कोरोना के बाद अब पेट्र्रोल-डीजल ने तोड़ी उद्योग-व्यापार की कमर

कोरोना संकट के कारण चित्तौड़ का मार्बल उद्योग हो या सामान्य व्यापार अब तक पटरी पर नहीं आ सके है। पहले ही मांग के संकट से जूझ रहे बाजार की आर्थिक दृष्टि से कमर डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने तोड़ दी है। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढऩे का सीधा असर कारोबार के साथ आमजन पर भी आ रहा है। ट्रांसपोर्टर भी डीजल महंगा हो जाने से काम करना मुश्किल बताने लगे है तो मार्बल उद्योग में लागत बढऩे का संकट आ गया है।

By: Nilesh Kumar Kathed

Published: 26 Jun 2020, 11:31 PM IST

चित्तौडग़ढ़. कोरोना संकट के कारण चित्तौड़ का मार्बल उद्योग हो या सामान्य व्यापार अब तक पटरी पर नहीं आ सके है। पहले ही मांग के संकट से जूझ रहे बाजार की आर्थिक दृष्टि से कमर डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने तोड़ दी है। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढऩे का सीधा असर कारोबार के साथ आमजन पर भी आ रहा है। ट्रांसपोर्टर भी डीजल महंगा हो जाने से काम करना मुश्किल बताने लगे है तो मार्बल उद्योग में लागत बढऩे का संकट आ गया है। पहले ही मांग नहीं होने से पत्थर महंगा हो गया तो खरीदार कहां से आएगा ये सोच उद्यमी चिंता में है। कोरोनाकाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल से आमजन भी हैरान-परेशान है। पहले ही रोजगार के संकट से गुजर रहा आमजन अब डीजल महंगा होने से जरूरी सामग्री की कीमते बढऩे से आशंकित है।
लॉकडाउन के कारण चित्तौैडग़ढ़ में उद्योग-व्यापार करीब दो माह पूरी तरह बंद रहा। इसके बाद आर्थिक गतिविधियां शुरू तो हुई लेकिन मांग नहीं बढ़ रही है। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने कारोबोरियों की मुसीबत बढ़ा दी है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टर दावा कर रहे है कि उनकी परिवहन लागत २० से ३० फीसदी तक बढ़ गई है। ऐसे में भाड़ा बढ़ाए बिना ट्रक चलाना कठिन हो जाएगा। ट्रांसपोर्टर किराया बढ़ाते है तो उसका असर व्यापार के हर क्षेत्र में पडऩा तय है। ऐसे में उत्पाद की लागत बढऩे पर अंतिम असर उसकी खरीद करने वाले आम उपभोक्ता की जेब पर भी पड़़ेगा।
पहली बार डीजल के दाम 80 रुपए के पार
चित्तौडग़ढ़ में पहली बार डीजल के दाम80 रुपए प्रति लीटर से अधिक पहुंचे है। पेट्रोल की कीमत 86 रुपए प्रति लीटर से अधिक हो चुकी है। पेट्रोलियम उत्पाद विक्रेता मानते है कि दामों में कमी नहीं आने पर कोरोनाकाल में आर्थिक संकट के चलते मांग कम हो सकती। ऐसे में सीधा असर उनकी आय पर भी आएगा। डीजल की कीमतों का असर व्यापारी से लेकर किसान तक सब पर दिख रहा है। खेती की सीजन में ट्रेक्टर से जुताई-बुवाई करने के लिए भी किसान को महंगा डीजल खरीदना पड़ रहा है।

डीजल महंगा होने का सीधा असर मार्बल उद्योग पर
डीजल महंगा होने का सीधा असर मार्बल उद्योग पर पड़ा है। पहले ही मांग नहीं होने से खर्चा नहीं निकाल पा रहे है।मार्र्बल माइंस में जेसीबी, फोकलैंड जैसी मशीन डीजल से ही चलती है। मार्बल परिवहन की लागत भी बढ़ेगी। डीजल के दाम कम नहीं होते तो मार्बल बीस से तीस फीसदी महंगा हो जाएंगा। महंगा मार्बल खरीदने वाला नहीं मिला तो यूनिटे बंद होगी और बेरोजगारी बढ़ेगी। डीजल महंगा होना हर तरह के उत्पादों की कीमत बढ़ाएगा।
गोविन्द गदिया, वरिष्ट मार्बल उद्यमी, चित्तौैडग़ढ़

अब तक भाड़ा नहीं बढ़ाया गया
डीजल महंगा होता जा रहा लेकिन अब तक भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है। हमारी डीजल खर्च १५-२० फीसदी तक बढ़ गया है। कोरोना संकट के चलते पहले ही ट्रांसपोर्ट बिजनेस ठप रह चुका। अब डीजल की मार झेलना कठिन है। इस व्यवसाय व आमजन को बचाने के लिए सरकार को राहत देने का पहल करनी होगी।
माणकलाल साहू, ट्रांसपोर्टर, निम्बाहेड़ा

Nilesh Kumar Kathed Bureau Incharge
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned