फर्जी आरटीओ ऑफिस में बन रहे थे ड्राइविंग लाइसेंस व आरसी

चित्तौडग़ढ़ जिले की मंगलवाड़ थाना पुलिस ने मंगलवाड़ में करीब सात-आठ साल से संचालित हो रहे फर्जी आरटीओ ऑफिस का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के चिप लगे खाली कार्ड, होलोग्राम व अन्य उपकरण जब्त किए गए हैं।

By: jitender saran

Published: 14 Feb 2021, 07:35 PM IST

चित्तौडग़ढ़
पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव ने बताया कि मंगलवाड़ थाना प्रभारी विक्रम सिंह को जानकारी मिली कि कुछ चालक हाईवे पर ट्रक खड़े करके मंगलवाड़ कस्बे में आते-जाते हैं। यह चालक मंगलवाड़ कस्बे में पहुंचकर होटलों पर संपर्क करते हैं। पड़ताल करने पर पता चला कि मंगलवाड़ चौराहे पर देवेन्द्रदास उर्फ देवराज नामक युवक अवैध रूप से सभी राज्यों के ड्राइविंग लाइसेंस, वाहनों की आरसी व टोल नाकों की फर्जी पर्चियों सहित अन्य दस्तावेज तैयार करता है। मुखबीर की सूचना विश्वसनीय होने से इसकी पुष्टि करने के लिए डिकॉय ऑपरेशन के तहत बोगस ग्रहक भेजकर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया गया। देवेन्द्र दास ने जब बोगस ग्राहक को फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर दे दिया तो इसके बाद पुलिस टीम ने उसके घर पर दबिश देकर मकान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वहां फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, उसकी ओर से बनाए गए फर्जी लाइसेंस की बड़ी संख्या में फोटो प्रतियां, टोल नाकों की पर्चियां मिली। वहां पर चिप लगे ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के करीब दो सौ खाली कार्ड, बिना चिप लगे ४८ कार्ड, फर्जी दस्तावेज तैयार करने के काम आने वाले उपकरण, लेपटॉप, कलर प्रिंटर, एक छोटा प्रिंटर, पांच ट्रे कार्ड, स्क्रू ड्राइवर, गैस हीटर, ग्लू गन, टूल बॉक्स, की बोर्ड, थर्मल रोल, चार्जर, पेन ड्राइव, डोंगल, सिम रहित कुछ मोबाइल पाए गए। पुलिस ने यह सारी सामग्री जब्त कर ली। पुलिस ने इस मामले में मंगलवाड़ थानान्तर्गत सांगरिया निवासी और हाल मंगलवाड़ चौराहे पर रहे रहे देवेन्द्रदास उर्फ देवराज (३३) पुत्र अर्जुनदास बैरागी व मंगलवाड़ चौराहा निवासी ऋषि अग्रवाल (२५) पुत्र दिनेश अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ षडय़ंत्र पूर्वक धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले की जांच भादसोड़ा थाना प्रभारी भवानी शंकर को सौंपी गई है।
अन्य आरोपियों पर कसेंगा शिकंजा
पुलिस अधीक्षक भार्गव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ कर इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य आरोपियों को भी नामजद कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जाएंगे।
छह हजार से ज्यादा जारी कर चुके फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस
पुलिस पड़ताल में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी पिछले करीब सात-आठ साल से इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए होकर अब तक करीब छह हजार से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर चुके हैं।
हर राज्य के बना देते हैं लाइसेंस
आरोपियों की ओर से ज्यादातर पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, जम्मू कश्मीर, गुजरात सहित करीब 18 से अधिक राज्यों के फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाए गए हैं।
इसलिए चलता रहा अवैध कारोबार
पुलिस जांच में पता चला है कि मंगलवाड़ कस्बा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण हर राज्य के वाहन इधर से होकर गुजरते हैं। ऐसे में हर राज्य के वाहन चालक आरोपियों के संपर्क में रहते हैं, जो आवश्यकता पडऩे पर फर्जी लाइसेंस, आरसी व ऊंची दर अंकित की हुई टोल पर्चियां बनावाते हैं।
बीस मिनट में लाइसेंस तैयार
आरोपी इस अवैध काम में इतने पारंगत हो चुके हैं कि फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी मात्र पन्द्रह-बीस मिनट में तैयार करके दे देते हैं। इसके बदले वे एक हजार से पांच हजार रूपए तक की वसूली करते हैं।
टोल पर्चियों का इसलिए खेल
पुलिस जांच में पता चला है कि विभिन्न राज्यों से आने वाले भारी वाहनों के चालक आरोपियों से संपर्क करके टोल नाकों की ऊंची दरों की पर्चियां तैयार करवाते है, ताकि वे वाहन मालिकों से टोल नाकों पर ली जाने वाली राशि से कई गुना ज्यादा राशि वाहन मालिकों को फर्जी पर्चियां दिखाकर ले सके।
पुलिस के लॉगो का भी इस्तेमाल
आरोपी पुलिस का लॉगो लेकर सीएलजी सदस्यों के कार्ड भी बनाते हैं। इस तरह के कार्ड भी पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जब्त किए हैं। आरोपी देवेन्द्र बैरागी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह फर्जी तरीके से लेपटॉप व प्रिंटर की सहायता से ड्राइविंग लाइसें, वाहनों की आरसी व टोल नाकों की पर्चियां बनाता है।
जांच से खुलेंगे राज
पुलिस की ओर से आरोपियों के कब्जे से जब्त किए गए लेपटॉप की जांच करने के बाद और भी कई राज खुलने की पुलिस को उम्मीद है।
इस टीम ने किया खुलासा
इस अवैध करोबार का खुलासा करने वाली टीम में मंगलवाड़ थाना प्रभारी विक्रमसिंह सहित सहायक उप निरीख्ज्ञक देवीसिंह, हेडकांस्टेबल ललित कुमार, सिपाही संजय, पूरण सिंह, रामनारायण, जयराम, गजेन्द्र सिंह, रामरतन, थानसिंह, रिंकूराम, महिला सिपाही सरोज व जिला साइबर टीम के राजकुमार सोनी का विशेष योगदान रहा।

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