सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मरीजों पर भारी, अस्पतालों से डिलीवरी व सीजेरियन पैकेज आउट!

योजना का लाभ लेने के लिए मरीज को भर्ती की तारीख में ही कार्ड अस्पताल में लाना होगा। ऐसे में मरीजों को दिक्कत होगी...

Dinesh Saini

December, 1605:49 PM

चित्तौडगढ़़। राज्य सरकार की कैशलेस उपचार की स्कीम भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के दो साल पूरे होने के बाद अगले दो सालों के लिए नई गाइडलाइन और पैकेज जारी कर दिए है। इसमें सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा फायदा देने वाले सीजेरियन व नॉमर्ल डिलीवरी के पैकेज को ही हटा दिया है। इसका सीधा फायदा बीमा कंपनी को होगा, क्योंकि प्रदेश में करीब चार से पांच फीसदी सीजेरियन व नॉमर्ल डिलीवरी के होते है। योजना का लाभ लेने के लिए मरीज को भर्ती की तारीख में ही कार्ड अस्पताल में लाना होगा। ऐसा करने पर ही मरीज को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में कैशलेस उपचार का फायदा मिल पाएगा। संभागीय मुख्यालयों के अस्पतालों में मरीज दूसरे जिले के होते है। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कत होगी। योजना में मरीजों की वैरीफिकेशन के लिए बायोमेट्रिक से पहचान जरूरी कर दी है।

 

पैकेज भी कम, प्रीमियम भी बढ़ा
भामाशाह योजना में पहले 1715 पैकेज मिलते थे, जो अब 1401 कर दिए गए हैं। ऐसे में बदलाव के साथ 314 पैकेज कम कर दिए गए हैं। जबकि सरकार प्रति परिवार प्रीमियम राशि भी पहले से ज्यादा खर्च करेगी। पहले एक परिवार पर 370 रुपए प्रीमियम दिया जा रहा था जो अब 126 3 रुपए हो जाएगा।

 

अब एक घंटे में लाना होगा कार्ड
नई गाइडलाइन के मुताबिक मरीज को योजना का फायदा लेने के लिए आईसीयू, जनरल वार्ड और डे केअर प्रोसिजर में भर्ती के एक घंटे में ही कार्ड लेकर आना होगा। योजना में भर्ती 20 फीसदी मरीज जनरल पैकेज में भर्ती होते है।

 

बिना बताए मरीज गया, तो नहीं मिलेगा क्लेम
योजना में पहले अस्पताल से बिना बताए चले जाने वाले मरीज का पूरा पैसा मिलता था, अब यह फायदा बंद कर दिया है। मरीज कितने भी दिन भर्ती रहा हो, उसका पैसा नहीं मिलेगा। दूसरी तरफ अस्पताल से इलाज नहीं करवाने का लिख गए (लामा हुए) मरीज के भी नियम बदल दिए है। इस मरीज का भर्ती दिनों का केवल 75 फीसदी क्लेम मिलेगा।

 

फैक्ट्स
-पिछले दो साल में 43494 मरीजों का हुआ इलाज
- 9.19 करोड़ के पैकेज हुए थे बुक
- 35,257 मरीजों को 7 करोड़ का क्लेम मिला जिले को
- जिले में 24 अस्पतालों में चल रही योजना, जिनमें 17 सरकारी व 7 निजी संस्थान

 

- जेएसवाई में भारत सरकार से पैसा आ रहा था। ऐसे में भामाशाह योजना के क्लेम से भी डबलिंग हो रही थी। केन्द्र सरकार की आपत्ति थी। ऐसे में सामान्य प्रसव व सीजेरियन के पैकेज को हटा दिया है। वहीं कम योजना में पैकेज कम नहीं हुए है, कई पैकेज डूप्लीकेट थे, जिन्हें समायोजित किया गया है।
नवीन जैन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी

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