तीन वर्ष बाद भी सरल नहीं हुई जीएसटी की गणित

कर सरलीकरण के नाम पर तीन वर्ष पहले एक जुलाई २०१७ से पूरे देश में एक समान कर प्रणाली गुड्स एडं सर्विस टेक्स (जीएसटी) लागू किया गया। दावा था कि इससे आमजन से लेकर उद्यमियों तक की कर से जुड़ी जटिलताएं कम होगी व आसानी से कर संग्रहण होगा। चित्तौडग़ढ़ जैसे शहर के कारोबारी मानते है कि तीन वर्ष में भी जीएसटी में कई विसंगतियां तो है लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल अब भी इसे सरल नहीं बनाना है।

By: Nilesh Kumar Kathed

Updated: 01 Jul 2020, 05:21 PM IST

चित्तौैडग़ढ़. कर सरलीकरण के नाम पर तीन वर्ष पहले एक जुलाई २०१७ से पूरे देश में एक समान कर प्रणाली गुड्स एडं सर्विस टेक्स (जीएसटी) लागू किया गया। दावा था कि इससे आमजन से लेकर उद्यमियों तक की कर से जुड़ी जटिलताएं कम होगी व आसानी से कर संग्रहण होगा। चित्तौडग़ढ़ जैसे शहर के कारोबारी मानते है कि तीन वर्ष में भी जीएसटी में कई विसंगतियां तो है लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल अब भी इसे सरल नहीं बनाना है। कागजी औपचारिकताएं इतनी जटिल है कि कई बार सीए जैसे प्रोफेशनल भी मुश्किल से समझ पाते है तो आम व्यापारी के लिए जीएसटी की गणित समझना अब भी टेढ़ी खीर ही बना हुआ है। ऐसे में व्यापार संगठन जीएसटी प्रक्रिया को सरलीकृत करने की मांग किए हुए है। कोरोना संकट के बाद व्यापार में ठहराव आने से परेशान कारोबारी अब जीएसटी की विसंगतियां दूर करने पर जोर दे रहे है। जीएसटी देने में आसानी रहे इसके लिए स्लेब कम करने की मांग भी हो रही है।
जरूरी वस्तुओं पर कम हो जीएसटी दरें
कोरोना के कारण आर्र्थिक संकट से बाजार में मांग में गिरावट आई। इससे अनलॉक होने के बावजूद उद्योग-व्यापार संकट में है। ऐसे में जीएसटी दरों में कमी की मांग जोर पकड़ रही है। व्यापार जगत मान रहा है कि सरकार एक-दो वर्ष आवश्यक उपभोग की वस्तुओं की जीएसटी दरों में कमी करे तो उत्पादों की कीमत होने पर मांग बढ़़ेगी। इससे उपभोक्ता के साथ व्यापार दोनों को लाभ होगा।
फॉर्मेलिटी कम की जानी चाहिए
जीएसटी लागू होने के तीन वर्ष बाद भी इसे सरलीकरण करने की जरूरत है। इससे जुड़ी फॉर्मेलिटी कम की जानी चाहिए ताकि आसानी से अदा किया जा सके। टेक्स स्लेब कम हो। कोरोना संकट के कारण जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर जीएसटी कम किया जा सकता है।
अर्जुन मूंदड़ा, सीए एवं अध्यक्ष मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स, चित्तौडग़ढ़
जीएसटी दरों को तर्कसंगत किया जाना चाहिए
कोरोनाकाल में उद्योग-व्यापार संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जीएसटी दरों को भी तर्कसंगत किया जाना चाहिए ताकि कीमतों पर नियंत्रण रह सके और आमजन को जरूरी वस्तुएं कम कीमत पर मिले। जीएसटी से जुड़ी विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए।
गोविन्द गदिया, वरिष्ठ उद्यमी, चित्तौडग़ढ़

Nilesh Kumar Kathed Bureau Incharge
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