पानी न मिलने से स्पेशल फ़ोर्स के जवान की मौत, डकैतों की तलाश में कॉम्बिंग के दौरान हुआ था लापता

पानी न मिलने से स्पेशल फ़ोर्स के जवान की मौत, डकैतों की तलाश में कॉम्बिंग के दौरान हुआ था लापता

Akansha Singh | Updated: 25 Jun 2018, 01:43:09 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

स्पेशल फ़ोर्स (मध्य प्रदेश पुलिस) के जवान की मौत पानी न मिलने से डिहाड्रेशन के चलते हो गई।

चित्रकूट. डकैतों की तलाश में गई पुलिस टीम में शामिल स्पेशल फ़ोर्स (मध्य प्रदेश पुलिस) के जवान की मौत पानी न मिलने से डिहाड्रेशन के चलते हो गई। जवान का शव 72 घण्टे बाद यूपी एमपी के सीमावर्ती सती अनुसुइया जंगल में बरामद हुआ। पुलिसकर्मी की शहादत से जहां पूरे महकमे में सनाका खिंच गया है वहीँ खाकी की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ खड़ी हुई है। स्पेशल फ़ोर्स के जवान की मौत ने खाकी को सवालों के घेरे में ला दिया है और कॉम्बिंग के दौरान किस तरह की तैयारी की जाती है इसकी हकीकत भी बयां कर दी है। फ़िलहाल रविवार रात जवान के शव का पोस्टमार्टम किया गया। हाल फ़िलहाल पानी न मिलने से उसकी मौत की वजह पुलिस के उच्चाधिकारी भी मान रहे हैं। अधिकारीयों का कहना है कि डिहाइड्रेशन के चलते जवान की मौत हुई है फिर भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा।


यूपी एमपी के सीमाई इलाकों में दहशत का साम्राज्य कायम कर चुके साढ़े पांच लाख के इनामी कुख्यात डकैत बबुली कोल की तलाश में गई मध्य प्रदेश पुलिस की टीम में शामिल एसएएफ का जवान सचिन मृत अवस्था में सीमावर्ती जंगल में पाया गया। शव मिलने से विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है। पिछले 72 घण्टे से जवान की तलाश में मध्य प्रदेश पुलिस के लगभग ढाई सौ से अधिक जवान जंगलों बीहड़ों की खाक छान रहे थे। गौरतलब है कि दस्यु बबुली की लोकेशन ट्रेस करने के लिए सीमावर्ती इलाके के बीहड़ों में उतरी मध्य प्रदेश पुलिस टीम का जवान सचिन(48) शुक्रवार को लापता हो गया था।

बबुली की तलाश में की गई थी कॉम्बिंग

दरअसल शुक्रवार को सतना पुलिस(मध्य प्रदेश) को खूंखार दस्यु सरगना बबुली कोल के जंगल में होने की सूचना मिली जिसपर पुलिस ने गैंग को घेरने के लिए रणनीति बनाते हुए यूपी एमपी के सीमाई इलाके में अपने जवानों को उतारा। कॉम्बिंग में सतना के आधा दर्जन थानों की पुलिस के आलावा एसएएफ(स्टेट आर्म्स फ़ोर्स- मध्य प्रदेश सशस्त्र पुलिस बल) के जवान भी शामिल थे। पूरे इलाके में जवानों की अलग अलग टोलियां गैंग की लोकेशन ट्रेस करने के लिए सर्च ऑपरेशन में जुटी थीं।

तपते जंगल बीहड़ में हलकान हुए जवान

आसमान से बरसती आग और तपन से सुलगते जंगल वो भी जून के महीने में किसी चुनौती से कम नहीं होते कॉम्बिंग के दौरान। भीषण गर्मी और बदन को झुलसा देने वाली धूप में तपते जंगल में कई कई किलोमीटर चलने के दौरान जवान हलकान हो गए। कुछ टोलियों के पास थोड़ा बहुत बिस्कुट व् पानी का इंतजाम था लेकिन मझगंवा थाना पुलिस की टुकड़ी के पास न तो पानी था और न ही कोई अन्य चीज। इस टुकड़ी के पास पानी खत्म हो गया था।

थानाध्यक्ष को अस्पताल में भर्ती कराया गया

बिना पानी व् अन्य खाद्य सामग्री के ख़त्म होने के चलते भीषण गर्मी और सुलगते हुए घने जंगल में मझगंवा थाना पुलिस की टुकड़ी बेहाल हो गई। यूपी एमपी के सीमावर्ती मार्ग बगदरा घाटी के पीछे घने जंगल से थानाध्यक्ष मझगवां सीएल पाण्डेय ने किसी तरह पास के नया गांव थाने(चित्रकूट मध्य प्रदेश) में पूरे हालात की सूचना दी और मदद मांगी। सूचना पर नया गांव थाना पुलिस के तीन सदस्य किसी तरह जंगल पहुंचे और थानाध्यक्ष मझगवां को जंगल से बेहाल हालत में चित्रकूट स्थित जानकीकुंड अस्पताल ले आए जहां से उन्हें सतना के लिए रिफर कर दिया गया। इस दौरान वहां मौजूद चार अन्य जवानों को नया गांव थाना पुलिस के सदस्यों ने वहीँ रुकने के लिए कहा और थोड़ी देर में पानी व् अन्य खाद्य सामग्री लेकर पहुंचने का आश्वासन दिया।

लापता हुआ स्पेशल फ़ोर्स का जवान

इस मामले में जानकारी देते हुए सतना एसपी राजेश हिंगड़कर ने बताया था कि मझगवां थानाध्यक्ष को अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद जब दोबारा नया गांव थाने की पुलिस कुछ देर बाद जंगल पहुंची तो वहां मौजूद चारों जवान लापता थे जिसकी सूचना थाना पुलिस ने अन्य थानों सहित उच्चाधिकारियों को दी। जवानों के गायब होने की खबर से हड़कम्प मच गया। घटना की सूचना पर सीमावर्ती इलाकों में जवानों की तलाश शुरू कर दी गई लेकिन कोई सुराग न लग सका, इसी दौरान देर रात लगभग 1 बजे गायब हुए चार जवानों में से तीन जवान मझगवां थाने पहुंच गए जिससे अधिकारीयों ने थोड़ी राहत की सांस ली लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि चौथा जवान सचिन (स्पेशल फ़ोर्स) नहीं आया तो पूरे महकमें में सनसनी फ़ैल गई।

पानी न मिलने से बिगड़ी टीम की हालत

सतना एसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि मझगवां थाने पहुंचे अन्य तीन जवानों ने उच्चधिकारियों को जानकारी दी कि भीषण गर्मी व् प्यास के कारण उन सभी की हालत बेहद खराब हो गई थी जिसमें सचिन बिल्कुल पस्त हो गया था। किसी तरह वे चारों(सचिन सहित) जंगल से निकलने की कोशिश करने लगे जिसपर सचिन ने अपनी राइफल वर्दी की शर्ट व् बेल्ट उन्हें दे दी और किसी तरह लड़खड़ाते हुए सभी जंगल में आगे बढ़ने लगे। जवानों ने बताया कि किसी तरह कई घण्टों के बाद जब वे मुख्य सड़क तक पहुंचे सचिन उनके साथ नहीं था। लगभग 45 मिनट तक उन्होंने उसका इंतजार भी किया लेकिन वह नहीं पहुंचा तब जाकर अन्य तीन जवान मझगवां थाने पहुंचे।

जवान की तलाश में खाक छानती रही खाकी

स्पेशल फ़ोर्स के जवान के लापता होने से पूरे पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया। रविवार सुबह आईजी जोन रीवा उमेश जोगा डीआईजी अविनाश शर्मा भी बीहड़ में उतरे लेकिन भीषण गर्मी व् सुलगते जंगल ने उन्हें भी पस्त कर दिया और खानापूर्ति करते हुए दोनों उच्चाधिकारी वापस लौट गए मातहतों को दिशा निर्देश देते हुए। जबकि सतना एसपी राजेश हिंगड़कर चित्रकूट में ही कैम्प कर जवान की तलाश में पुलिस टीमों के साथ लगे रहे।

जंगल में बरामद हुआ शव

कई घण्टे से लापता स्पेशल फ़ोर्स के जवान सचिन की तलाश में यूपी एमपी के सीमावर्ती इलाकों की खाक छान रही एमपी पुलिस के पैरों तले तब जमीन खिसक गई जब उसे सूचना मिली कि सती अनुसुईया जंगल में एक लाश पड़ी हुई है जो किसी पुलिसकर्मी की लगती है। दरअसल एक चरवाहे ने सर्चिंग में लगी पुलिस टीम को जंगल में किसी का शव मिलने की सूचना दी। सूचना पर मौके पर पहुंची जब टीम ने शव को देखा तो सभी के होश उड़ गए, शव उसी स्पेशल फ़ोर्स के लापता हुए जवान सचिन का था।

सवालों के घेरे में खाकी की कार्यप्रणाली

सचिन की शहादत ने कई सवालों को जन्म दे दिया है। डाकुओं की तलाश में नई उम्र के तेज तर्रार जवानों को ले जाने की जरूरत होती है लेकिन अधिकतर रिस्क लेते हुए अधेड़ उम्र के पुलिसकर्मी बीहड़ के कठिन हालातों में उतार दिए जाते हैं। शहीद सचिन की उम्र भी लगभग 48 साल बताई जा रही है ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि बीहड़ में इतने उम्र के पुलिसकर्मियों को उतारने का क्या औचित्य? दूसरा पहलू यह कि जब खाकी बीहड़ के हालातों से वाकिफ है तो उतनी मात्रा में पानी का इंतजाम कॉम्बिंग में लगी टीमों के लिए क्यों नहीं किया गया? तीसरा सवाल यह कि सचिन(मृत) के साथ मौजूद अन्य तीन जवान कैसे अपने एक साथी को विपरीत हालातों में छोड़कर थाने पहुंच गए? उनके साथ होने के बावजूद स्पेशल फ़ोर्स का जवान सचिन कैसे लापता हो गया? ऐसे कई सवाल आज मध्य प्रदेश पुलिस के लम्बरदारों के सामने खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब देना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। आईजी जोन रीवा उमेश जोगा ने कहा कि प्रथम दृष्टया जवान की मौत पानी न मिलने व् डिहाइड्रेशन के चलते होनी लग रही है फिर भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उधर पूरे महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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