जब तुलसीदास को तोता के रूप में दर्शन दिया हनुमान ने यूपी टूरिज़्म ने भी इस स्थान को लिया संज्ञान में

इस स्थान पर रामभक्त हनुमान तोतामुखी रूप में विराजमान हैं. यहां सच्चे मन से जो भी मनोकामनाएं मांगी जाती हैं वे अवश्य पूरी होती हैं.

By: Neeraj Patel

Published: 18 Sep 2020, 01:07 PM IST

चित्रकूट : भगवान राम की तपोभूमि पर सीधे यूपी टूरिज़्म की नज़र है. जनपद के महत्वपूर्ण धार्मिक ऐतिहासिक स्थलों को यूपी टूरिज़्म अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर करते हुए उनकी विशेषताएं बता रहा है और जिले को पर्यटन की दृष्टि से प्रमोट भी कर रहा है. इन्ही में से एक स्थान है तोतामुखी हनुमान मंदिर. जी हां इस स्थान पर रामभक्त हनुमान तोतामुखी रूप में विराजमान हैं. यहां सच्चे मन से जो भी मनोकामनाएं मांगी जाती हैं वे अवश्य पूरी होती हैं. लेकिन हनुमान ने ये रूप क्यों धारण किया और इस स्थान का श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास से कैसा सम्बन्ध है इसको जानने के लिए पौराणिक ग्रन्थों में उल्लखित मान्यताओं को जानना पड़ेगा.


पवित्र मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित रामघाट के हिस्से में स्थित है तोतामुखी हनुमान मंदिर. इसी मंदिर के बगल में तुलसी गुफा. तोतामुखी हनुमान रूप व तुलसीदास का सम्बंध उस एक प्रसिद्ध चौपाई से है जिसमें कहा गया है कि" चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर तुलसीदास चंदन घिसे,तिलक देत रघुबीर" अर्थात इस स्थान पर जब तुलसीदास लोगों को तिलक लगा रहे थे तो उसी समय राम व लक्ष्मण बाल रूप में तुलसीदास के सामने प्रकट हुए. लेकिन तुलसीदास उन्हें पहचान नहीं पाए. इसी समय हनुमान ने तोतामुखी रूप में तुलसीदास को उक्त चौपाई के द्वारा राम लक्ष्मण की पहचान के संकेत दिए और फिर तुलसीदास ने राम व लक्ष्मण के साक्षात दर्शन किए. यह स्थान हनुमान के सिद्धपीठ स्थानों में से एक है. जिस गुफा में तुलसीदास को राम व लक्ष्मण के दर्शन हुए आज भी वो गुफा मौजूद हैं और यहीं विराजमान हैं तोतामुखी हनुमान. हनुमान का यह रूप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है जिसके दर्शन शायद ही कहीं और हो सके.

यूपी टूरिज़्म ने इस स्थान को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर करते हुए जिले के महत्वपूर्ण धार्मिक दर्शनीय स्थलों के रूप में चिन्हित किया है. कल-कल करती पवित्र मंदाकिनी नदी और रामघाट पर स्थित इस सिद्धपीठ स्थान पर आस्थावानों का आवागमन वर्ष पर्यंत बना रहता है. यहां मनुष्य की हर मनोकामना हनुमान पूरी करते हैं. अभी तक ऐसे स्थान पहचान को मोहताज थे परन्तु अब राज्य के पर्यटन विभाग की दृष्टि में आने और प्रचार प्रसार से उम्मीद बंधी है कि पर्यटन के पटल पर जनपद का नाम भी अंकित होगा.

Neeraj Patel
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned