सेवा का मौका बहुत भाग्य से मिलता है

चित्तौडग़ढ़. ईश्वर सेवा का मौका हर किसी को नहीं देता है। बहुत भाग्यशाली होते है जिन्हें भगवान मानव सेवा का अवसर प्रदान करता है। इसलिए डॉक्टरी पेशे में रहते हुए जितनी हो सके उतनी मानव सेवा करनी चाहिए। हालाकि अब धीरे-धीरे इस पेशे को भी लोगों ने व्यवसायिक रुप दे दिया है। यह कहनाहै चिकित्सा के पेशे से जुडे चिकित्सकों का।

By: Avinash Chaturvedi

Updated: 01 Jul 2020, 05:33 PM IST

चित्तौडग़ढ़. ईश्वर सेवा का मौका हर किसी को नहीं देता है। बहुत भाग्यशाली होते है जिन्हें भगवान मानव सेवा का अवसर प्रदान करता है। इसलिए डॉक्टरी पेशे में रहते हुए जितनी हो सके उतनी मानव सेवा करनी चाहिए। हालाकि अब धीरे-धीरे इस पेशे को भी लोगों ने व्यवसायिक रुप दे दिया है। यह कहनाहै चिकित्सा के पेशे से जुडे चिकित्सकों का। कोरोना काल के अनुभव बताते हुए चिकित्सकों का कहना था कि कम संसाधन में भी पूरे जज्बे के साथ काम किया और उसी का परिणाम है कि यहां पर कोरोना के मिले रोगियों को पूर्ण रुप से स्वस्थ्य कर सके।
जिला सामान्य चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. दिनेश वैष्णव का कहना है कि कोरोना काल में चिकित्सकों एवं संसाधनों की कमी थी लेकिन फिर भी जो भी संसाधन एवं चिकित्सक थे उनके सहयोग से व्यवस्था बनाने का हर संभव प्रयास किया गया। पीएमओ डॉ दिनेश वैष्णव का कहना है कि जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी एवं संसाधनों का अभाव के कारण कोरोना काल में परेशानियों का सामना जरूर करना पड़ा लेकिन चिकित्सक साथियों के समर्पण एवं टीम भावना से किया गया कार्य ने हमें हर मुश्किल से जूझने का हौसला दिया चिकित्सालय में वेंटिलेटर की कमी थी ऐसे में एक बार दो हम सभी घबरा गए की कोरो ना जी आपात परिस्थितियों में किस किस तरह से आने वाले रोगियों को संभाला जाएगा पर उनका इलाज किया जाएगा वही फिजिशियन नहीं होने से भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा कम चिकित्सकों में सभी तरह की ओपीडी जिला शिशु एवं मात् चिकित्सालय चिकित्सालय की गतिविधियों को संचालित करना भी चुनौतीपूर्ण काम था फिर भी चिकित्सकों की कमी व संसाधनों के अभाव के बीच भी व्यवस्था बनाने में सभी के प्रयास सार्थक रहे उन्होंने बताया कि मानव सेवा के इस पुनीत कार्य में चिकित्सालय का हर एक कर्मचारी पूरी शिद्दत के साथ सेवा में जुट गया किसी ने भी यह नहीं सोचा की मेरी ड्यूटी कितने समय की है यही कारण रहा कि कोरोना के आए मरीज से ठीक होने में भी ज्यादा समय नहीं लगा हालांकि सरकार से कोरोना काल में चिकित्सा के उपकरण वेंटिलेटर सीपेड, वाइपर आदि उपलब्ध हो गए लेकिन हर किसी ने अपने सेवा के धर्म को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया कि यहां पर कोरोना में लगे चिकित्सक व स्टाफ को भी क्वारंटाइन रहना पड़ा इसके बाद भी उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया और पूरे जोश के साथ पुराना रोगियों की सेवा में लगे रहे वैष्णव का कहना है कि चिकित्सक के रूप में मानव सेवा करने का अवसर बहुत ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है।
हमने हिम्मत नहीं हारी
जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ अनीश जैन का कहना है कि मानव सेवा का दूसरा नाम ही चिकित्सक होता है उन्होंने बताया कि कोरोना में एकमात्र फिजिशियन होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी कई बार शुरू के दौर में ऐसा लगा कि कोरोना संक्रमण के मरीज का उपचार कम संसाधनों मैं कैसे हो पाएगा यहां पर कोई अनहोनी ना हो इसके लिए हर समय सजग रहे साथ ही संक्रमित रोगियों को भी हमेशा यही कहते रहे कि घबराने की जरूरत नहीं है वह अपना मनोबल बनाए रखें तो संक्रमण का दौर निकल जाएगा संसाधनों की कमी के बीच काम करना कुछ कठिन था लेकिन टीम के साथ हौसले से आगे बढ़े तो कुछ भी मुश्किल नहीं लगा हालांकि परिवार वालों को सदैव यह भी सताता था कि कहीं हम संक्रमित ना हो जाए लेकिन उन्हें भी बार-बार यही समझाया कि सेवा के इस प्रोफेशन में सबसे बड़ा धर्म ही हमारा लोगों की सेवा करना है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा खुशी उस समय हुई जब पहले तीन संक्रमित रोगी ठीक होकर अपेन घर गए और उन्होंने कहा कि हम तो सोच रहे थे कि हम ठीक हो सकेंगे या नहीं लेकिन आप लोगों की मेहनत एवं हौसलें ने हमें ठीक कर दिया। उन्होंने इस बात पर चिन्ता जताई कि नई पीढ़ी जो इस प्रोफेशन में आ रही है उनकी सोच पूरी तरह से व्यवसायिक हो गई है। वो सिर्फ इस व्यवसाय को चंद घंटो की नौकरी समझ रहे है। उन्होंने कहा कि सरकार एक चिकित्सक तैयार करने में करीब एक करोड रुपए खर्च करती है लेकिन आज के युवा विदेशों में जाकर अपनी सेवाएं दे रहे है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा के इस पुनित कार्य में चिकित्सकों को रोगी को भगवान समझकर उसकी सेवा करनी चाहिए। दवा से अधिक अपका उसके प्रति प्रेम उसके रोग को ठीक करने में कारगर साबित होगा।
हमारी खुशनसीबी है कि हम चिकित्सक है
निम्बाहेड़ा में कोरोना विस्फोट के दौरान पूरी मुस्तेदी के साथ अपनी सेवा देने वाले निम्बाहेड़ा के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंसूर अली का कहना है कि सेवा का यह अवसर बहुत कम लोगों को मिलता हे। हम खुशनसीब है कि हम चिकित्सक बन सके और सेवा का अवसर मिल सका। कोरोना काल में हमने यहां पर बिना किसी घबराहट के पूरी टीम भावना से काम किया। काम बांटने से पहले यह देखा कि किस व्यक्ति को कौन सा काम दिया जाए कि वह अच्छी तरह से करा सके। उसे वहीं जिम्मेदारी दी गई। हाला कि शुरू में भय भी लगा लेकिन हौसला बनाए रखा और लोगों को भी मनाबल बनाने के लिए प्रेरित करते रहे। सैमल लेने, क्वारंटीन करने से लेकर हर वो काम किया जो इस काल में करना जरूरी था। जब पॉजिटिव के सम्पर्क में आए और हमें क्वारंटीन किया तो भी हम उस दौर में भी अपने काम में लगे रहे। टीम के साथ पूरा समय दिया तो अीम ने भी पूरी हिम्मत से रोगियों की सेवा की। यह टीम वर्क का ही नतीजा था कि निम्बाहेड़ा में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले लेकिन वे स्वस्थ हो गए। डॉं.मंसूर बताते है कि कोरोना में सेवा का जो अवसर मिला शायद उनके जीवन काल का यह सबसे स्वर्णिम अवसर था जो लोगों की सेवा करने का मौका ईश्वर ने उन्हें दिया। चिकित्सक के इस पेशे में जिस उद्देश्य के साथ आए थे उसे पूरा करने का मौका हर किसी को नहीं मिलता है।

Avinash Chaturvedi
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