इस कुख्यात डकैत के एनकाउंटर की खाकी ने की थी तैयारी कि तभी....

यूपी एमपी के सीमावर्ती बीहड़ों में दहशत का पर्याय बन चुके कुख्यात डकैत ने ऐन वक्त पर कोर्ट में सरेंडर कर दिया अन्यथा कहानी कुछ दूसरी होती।

By: Laxmi Narayan

Updated: 10 Feb 2018, 06:23 PM IST

चित्रकूट। यूपी एमपी के सीमावर्ती बीहड़ों में दहशत का पर्याय बन चुके कुख्यात डकैत ने ऐन वक्त पर कोर्ट में सरेंडर कर दिया अन्यथा कहानी कुछ दूसरी होती। सीमावर्ती इलाकों में खौफ की इबारत लिख चुके इस डकैत ने थोड़े ही समय में अपनी हैवानियत का परिचय देकर स्थानीय बाशिंदों में खौफ कायम कर दिया था तो वहीं खाकी के लिए खुली चुनौती बन गया था. उक्त दस्यु सरगना को ठिकाने लगाने की पुलिस की रणनीति उस समय फेल हो गई जब उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया. पत्रिका ने पहले ही डकैतों से सम्बंधित खबरों में इस बात का उल्लेख किया था कि दस्यु सरगना पुलिस के बढ़ते दबाव से बीहड़ में छिपे हुए हैं और जल्द ही पुलिस को सफलता मिलने के आसार हैं. कोर्ट में सरेंडर करने वाला कुख्यात दस्यु हैवानियत का दूसरा नाम रहे खूंखार डकैत ललित पटेल का दाहिना हाथ हुआ करता था लेकिन पिछले वर्ष जुलाई माह में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए गैंग सरगना ललित के बाद खुद पूरे गैंग की कमान संभाल रहा था। अपहरण लूट पुलिस मुठभेड़ जैसे कई संगीन मामले उक्त डकैत पर दर्ज हैं।

उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश में थी दहशत

सीमावर्ती इलाकों में दहशत की हवा घोल चुके खूंखार डकैत नवल धोबी ने सतना(मध्य प्रदेश) कोर्ट में सरेंडर कर पुलिस की रणनीति पर पानी फेर दिया। सूत्रों के मुताबिक नवल धोबी के एनकाउंटर की पूरी तैयारी कर ली गई थी लेकिन एन वक्त पर अपनी सटीक चाल चलते हुए दस्यु सरगना ने आत्मसमर्पण कर दिया। दस्यु नवल इधर कुछ दिनों से बीहड़ में छिपते-छिपाते पुलिस को चकमा दे रहा था और पुलिस ने भी इस कुख्यात दस्यु को निपटाने की पूरी तैयारी कर रखी थी परंतु सारा खेल बिगड़ गया खाकी का।

हैवानियत का दूसरा नाम ललित का शागिर्द था नवल

पिछले तीन वर्षों के दौरान यूपी एमपी सीमा पर दहशत का पराकाष्ठा पार कर चुके खूंखार दस्यु सरगना ललित पटेल का शागिर्द रह चुका है नवल धोबी। पिछले वर्ष 2017 के जुलाई माह में पड़ोसी गांव थर पहाड़ के तीन ग्रामीणों को जिंदा जलाकर मारने के बाद पुलिस की हिट लिस्ट में आए ललित पटेल का खास सिपहसलार था नवल। हर बड़ी वारदातों में नवल की खास भूमिका होती थी। ललित को साए की तरह सुरक्षा देता था नवल धोबी.

ललित के बाद संभाली गैंग की कमान

2017 में ही जुलाई महीने में नया गांव थाना क्षेत्र के जंगल में हुई पुलिस मुठभेड़ में गैंग सरगना ललित पटेल के ढेर होने के बाद नवल ने पूरे गैंग की कमान संभाल ली और इलाके में अपनी दहशत कायम कर दी। गैंग में मौजूद लगभग आधा दर्जन सदस्यों के साथ यूपी एमपी के सीमावर्ती इलाकों थर पहाड़, सेजवार, भैरम बाबा, गुप्तगोदावरी, सती अनुसुईया बगदरा घाटी आदि में विचरण करते हुए पूरी तरह से खौफ की इबारत लिख दी थी।

अपहरण व लूट की घटना को दिया अंजाम

क्षेत्र में दहशत कायम और गैंग को मजबूत करने के उद्देश्य से दस्यु नवल धोबी ने दिसम्बर 2017 में पड़ोसी गांव थर पहाड़ के दो सरकारी शिक्षकों फूल सिंह गौड़ व पप्पू पटेल का अपहरण और 10 लाख की फिरौती की मांग कर इलाके में सनसनी फैला दी थी. सतना व चित्रकूट पुलिस दिन रात एक करती रही लेकिन गैंग और अपहर्ताओं का कोई सुराग न लगा। हफ्ते भर बाद दोनों शिक्षक फिरौती देकर गैंग के चंगुल से मुक्त हुए। हालांकि चर्चा यह भी थी कि एक शिक्षक से डकैतों ने फिरौती नहीं ली। इसी वर्ष जनवरी में गैंग ने चित्रकूट के रसिन बांध के पास मत्स्य विभाग के तलाब पर हुए मछली पालन के ठेके पर धावा बोलते हुए मजदूरों को बेरहमी पीटा था और ठेकेदार से पांच लाख की रंगदारी मांगी थी।

प्रेमिका को साथ रखता था नवल

बीहड़ के सूत्रों के मुताबिक गैंग में दो महिलाएं भी चलती थीं जिनमें एक महिला गैंग सरगना नवल धोबी की प्रेमिका बताई जाती थी. नवल की प्रेमिका बीहड़ की बाहरी दुनिया से संपर्क रख गैंग को मदद मुहैया करवाती थी. सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने दस्यु सरगना नवल धोबी के परिजनों व कुछ खास करीबियों को राडार पर लेकर उसके एनकाउंटर की तैयारी शुरू की थी कि इसी बीच नवल को इस पूरी रणनीति की भनक लग गई और अपने वकील के माध्यम से उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। बहरहाल दस्यु नवल पर इनाम भले ही कम हो लेकिन दहशत के मामले में वह किसी से पीछे नहीं था. हाल फ़िलहाल उसके सरेंडर करने से सीमावर्ती इलाकों में थोडा सुकून की उम्मीद है।

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