खोखली रणनीति से गच्चा खा गई ख़ाकी, गैंग का सुराग पाने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी

लगभग 12 घण्टे बीतने के बाद भी पुलिस को गैंग का कोई सुराग पता नहीं लग पाया।

By: आकांक्षा सिंह

Published: 25 Aug 2017, 09:31 AM IST

चित्रकूट. यूपी एमपी खासतौर से यूपी पुलिस के लिए चुनौती बने सात लाख के इनामी खूंखार डकैत दस्यु बबुली कोल से ख़ाकी की भीषण मुठभेड़ के दौरान पुलिस के जाबांज एसआई जेपी सिंह गोली लगने से शहीद हो गए, जबकि बहिलपुरवा थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी घायल हो गए। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। उधर लगभग 12 घण्टे बीतने के बाद भी पुलिस को गैंग का कोई सुराग पता नहीं लग पाया।

 

अलबत्ता सूत्रों के मुताबिक गैंग के हार्डकोर सदस्य 50 हजार के इनामी दस्यु लवलेश कोल को गोली लगने व उसकी मौत होने की खबर बीहड़ में तैर रही है। यही नहीं गैंग सरगना दस्यु बबुली कोल के भी घायल होने की खबर सूत्रों के मुताबिक बीहड़ में उड़ी है लेकिन इन दोनों खबरों की पुष्टि ख़ाकी ने अभी आधिकारिक तौर पर नहीं की। हालांकि पुलिस भी यही मान रही है कि दस्यु लवलेश कोल की मौत हुई है व बबुली कोल को गोली लगी है। इन दोनों की तलाश में भारी पुलिस फ़ोर्स के साथ सर्चिंग ऑपरेशन जारी है। इन सबके इतर एक बात जो सामने आई वो यह कि ख़ाकी की खोखली रणनीति गच्चा खा गई और एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए जबकि दूसरे जवान को गोली लग गई।

 

यह पहली घटना नहीं जिसमें पुलिस ने दस्यु गैंग से सीधी मुठभेड़ में अपनों को खोया है। इससे पहले भी जब जब डकैतों से पुलिस की सीधी मुठभेड़ हुई तब तब ख़ाकी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक दस्यु गैंगों से मुठभेड़ में पुलिस के लगभग दर्जन भर से अधिक जाबांज वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। इन सबके बावजूद पुलिस गैंग के खिलाफ ठोस रणनीति बनाने में विफल रहती है और जाबांजों को अपनी जान देकर वर्दी की कीमत चुकानी पड़ती है।

पाठा के बीहड़ों में दहशत का पर्याय बने कुख्यात डकैत बबुली कोल से गुरूवार को ख़ाकी की वो मुठभेड़ हुई जिसके बारे में खुद ख़ाकी को भी अंदाजा नहीं था। आमतौर पर गैंग के बीहड़ों में होने की सूचना पर कम्बिंग करने वाली पुलिस ने इस बार यही चूक कर डाली। अत्याधुनिक हथियारों से लैस दस्यु गैंग को घेरने की ठोस रणनीति बनती इससे पहले ही गैंग ने पुलिस को संभलने का मौका दिए बिना गोलियों की बौछार शुरू कर दी और बिना किसी सटीक घेरेबंदी के पुलिस के जाबांज एसआई जनपद के रैपुरा थाने में तैनात जेपी सिंह गोली लगने से शहीद हो गए।

कहां थी बुलेटप्रूफ़ जैकेट

गैंग की लोकेशन मिलने पर उसे ख़त्म करने के इरादे से बीहड़ में उतरी पुलिस के पास क्या बुलेटप्रूफ़ जैकेट नहीं थी जो उसके जाबांज पहनकर गैंग से मोर्चा लेते? यह एक यक्ष प्रश्न बन गया है। बीहड़ के चप्पे चप्पे से वाकिफ़ डाकू ये जानते हैं कि कहां से और किन स्थानों से पुलिस से मोर्चा लिया जा सकता है। इसके इतर पुलिस यदि मुठभेड़ के इरादे से गई थी तो उसके कितने जवानों के पास बुलेटप्रूफ जैकेट थी यह कोई बताने को तैयार नहीं। आमतौर पर बीहड़ में कॉम्बिंग के समय अधिकतर पुलिसकर्मी बिना बुलेटप्रूफ़ जैकेट के विचरण करते हैं क्योंकि उन्हें आभास होता है कि शायद ही गैंग से उनकी सीधी मुठभेड़ हो लेकिन इस बार पुलिस का यह अंदाजा उल्टा पड़ गया और खाकी ने जैसे ही गैंग के लोकेशन वाले निही चिरैया गांव के जंगल में कदम रखा कि गैंग ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। उसी दौरान एसआई जेपी सिंह के सीने को डकैतों की गोली ने अपना निशाना बना लिया। ठीक एक घण्टे बाद जनपद के बहिलपुरवा थानाध्यक्ष वीरेंद्र त्रिपाठी को भी गोली लगी लेकिन गनीमत रही की गोली उनके कमर में लगी। घायल एसओ को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

डकैत की मौत व गोली लगने की खबर

इस बीच बीहड़ के सूत्रों के मुताबिक फिजा में दस्यु बबुली कोल को गोली लगने व् उसके दाहिने हाथ 50 हजार के इनामी डकैत दस्यु लवलेश कोल की गोली लगने से मौत की तैरती खबर ने खाकी को भी परेशान कर दिया। पुलिस खुद मान रही है कि लवलेश कोल की मौत हुई है और सरगना बबुली कोल को गोली लगी है लेकिन पुख्ता सुराग नहीं लग पाया। इस बीच गैंग का एक हार्डकोर मेंबर राजू कोल गोली लगने से घायल हो गया और पुलिस की गिरफ्त में आ गया।

कई थानों की फ़ोर्स सहित एमपी पुलिस ने जंगल को घेरा

गैंग के सफाए को लेकर बौखलाई ख़ाकी ने ऐंडी चोटी का जोर लगा दिया है। चित्रकूट के अलावा बांदा हमीरपुर महोबा की पुलिस फ़ोर्स भी जनपद पहुंचकर जंगलों की घेरेबंदी में लग गई है। उधर पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सतना जनपद की पुलिस फ़ोर्स भी सीमाई इलाकों की घेरेबंदी कर चुकी है। बीहड़ के सूत्रों के मुताबिक दस्यु बबुली कोल दोनों राज्यों के सीमाई इलाकों के बीहड़ों में पनाह ले सकता है और पुलिस को भी इस बात की जानकारी है।

सीधी मुठभेड़ में गई कई जाबांजों की जान

बीहड़ में जब जब ख़ाकी व् डकैतों के बीच सीधी मुठभेड़ हुई है तब तब पुलिस ने अपने जाबांजों को खोया है. इन्ही घटनाओं से सबक लेते हुए एसटीएफ ने खूंखार डकैत ददुआ व् ठोकिया को सटीक मुखबिरी के चलते मौत की नींद सुलाया था. मुठभेड़ में अब तक दर्जन भर से अधिक ख़ाकी के जाबांज डाकुओं की गोली का निशाना बन चुके हैं. सन् 2007 में ठोकिया ने घात लगाकर 7 एसटीएफ जवानों को उस समय गोलियों से छलनी कर दिया था जब एसटीएफ टीम ददुआ का ख़ात्मा करने के बाद ठोकिया की तलाश में चित्रकूट व बांदा सीमा पर स्थित फतेहगंज जंगल से गुजर रही थी. सन 2009 में चित्रकूट के राजापुर थाना क्षेत्र स्थित जमौली गांव में लगातार 52 घण्टों तक चली डकैत घनश्याम केवट व् पुलिस की मुठभेड़ में 6 जवान अकेले डकैत घनश्याम केवट की गोलियों का निशाना बन गए थे. सन 2015 में दस्यु बलखड़िया से मुठभेड़ में पुलिस के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे लेकिन गनीमत रही की वे बच गए. सन 2013 में दस्यु गौरी यादव ने पुलिस टीम पर हमला करते हुए दरोगा को गोलियों से भून दिया था.

बहरहाल पाठा का बीहड़ गुरुवार को गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा। समाचार लिखे जाने तक एडीजी इलाहाबाद एसएन साबत डीआईजी चित्रकूटधाम रेंज ज्ञानेश्वर तिवारी सहित चित्रकूट एसपी प्रताप गोपेन्द्र सर्चिंग ऑपरेशन में जुटे हैं.

आकांक्षा सिंह
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