चित्तौडग़ढ़. दिया गया खून किसकी जिंदगी बचाने के काम आएगा ये कोई भी नहीं जानता था फिर भी हर कोई बेताब था जीवनदाता बनने के लिए। कोई परिवार के संग तो कोई मित्रों के संग रक्तदान ही इस पवित्र मुहिम में सहभागी बनने के लिए आया था। रक्तदान की ऐसी होड रही कि शिविर समय समाप्त होने पर भी लोग पहुंचते रहे। ये माहौल शुक्रवार को विश्व रक्तदाता दिवस पर राजस्थान पत्रिका एवं आचार्य श्रीतुलसी ब्लड फाउण्डेशन (एटीबीएफ) के संयुक्त तत्वावधान में सांवलियाजी जिला चिकित्सालय परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में दिखा। जिला चिकात्सालय के ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित शिविर का शुभारंभ सुबह ९ बजे अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) मुकेश कलाल,प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश वैष्णव एवं एटीबीएफ के संस्थापक सुनील ढीलीवाल ने सरस्वती की तस्वीर पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। कलाल ने कहा कि रक्तदान से बड़ी मानव सेवा कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविर लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते है। कलाल ने कहा कि जिला प्रशासन रक्तदान जैसे सामाजिक कार्यो को प्रोत्साहन देने के लिए सदैव तत्पर है। सुबह ९ बजे शिविर शुरू होने से पहले ही रक्तदाता वहां पहुंचने लगे। दोपहर एक बजे शिविर अवधि समाप्त होने के बाद तक भी उनका आना जारी रहा। रक्तदान के प्रति उत्साह का आलम ये था कि ब्लड बैंक परिसर में लगाए छह बैड भी कम पड़ रहे थे और रक्तदाताओं को प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी।

बेटी तैयार हुई तो मां ने २२ वर्ष बाद किया रक्तदान
शिविर में प्रतापनगर क्षेत्र निवासी ४५ वर्षीय कृष्णा बैरवा ने २३ वर्षीय पुत्री जीविका के साथ रक्तदान करने पहुंची। पुत्री ने पहली बार रक्तदान किया तो पहले सात-आठ बार रक्तदान कर चुकी कृष्णा भी करीब २२ वर्ष बाद फिर रक्तदान के लिए प्रेरित हो उठी। पुत्री जीविका ने कहा कि वे काफी समय से रक्तदान की भावना मन में लिए हुए थी। जीविका की प्रेरणा से बाद में उनकी सहेली दीपिका गुप्ता भी रक्तदान के लिए पहुंंच गई।

मामा के घर आई शोक जताने पहुंच गई खून देने
गांधीनगर सेक्टर पांच में नानी का निधन होने से मामा के घर शोक जताने आई मध्यप्रदेश के नीमच जिले की रतनगढ़ निवासी पिंकी मूंदड़ा को सुबह पत्रिका से रक्तदान शिविर के बारे में जानकारी मिली। इस पर पहली बार रक्तदान की चाह उन्हें शिविर स्थल पर ले आई। पिंकी ने बताया कि रक्तदान करने के बाद अब उनकी नियमित ऐसा करने की इच्छा है।

नारी शक्ति ने भी दिखाया खून देने का जज्बा
शिविर में रक्तदान के लिए लोग परिवार संग भी पहुंचे। अनिल गिदवानी पत्नी कविता व दो पुत्रियों निशिगंधा व प्राची के साथ रक्तदान के लिए पहुंचे। इनमेे से प्राची हिमोग्लोबिन कम होने से रक्त नहीं दे पाई लेकिन परिवार के बाकी तीन सदस्यों ने रक्तदान किया। पुरूषों के साथ महिलाएं भी रक्तदान में पीछे नहीं रही। रक्त देने वालों में राखी गुप्ता, नीरजा गर्ग, सृष्टि जैन, मंजू, कविता आदि महिलाएं भी शामिल थी।

पता चला तो पहुंच गए खून देने
शिविर में रक्तदान के लिए कुछ लोग पहले से मानस बनाए हुए थे तो कुछ अचानक जानकारी मिलते ही भावना जागृत होने से पहुंच गए। कपासन से उज्जवल दाधीच, भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष गगन बोकडिय़ा, सावा के भैरूलाल, सोनियाणा के कन्हैयालाल ऐसे ही लोगों में शामिल थे।

हिमोग्लोबिन की कमी से लौटना पड़ा निराश
शिविर में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं रही जो रक्तदान की भावना लिए वहां पहुंचे लेकिन हिमोग्लाबिन कम होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं व युवतियोंं की रही। चिकित्सा टीम ने शरीर में हिमोग्लोबिन १२.५ एमजी से अधिक होने पर ही रक्त लिया। जिनके हिमोग्लोबिन कम मिला उन्हें इसे बढ़ाने के बारे में सुझाव भी दिए गए।

रक्तदाताओं को दिए प्रमाणपत्र
शिविर में रक्तदाताओं को प्रोत्सहित करने के लिए प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। कुछ प्रमाणपत्र अतिरिक्त जिला कलक्टर मुकेश कलाल ने भी वितरित किए। प्रमाणपत्र पाकर रक्तदाता उत्साहित दिखे।

शिविर को सफल बनाने में इनका रहा सहयोग
शिविर को सफल बनाने में टीम एटीबीएफ के साथ ब्लड बैंक प्रभारी लीलाशंकर व उनकी टीम का भी सहयोग रहा। रक्तदाताओं की हौंसाला अफजाई करने के लिए भारत विकास परिषद के अध्यक्ष दिनेश खत्री, महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पहलवान सालवी आदि भी पहुंचे। शिविर सफल बनाने के लिए सहयोग करने वालों में एटीबीएफ कॉर्डिनेटर देव शर्मा, अपुल चीपड़, अर्पित बोहरा, ओम जैन, रवि सिंघवी, राहुल अग्रवाल, दीपक जैन, मुकेश शर्मा, मुकेश जाट, संजय जैन, महिला कॉर्डिनेटर हरदीप कौर, वंदना अग्रवाल, नीरजा गर्ग, चंदा डांगी, सोनू जांगिड़, पिंकी सोमानी आदि शामिल थे।

 

 

 

 

 

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