सूने किस लिए हो गए घर, खेतों पर क्यों जल रहे चूल्हे

व्यावसायिक फसल में शुमार अफीम के डोडे खेतों में लहलहाने लगे हैं, वहीं फसल की रखवाली करने के लिए किसानों के चूल्हे अब खेतों पर ही जलने लगे हैं। अफीम काश्तकारों ने परिवार सहित खेतों पर डेरे डाल दिए हैं।

By: Nilesh Kumar Kathed

Updated: 02 Mar 2019, 01:36 PM IST



चित्तौडग़ढ़.व्यावसायिक फसल में शुमार अफीम के डोडे खेतों में लहलहाने लगे हैं, वहीं फसल की रखवाली करने के लिए किसानों के चूल्हे अब खेतों पर ही जलने लगे हैं। अफीम काश्तकारों ने परिवार सहित खेतों पर डेरे डाल दिए हैं।पिछले दिनों जिले के कई क्षेत्रों में मावठ होने से जिन खेतों में डोडों को चीरे लग चुके हैं, वहां नुकसान हुआ था और कई जगह ताजा पिलाई के चलते तेज हवा से पौधे भी गिर गए थे। अफीम सबसे महंगी फसल मानी जाती है और तय मापदण्ड के अनुसार किसानों को नारकोटिक्स विभाग में इसकी तुलाई भी करवानी होती है। फसल की सुरक्षा और देखरेख के लिए अब सुबह की चाय से लेकर रात का भोजन भी किसान खेतों पर ही बनाने लगे हैं। किसान परिवारों की महिलाएं खेतों पर रहकर ही दोनों काम संभाल रही है। फसल को रोजड़ों, तोतों आदि से बचाने के लिए परिवार के सदस्य बारी-बारी से फसल की सुरक्षा में जुटे हुए हैं। वहीं दस आरी क्षेत्र में फसल के चारों तरफ सफेद पट्टी भी लगाई गई है। डोडों में चीरे लगाने के बाद किसानों ने दूध की लुवाई का काम भी शुरू कर दिया है। जिन इलाकों में किसानों को अफीम के पट्टे मिले हुए हैं, वहां उनकी मौजूदगी खेतों पर होने से घर सूने हो गए हैं। हालाकि घरों की देखरेख के लिए भी किसानों ने पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं।
गौरतलब है कि इस बार जिले में करीब चौदह हजार से ज्यादा किसानों को अफीम के पट्टे जारी किए गए थे और अभी अफीम की फसल पूरे यौवन पर है। डोडों के चीरे लगने के बाद सड़कों तक अफीम की मादक महक फैल रही है। इसके अलावा नारकोटिक्स विभाग भी अफीम की खेती पर नजर रखे हुए हैं।

Nilesh Kumar Kathed
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