किसान उगा रहें हैं हाईवेल्यू फल और सब्जियां

चित्तौडग़ढ़. जिस जमीन पर अब तक परंपरागत खेती से नियमित होने वाली आमदनी हुआ करती थी उसी जमीन पर आधुनिक तकनीक से ना केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि आमदनी में भी दोगुनी बढ़ोतरी हुई है

By: Avinash Chaturvedi

Updated: 26 Dec 2020, 11:48 PM IST

चित्तौडग़ढ़. जिस जमीन पर अब तक परंपरागत खेती से नियमित होने वाली आमदनी हुआ करती थी उसी जमीन पर आधुनिक तकनीक से ना केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि आमदनी में भी दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। कृषि क्षेत्र में किसानों द्वारा परंपरागत तौर पर मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाने के साथ ही हिन्दुस्तान जिं़क की समाधान परियोजना से जुड कर उन्नत तकनीक से जहां पैदावार में बढोतरी हुई है।
जहां परंपरागत खेती में गेहूं, मक्का, बाजरा और सोयाबीन, चना की पैदावार के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज और खाद के साथ उच्च तकनीक के समावेश से उत्पादन में वृद्धि हो रही है वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक से हाइवेल्यू सब्जियां और फल उत्पादन से आमदनी में बढ़ोतरी हुई है।पिछले वर्ष परियोजना क्षेत्र में 4 किसानों को सब्जी उत्पादन की विधि का प्रदर्शन कराया गया जिसमें 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में बेड पर मल्चिग शीट पर बून्द-बून्द सिंचाई के माध्यम से सब्जियों की खेती की गई जिसके शानदार प्रदर्शन के फलस्वरूप किसानों ने परम्परागत विधि से होने वाली खेती के सापेक्ष 5.6 गुना अधिक आय अर्जित की । इस प्रदर्शन को देखते हुए किसानों ने इस वर्ष उत्साह दिखाते हुए 36 किसानों को जोडा गया । समाधान, संस्टेनेबल एग्रीकल्चर मेनेजमेन्ट एवं डव्हलपमेन्ट बाय हयूमन नेचर परियोजना हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सीएसआर विभाग एवं बायफ इंस्टीट्यूट फॉर संस्टेनेबल लाईवलीहुडस एण्ड डेव्हलपमेन्ट के संयुक्त तत्वाधान में राजस्थान के उदयपुर, राजसमन्द, चित्तौडग़ढ़, भीलवाडा एवं अजमेर के 174 गांवों में संचालित की जा रही हैं। कृषि तकनीकी केंद्र एमपीयूएटी उदयपुर के प्रभारी डॉ इन्द्रजीत माथुर का बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क की ओर से बायफ के सहयोग से संचालित की जा रही परियोजना से प्रदेश के 5 जिलों में किसान लाभान्वित हो रहे है। परियोजना में मृदापरीक्षण, कृषि बीज, बागवानी पौधों की गुणवत्ता, पशुओं की नस्लों में सुधार के साथ साथ तकनीक और प्रोद्योगिकी में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता हैै । चित्तौडगढ़ के नगरी गांव के राजेन्द्र कीर का कहना है कि पिछले साल समाधान टीम के साथ एक किसान सब्जी की खेती कर रहा था जिसका खेत आकर्षक लग रहा था। तभी से मैने भी इस तकनीक का उपयोग कर खेती की और उम्मीद है कि पहले से अधिक आमदनी होगी। इसी प्रकार सालेरा के शंकर जाट ने बताया कि समाधान की टीम हमें एक्सपोजर विजिट के लिए ले गई और मुझे ड्रिप और मल्चिंग शीट का उपयोग करके वेजिटेबल खेती करने के बारे में बताया। एक बीघा में खेती शुरू
की। जिससे मुझे तीन गुना ज्यादा कमाई हुई।

पौधों से सघन बागवानी को कर रहे प्रोत्साहित
अधिक से अधिक पौधे लगा कर सघन बागवानी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आम एवं अमरूद की सघन बागवानी की शुरूआत 0.2 हेक्टेयर ईकाई क्षेत्र में प्रति ईकाई क्षेत्र से होने वाले उत्पादन को बढ़ावा देने 46 किसानों के साथ सघन बागवानी शुरू की है। पूर्व में बागवानी के 500 बगीचे स्थापित किये जा चुके है जिनमें नीबू, आम, बेर, अमरूद, चीकू आदि है। परियोजना क्षेत्र में क्षमतावर्धन के साथ आजिविकावर्धन को बढावा देने हेतु कृषि क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियां जैसे रबी एवं खरीफ की दलहनी अनाज तिलहनी एवं सब्जीवर्गीय फसलों के पैकेज ऑफ प्रेक्टिस जिसमें गेहंू, चना, मक्का, बाजरा सोयाबीन उडद व मूंग की उन्नत किस्मों का समावेश उपरोक्त उद्वेश्य को बढावा देने के लिए किया जा रहा है।

Avinash Chaturvedi
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