कड़ाके की ठण्ड में कांप रहे राहगीर, अलाव न जलने से ठिठुरने को मजबूर

पूरा उत्तर भारत इस समय हाड़ कंपाऊ ठण्ड से ठिठुर रहा है...

चित्रकूट. पूरा उत्तर भारत इस समय हाड़ कंपाऊ ठण्ड से ठिठुर रहा है। इस मौसम में यदि कोई सबसे मजबूत सहारा है तो वह है अलाव और यही अलाव जलवाने में यदि प्रशासन की उदासीनता नजर आए तो राहगीरों को किस कदर यह ठण्ड झेलनी पड़ती है यह समझा जा सकता है। जनपद में भी कड़ाके की ठण्ड ने दस्तक दी है। पहाड़ी और जंगली इलाका होने के कारण कुछ ज्यादा ही प्रभाव देखने को मिल रहा है इस मौसम का। इन सबके बावजूद अलाव जलवाने में जिम्मेदारों की उदासीनता बदस्तूर जारी है।

 

कड़ाके की ठण्ड से जनजीवन प्रभावित

ठण्ड से ठिठुरते लोगों को यदि कहीं जलती आग तापने को मिल जाए तो वह किसी संजीवनी से कम नहीं होती। परंतु जब यही व्यवस्था अव्यस्था की भेंट चढ़ जाए तो जनता को किस हद तक परेशनियां हो सकती हैं यह समझने योग्य है। जनपद भी कड़ाके की ठण्ड की चपेट में है। पहाड़ी राजापुर मऊ थाना क्षेत्रों में राहगीरों का बड़ी संख्या में आना जाना है लेकिन अलाव के पुख्ता इंतजाम अभी तक नहीं किए गए हैं। लोग अपने संसाधनों से आग जलाकर ठण्ड से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारों को कई बार आगाह भी किया गया परन्तु नतीजा शून्य ही रहा।

 

राहगीरों को ज्यादा परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी राहगीरों को हो रही है। खुले आसमां के नीचे रात दिन बिताने वाले रहगुजर अलाव न जलने से ठिठुरने को मजबूर हैं। वहीं इस बारे में जब तहसीलदार मऊ से बात की गई तो उन्होंने अलाव के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए क्षेत्र में दर्जन भर स्थानों पर अलाव जलवाने की बात बताई लेकिन हकीकत इसके आस पास भी नहीं। बस स्टैंड पर इक्का दुक्का स्थानों पर अलाव सुलग रहे हैं वो भी होटल व ढाबा वालों के सामने, न की सार्वजनिक स्थानों पर। स्थानीय लोगों का कहना है कि होटल वाले सेटिंग से अपने सामने अलाव जलवाते हैं ताकि इसी बहाने ग्राहक उनकी दुकान पर आएं। वहीं कई दुकानदार खुद आग जलाकर ग्राहकों को ठण्ड में अपनी ओर आने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। प्रशासन की अपनी ही दलील है। मुख्यालय में भी कमोबेश यही हाल है। जितने अलाव जलवाए जा रहे हैं वो नाकाफ़ी नजर आ रहे हैं लोगों को देखते हुए।

नितिन श्रीवास्तव
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