वन्य जीवों की कब्रगाह बन रहा यूपी-एमपी का बीहड़ वर्चस्व के लिए बाघों में हुई भिड़ंत उसके बाद...

दुर्लभ वन्य जीवों के लिए यूपी-एमपी(मध्य प्रदेश) का सीमावर्ती बीहड़ जंगल कब्रगाह के रूप में तब्दील होता जा रहा है.

चित्रकूट: दुर्लभ वन्य जीवों के लिए यूपी-एमपी(मध्य प्रदेश) का सीमावर्ती बीहड़ जंगल कब्रगाह के रूप में तब्दील होता जा रहा है. पिछले एक साल के अंदर ही कई जंगली जानवरों की मौत होने से यह कहना शायद सही है. बाघ तेंदुआ भालू हिरन जंगली बिल्ली सांभर जैसे दुर्लभ जानवर सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित नहीं रह गए हैं. जनपद के रानीपुर वन्य जीव अभ्यारण्य को नेशनल पार्क बनाने की कवायद भी ठंडी पड़ गई है. वन्य जीव की मौत के एक ताजे मामले ने जंगली इलाकों में हड़कम्प मचा दिया है. हालांकि दोनों राज्यों के वन विभाग की टीम जानवरों पर लगातार नजर रखने की बात कहती रहती है.

सीमावर्ती इलाकों में असुरक्षित हैं जानवर


जनपद के पाठा क्षेत्र(मानिकपुर व मारकुंडी थाना क्षेत्र) के बीहड़ों से सटे व पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के जंगलों में जंगली जानवरों की सुरक्षा कटघरे में है. कभी शिकारियों का कहर तो कभी खेत खलिहानों की रखवाली के लिए लगाए गए कटीले व करंट के तार जहां इन दुर्लभ जानवरों के लिए मौत का सबब बनते हैं वहीं इस इलाके से गुजरे मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग से गुजरती ट्रेनें भी जानवरों के लिए यमदूत साबित होती हैं. दूसरी तरफ वन विभाग की उदासीनता भी कम नहीं. अक्सर जानवरों की मौत इस पूरे इलाके की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है.


बाघ की मौत से मचा हड़कम्प

बतौर उदाहरण दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाके के जंगल में एक बाघ की मौत से इलाके सहित वन विभाग में हड़कम्प मच गया है. दरअसल दो बाघों के आपसी संघर्ष में एक बाघ की मौत हो गई. वन विभाग ने मृतक बाघ के शव का पोस्टमार्टम कर उसी जगह उसका अंतिम संस्कार किया जहां बाघ का शव पाया गया था. बाघ का शव गुरुवार को मिला था. दो बाघों के बीच ये भीषण संघर्ष हुआ जनपद सीमा से सटे मध्य प्रदेश के मझगंवा वन रेंज के करिया बीट के जंगल में. सतना डीएफओ राजीव मिश्रा के मुताबिक बाघ के शव के पोस्टमार्टम में दूसरे बाघ से संघर्ष की पुष्टि हुई है. मृत बाघ के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म के निशान मिले हैं.


तो वर्चस्व को लेकर हुई भिड़ंत

वन विभाग का कहना है कि वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच ये संघर्ष हुआ है. रानीपुर वन्य जीव विहार(चित्रकूट यूपी) के प्रतिपालक जीडी मिश्रा के मुताबिक जंगली क्षेत्र में बाघ अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए अपने पंजो के निशान से अपनी सीमा बनाते हैं. किसी दूसरे बाघ का प्रवेश सीमा बनाने वाले बाघ को बर्दाश्त नहीं होता और उनके बीच भिड़ंत हो जाती है. ये संघर्ष तब ही रुकता है जब दोनों बाघों में से कोई एक खुद को पीछे हटा ले. वहीं मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती जंगलों में सतकर्ता बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों को सावधान करते हुए जागरूक किया जा रहा है.

जानवरों की मौत पर एक नज़र


यदि पिछले एक साल के अंदर जंगली जानवरों की मौत का विश्लेषण किया जाए तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है. बतौर उदाहरण 24 मार्च 2019 को जनपद के मानिकपुर के जंगल में सांभर भालू व बंदर की करंट से मौत. 22 जून 2019 को मुम्बई हावड़ा रेलमार्ग के मझगंवा(मध्य प्रदेश) टिकरिया रेलखंड पर ट्रेन से कटकर भालू की मौत, 17 नवम्बर 2019 को मझगंवा रेंज में करंट से सांभर की मौत, 5 जनवरी 2020 को मुम्बई हावड़ा रेलमार्ग पर मानिकपुर के पास ट्रेन की चपेट में आकर तेंदुआ की मौत, 14 जनवरी को इसी ट्रैक पर जंगली बिल्ली की मौत हुई थी. इसके अलावा शिकारियों ने इसी साल एक तेंदुए का शिकार कर उसके शव को जंगल में दफना दिया था. हालांकि शिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया.

आकांक्षा सिंह
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