छह दिन तक लगाती रही कोविड जांच के लिए गुहार

चित्तौडग़ढ़. जिले के बेगूं उपखण्ड मुख्यालय में रहने वाली एवं काटून्दा में कार्यरत महिला आयुष चिकित्सक की सतर्कता के चिकित्सा विभाग एवं क्षेत्र के लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने से बच गया। पॉजिटिव आई चिकित्सक करीब छह दिनों तक अपने अधिकारियों से कोविड की जांच कराने की गुहार लगाती रही लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। अंत में वह स्वयं ही सामुदायिक प्रभारी के पास पहुंची और पॉजिटिव आने की आशंका से जांच कराने के लिए कहा। तब जाकर उसकी जांच हुई और वह पॉजिटिव आ गई। इसके बाद चिकित्सा विभाग में हडकम्प सा मच गया

By: Avinash Chaturvedi

Published: 17 Jun 2020, 04:43 PM IST

चित्तौडग़ढ़. जिले के बेगूं उपखण्ड मुख्यालय में रहने वाली एवं काटून्दा में कार्यरत महिला आयुष चिकित्सक की सतर्कता के चिकित्सा विभाग एवं क्षेत्र के लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने से बच गया। पॉजिटिव आई चिकित्सक करीब छह दिनों तक अपने अधिकारियों से कोविड की जांच कराने की गुहार लगाती रही लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। अंत में वह स्वयं ही सामुदायिक प्रभारी के पास पहुंची और पॉजिटिव आने की आशंका से जांच कराने के लिए कहा। तब जाकर उसकी जांच हुई और वह पॉजिटिव आ गई। इसके बाद चिकित्सा विभाग में हडकम्प सा मच गया था। चिकित्सा विभाग की इस लापरवाही से कई लोग कोरोना के शिकार हो सकते थे।
बेगूं उपखण्ड के काटून्दा में कार्य करने वाली एक महिला आयुष चिकित्सक गत 12 जून को कोरोना पॉजिटिव आई थी। यह चिकित्सक क्वारंटी सेन्टर एवं कोविड सेन्अर पा पिछले तीन माह से लगातार अकेली काम देख रही थी। इसके साथ एक अन्य चिकित्सक शाह आलम को लगाया लेकिन वह पिछले तीन माह से एक भी दिन ड्यूटी पर नहीं आया। ऐसे में महिला चिकित्सक ही अकेली ही 90 दिन से लगातार महिला चिकित्सक अकेली कोविड सेंटर एवं क्वारंटीन सेंटर की देखभाल कर रही थी। ऐसे में रोगियों को दवा आदि देने एवं बाहर से आए प्रवासियों की व्यवस्था का जिम्मा भी इन्हीं का था। इसी बीच उसे छह जून को इस बात का अहसास होने लगा कि वह कोरोना पॉजिटिव हो सकती है। बुखार आदि के लक्षण भी आने लगे। इस पर उसने ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी ललित धाकड़ से अपनी जांच कराने का आग्रह किया लेकिन उसकी जांच नहीं करवाई गई। छह दिनों में महिला चिकित्सक ने कई बार इस बात के लिए आग्रह किया था लेकिन उसकी नहीं सुनी। इसके बाद वह ११ जून को सामुदायिक चिकित्सालय प्रभारी नरेंद्र शर्मा के पास पहुंची। उसने शर्मा से कोरोना पॉजिटिव होने का संदेह व्यक्त करते हुए जांच की मांग की । नरेंद्र शर्मा ने 12 जून को महिला चिकित्सक की जांच कराई जो पॉजिटिव पाई गई। चिकित्सक ने बताया कि उसे पॉजिटिव होने की संभावना नजर आ रही थी ऐसे में उसने खुद को घर पर रहते हुए अलग कमरे में बंद किया। परिजनों के संपर्क में भी नहीं आई जिसके चलते परिवार एवं स्टाफ के अन्य सदस्य संपर्क में नहीं आए। महिला चिकित्सक की सतर्कता से कई व्यक्ति पॉजिटिव आने से बचे।
इसके बाद चिकित्सा विभाग में हड़कम्प मच गया और करीब ४६ लोगों के सैम्पल भी जांच के लिए लिए गए। इसमें से ४० की रिपोर्ट नेगेटिव आई जबकि ६ के सैम्पल रिपिट किए गए है।
नहीं दिए संसाधन
महिला चिकित्सक एवं उसके पति का आरोप है कि क्वारंटीन सेन्टर एवं कोविड सेन्टर पर लगा तो दिया लेकिन बार-बार मांगने के बाद भी उसे पूरे संसाधन नहीं दिए गए। यहां तक कि थर्मल स्क्रीनिंग मशीन भी नहीं दी गई। महिला चिकित्सक के पति का भी आरोप है कि महिला चिकित्सक को लगातार 90 दिन से साधनों के आभव में लोगो की स्क्रीनिंग करनी पड़ी। बार बार कहने पर भी उसकी जांच नहीं की गई। परिजनों एव अन्य लोगो की जांच के लिए विधायक राजेन्द्र सिंह विधूड़ी से आग्रह किया। चिकित्सा विभाग ने लापरवाही की है।
पॉजिटिव आने को लेकर असमंजस
चिकित्सा अधिकारी महिला चिकित्सक को कॅरोना पॉजिटिव होने का कारण नहीं बात पाए। अधिकारी भी असमंजस में है। विभाग के अधिकारी महिला चिकित्सक पर दबाव बना रहे कि उसको पॉजिटिव स्वयं के घर से ही हुआ। महिला चिकित्सक ने बताया कि उसके पति लोक डॉउन पूर्व ही बेगंू थे जो 3 जून को उदयपुर गए। स्वयं भी इन दिनों ड्यूटी के अलावा कहीं नहीं गई। ऐसे में उसे बाहर से आने वालों से ही साधनों के अभाव में संक्रमण हुआ है। क्षेत्र में क्वारंटीन सेन्टर पर रह रहे लोगो की समुचित जांच होनी चाहिए।

इनका कहना है...
महिला चिकित्सक के साथ नियुक्त चिकित्सक शाह आलम जयपुर के रामगंज क्षेत्र में रहता है । अवकाश पर गया था फिर वही रहा गया। किसी भी रोगी की जांच कराने के लिए नरेंद्र शर्मा अधिकृत है। चिकित्सा विभाग ने लापरवाही नही की है
- ललित धाकड़, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी बेगूं चित्तौडग़ढ़

Avinash Chaturvedi
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