सिक्कों के न चलने पर आक्रोशित हुए व्यापारी, सड़क पर किया धरना प्रदर्शन

बैंकों द्वारा सिक्के न लेने के विरोध में व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर धरना प्रदर्शन किया।

By: आलोक पाण्डेय

Published: 25 Sep 2017, 04:21 PM IST

चित्रकूट. त्योहारों के मद्देनजर विभिन्न प्रकार की खरीददारी में सिक्कों के न चलने और बैंकों द्वारा उन्हें न लेने के विरोध में व्यापारियों ने सड़क पर उतरकर धरना प्रदर्शन करते हुए बैंकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन को भी आड़े हांथों लिया। प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने बताया कि दुकानदार एक और दो रूपये के सिक्के नहीं ले रहे जिससे थोक व्यापारी भी सिक्कों को लेने में कतराते हैं और ये सारी समस्या बैंकों की दी हुई है क्योंकि जब बैंक ही सिक्के नहीं ले रहे तो दुकानदार और थोक व्यापारी भी उन्हें लेने से मना कर देते हैं। जिसके कारण आए दिन ग्राहकों और कारोबारियों के बीच बवाल, बहस की नौबत आ जाती है। व्यापारियों के मुताबिक इससे पहले भी बैंकों और प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया था लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक की प्रशासन भी घोर उदासीनता बरत रहा है बैंकों के खिलाफ कार्यवाही करने में और बैंक पूरी तरह से मनमानी पर उतारू हैं।

आक्रोशित व्यापारियों से वार्ता करने पहुंचे एसडीएम सदर नरेंद्र बहादुर सिंह को बताया गया कि इस समय त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और बाजार में व्यस्तता भी है ऐसे में खरीददारी भी जोरों पर चल रही है और ग्राहक जब एक या दो के छोटे सिक्के दुकानदारों को देते हैं तो दुकानदार उन्हें नहीं लेते और फिर लड़ाई झगड़ा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। छोटे दुकानदारों द्वारा सिक्के न लेने से थोक व्यापरियों दुकानदारों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ बैंक की मनमानी जारी है क्योंकि बैंक भी सिक्के लेने से मना कर देता है। आक्रोशित व्यापारियों को समझाते हुए उन्हें शांत कराया गया और समस्या के निस्तारण का आश्वासन दिया गया।

बाजार से लेकर बैंक तक एक और दो रूपये के छोटे सिक्के न चलने से आक्रोशित व्यापार मंडल के लोगों ने मुख्यालय स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) गेट के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए विरोध जाताना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान बैंकों और प्रशासन के रवैये को लेकर व्यापारी काफी आक्रोशित थे। धरना प्रदर्शन के दौरान बैंकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। व्यापारी पंकज अग्रवाल का कहना था कि कई बार बैंक और प्रशासन को चेताया गया लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। नोटबन्दी के दौरान बैंकों ने ही सबसे ज्यादा सिक्के व्यापारियों को लौटाए थे और अब उन्हीं सिक्कों को लेने से बैंक खुद मना कर रहा है।

बैंक के सामने गेट पर आक्रोशित प्रदर्शनकारी व्यापारियों को समझाने पहुंचे एसडीएम सदर को भी खरी खोटी सुननी पड़ी और व्यापारियों ने उन्हें पूरी समस्या से अवगत कराते हुए प्रशासन की उदासीनता तथा बैंकों की मनमानी से परिचित कराया। व्यापारियों का कहना था कि इससे पहले बैंक कर्मचारियों के खिलाफ इसी मामले को लेकर प्रदर्शन किया गया और रिपोर्ट तक दर्ज कराइ गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और समस्या जस की तस बनी हुई है। आक्रोशित व्यापारियों को समझाते हुए एसडीएम सदर नरेंद्र बहादुर ने कहा कि उनकी समस्याओं के जल्द निस्तारण का प्रयास किया जाएगा और बैंकों की मनमानी पर भी कार्रवाई होगी।

सिक्के बन न जाएं बवाल की वजह

नोटबन्दी लागू होने के बाद सिक्कों के न चलने की अफवाह की स्थिति अभी तक बरकरार है। खासतौर से एक रूपये के छोटे सिक्के तो इस समय चित्रकूट क्या शायद पूरे प्रदेश में लेने से मना किया जाता है। दुकानदारों द्वारा बीच में तो दस के सिक्कों के न चलने, लेने की अफवाह ने इस कदर जोर पकड़ा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को सामने आना पड़ा। परन्तु इन सबके बावजूद भी बाजार में सिक्कों के चलने और न चलने को लेकर आए दिन नई बात नई अफवाह तैरती रहती हैं जिससे कोई भी शायद ही अछूता रह पाता हो। दुकानदार सिक्के लेने से मना करते हैं और ग्राहक उनसे इस बात का सबूत मांगते हैं वस्तुतः स्थिति बवाल की बन जाती है। दूसरी तरफ बैंक और प्रशासन चैन की बंसी बजाते हुए इस समस्या पर उदासीनता बरतते हैं। यदि यही स्थिति रही तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सिक्कों के गतिमान और विराम को लेकर ग्राहकों तथा दुकानदारों में बवाल की स्थिति उत्पन्न न हो जाए और कोई बड़ी घटना न घट जाए।

आलोक पाण्डेय
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