, 17 2019 04:31:13 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

बुन्देलखण्ड की महत्वपूर्ण चित्रकूट-बांदा लोकसभा सीट से सपा ने श्यामाचरण गुप्त को प्रत्याशी बनाकर वैश्य व व्यापारी वर्ग को साधने का प्रयास किया है. इस लोकसभा क्षेत्र में व्यापारी व वैश्य वर्ग की खासी भूमिका मानी जाती है प्रत्याशियों के भाग्य निर्धारण में.

चित्रकूट: बुन्देलखण्ड की महत्वपूर्ण चित्रकूट-बांदा लोकसभा सीट से सपा ने श्यामाचरण गुप्त को प्रत्याशी बनाकर वैश्य व व्यापारी वर्ग को साधने का प्रयास किया है. इस लोकसभा क्षेत्र में व्यापारी व वैश्य वर्ग की खासी भूमिका मानी जाती है प्रत्याशियों के भाग्य निर्धारण में. वहीं दूसरी तरफ यदि बात सपा प्रत्याशी श्यामाचरण गुप्त कि की जाए तो यह कहना गलत न होगा कि श्यामाचरण पाला बदलने में माहिर माने जाते हैं. इस बात की तस्दीक उनके राजनीतिक कैरियर से भी हो जाती है. बीड़ी किंग से सांसद तक का सफर तय करने वाले श्यामाचरण गुप्त का सपा व भाजपा से पुराना नाता रहा है. सपा से पांचवीं बार उन्हें चित्रकूट-बांदा लोकसभा सीट से टिकट मिला है.

 

दल बदल के महारथी श्यामाचरण


मूलतः चित्रकूट जनपद के मानिकपुर के रहने वाले बीड़ी किंग के नाम से मशहूर बड़े कारोबारी श्यामाचरण गुप्त दल बदल के महारथी हैं. सबसे पहले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी रणक्षेत्र में उतरने वाले श्यामाचरण ने राजनीति की बिसात पर सपा व भाजपा से हमेशा नजदीकी बनाए रखी और यही कारण रहा कि जब उन्हें सपा से टिकट नहीं मिला तो भाजपा में चले गए और अब जब उन्हें आभास हो गया कि उनका टिकट भाजपा काट सकती है तो फिर सपा का दामन थाम लिया और पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया.


35 वर्षों में 7 चुनाव 5 बार हारे 2 बार जीते श्यामाचरण


सन 1984 से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले श्यामाचरण गुप्त अब तक 7 बार चुनाव के कुरुक्षेत्र में उतरे हैं. इनमें से 5 बार( 1984, 1991,1998,1999, व 2009) उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा है जबकि सन 2004 व 2014 में उन्हें क्रमशः बांदा व इलाहाबाद संसदीय सीट से विजय श्री हांसिल हुई. 2004 में वे सपा से जबकि 2014 में भाजपा से उम्मीदवार थे. यही नहीं 1995 में श्यामाचरण गुप्त की पत्नी जमुङोत्री गुप्ता ने भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद महापौर का चुनाव लड़ा लेकिन रीता बहुगुणा जोशी से वे हार गईं.


एक नज़र राजनीतिक जीवन पर


1984: निर्दलीय उम्मीदवार(बांदा लोकसभा सीट)
परिणाम: हार, स्थान: चौथा

1991: भाजपा से उम्मीदवार(इलाहाबाद संसदीय सीट)
परिणाम: हार, स्थान: दूसरा

1998: सपा से उम्मीदवार(इलाहाबाद संसदीय सीट)
परिणाम: हार, स्थान: दूसरा

1999: सपा से उम्मीदवार(बांदा लोकसभा सीट)
परिणाम: हार, स्थान: दूसरा

2004: सपा से उम्मीदवार(बांदा लोकसभा सीट)
परिणाम: जीत, स्थान: पहला

2009: सपा से उम्मीदवार( फूलपुर लोकसभा सीट)
परिणाम: हार, स्थान: दूसरा

2014: भाजपा से उम्मीदवार(इलाहाबाद लोकसभा सीट)
परिणाम: जीत, स्थान: पहला

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