Doctor's Day : यहां एक-दो नहीं बल्कि तीन पीढिय़ों से डॉक्टर बनकर कर रहे मानव सेवा

चिकित्सकों का धर्म मानव सेवा करना होता है, शायद इसलिए उन्हें भगवान भी कहा जाता है। चिकित्सक मानव सेवा करने के लिए अपने जीवन के साथ-साथ पीढिय़ों को भी इसी मानव सेवा में लगा दे तो उसे क्या कहेंगे। चित्तौड़ जिले में कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनमें एक-दो नहीं बल्कि तीन पीढिय़ों से डॉक्टर बनकर मानव सेवा का काम कर रहे है।

By: Kalulal

Published: 01 Jul 2019, 05:24 PM IST

चित्तौडग़ढ़. चिकित्सकों का धर्म मानव सेवा करना होता है, शायद इसलिए उन्हें भगवान भी कहा जाता है। चिकित्सक मानव सेवा करने के लिए अपने जीवन के साथ-साथ पीढिय़ों को भी इसी मानव सेवा में लगा दे तो उसे क्या कहेंगे। चित्तौड़ जिले में कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनमें एक-दो नहीं बल्कि तीन पीढिय़ों से डॉक्टर बनकर मानव सेवा का काम कर रहे है। डॉक्टर्स डे पर कुछ ऐसी पीढिय़ों के बारे में जानिए....

बक्षी डॉक्टर्स फैमिली: बचपन में पापा को देख मिली प्रेरणा
चित्तौड़ जिले के एक परिवार की तीन पीढिय़ां, जिसमें पांच डॉक्टर मानव सेवा में लगे हुए है। सांवलिया जी अस्पताल के सेवानिवृत प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ.मुधप बक्षी ने बताया कि बचपन में उनके पापा डॉ. एमबी बक्षी जब लोगों का इलाज करते थे तो उनको अच्छा लगता था, जिसके चलते उनके मन में डॉक्टर बनने की इच्छा हुई, साथ ही घर में डॉक्टर होने से भी माहौल ऐसा ही था। डॉ. मधुप बक्षी ने करीब २३ वर्ष तक श्री सांवलियाजी अस्पताल में सेवाएं दी है, साथ ही लगभग 5 साल तक पीएमओ का कार्यभार भी संभाला। एक माह पूर्व ही वे और उनकी पत्नी डॉ. हेमलता बक्षी सेवानिवृत हुए है। उनका बेटा मुदित बक्षी अस्थि रोग विशेषज्ञ है, उनकी बहू डॉ. मनिका बक्षी रेडियो थैरेपी व कैंसर रोग विशेषज्ञ है, जो दिल्ली में सेवारत है। इतना ही नहीं डॅा. बक्षी के परिवार में उनके बहनोई और चचेरा भाई भी डॉक्टर है।

अग्रवाल डॉक्टर्स फैमिली: जज्बा अपने ही शहर में सेवा देने का
दादा वकील थे। इनके बाद परिवार में पिछली दो पीढ़ी डॉक्टर बनकर मानव सेवा कर रही है। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रखर अग्रवाल ने बताया कि उनके पिता को लोगों की सेवा करते देखकर उनके मन में भी डॉक्टर बनने का सपना जागृत हुआ। मुम्बई में पढ़ाई के दौरान कई ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने अपने ही शहर में सेवा देने का निश्चय किया। डॉ. प्रखर के पिता डॉ. अविनाश अग्रवाल सेवानिवृत शल्य चिकित्सक, माता डॉ. रसना अग्रवाल व पत्नी पूजा जैन (दंत रोग विशेषज्ञ) है।

खाब्या डॉक्टर्स फैमिली: परिवार वाले पढ़ाना नहीं चाहते थे जिद से बने डॉक्टर
जब परिवार वाले 11वीं के बाद पढ़ाने ही नहीं चाहते थे, ऐसे समय में अपनी जिद से डॉक्टर बने सेवानिवृत्त डॉ. भंवरलाल खाब्या। आज इस परिवार से चार डॉक्टर है। परिवार के दो और सदस्य भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। डॉ. खाब्या बताते है कि उनके गांव में पीएचसी पर डॉक्टर को देखकर उन्होंने डॉक्टर या शिक्षक बनने का लक्ष्य निर्धारित किया। ११वीं के बाद डॉक्टर बनने के लिए उदयपुर आए तो उन्हे पता चला की डॉक्टर बनने के लिए विज्ञान वर्ग में प्रवेश जरूरी होता है, उन्होंने कला वर्ग में टॉप किया, इसी के चलते उन्हें प्रवेश मिला और चिकित्सक बन गए। पुत्र शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल खाब्या, पुत्र वधू महिला एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ डॉ. रितु खाब्या, बेटी मधु जैन पैथोलॉजिस्ट है। दामाद डॉ. अनिश जैन सांवलियाजी चिकित्सालय में सेवारत है। डॉ. अनिश जैन के पुत्र सोमिल जैन भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे है। डॉ. भंवर लाल खाब्या 24 वर्ष तक जिला अस्पताल में सेवाएं दे चुके है।

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