सीमेंट उद्योग कैसे बन गया चित्तौैडग़ढ़ में रोजगार का आधार

ऑटोमॉइजेशन से रोजगार पर मार,फिर भी विकास का आधार
राजस्थान में चित्तौडगढ़़ विकसित हो रहा सीमेंट हब के रूप में
लोगों के लिए रोजगार का प्रमुख जरिया बन गया ये सीमेंट उद्योग।

By: Nilesh Kumar Kathed

Published: 01 Jul 2019, 06:04 PM IST



चित्तौडग़ढ़. विश्व विरासत में शुमार चित्तौैड़ दुर्ग के कारण पहचाने जाने वाले चित्तौडग़ढ़ जिले की भारत के औद्योगिक मानचित्र पर अब सीमेंट हब के रूप में भी पहचान बन रही है। राजस्थान में सबसे बड़े सीमेंट हब के रूप में चित्तौडग़ढ़-निम्बाहेड़ा क्षेत्र विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र में करीब दस सीमेंट प्लान्ट वर्तमान में प्रतिवर्ष 8-9 हजार करोड़ का कारोबार कर रहे है तो तीन-चार नए सीमेन्ट प्लान्ट लगने की तैयारी है। सीमेन्ट उद्योग में बढते ऑटोमॉइजेशन के कारण रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है लेकिन फिर भी चित्तौडग़ढ़ जिले में रोजगार का सबसे बड़ा आधार ये उद्योग चुका है। ऑटोमॉाइजेशन के कारण वर्तमान में लग रहे नए प्लान्टों में सीधा रोजगार २५०-३०० लोगों को ही मिल रहा जबकि पहले मानव श्रम की अधिक मांग होने से एक हजार लोग तक एक प्लान्ट में सीधा रोजगार पा जाते थे। नए सीमेंट प्लान्टों में स्थाई भर्र्मी कम होकर कई कार्य ठेकेदारों के माध्यम से श्रमिक व स्टॉफ रखवाकर कराने पर जोर है। इससे स्थाई कर्मचारियों की संख्या घटी लेकिन अस्थाई रोजगार बढ़ा है।
52 वर्ष पहले लगा पहला सीमेंट प्लान्ट
चित्तौडग़ढ़ जिले में सीमेंट उद्योग की नींव वर्ष १९६७ में चित्तौैड़ शहर के चंदेरिया उपनगर क्षेत्र में बिरला सीमेंट वक्र्स प्लान्ट के रूप में पड़ी। इसके बाद निम्बाहेड़ा में जेके सीमेंट उद्योग स्थापित हुआ। चंदेरिया क्षेत्र की पहचान ही बाद में उस उद्योग के कारण पड़ गई।
क्यों बन रहा सीमेंट हब
चित्तौडग़ढ़ में एक के बाद एक सीमेंट प्लान्ट लगने से ये राजस्थान में सीमेंट हब के रूप में विकसित हो रहा है। वर्तमान में विभिन्न सीमेंट कंपनियों के दस प्लान्ट जिले में कार्यरत है। इनके अलावा एक कार्यरत एक कंपनी नया सीमेंट प्लान्ट लगाने की तैयारी में है। शीघ्र ही कुछ नई कंपनिया सीमेंट प्लांट भी लग सकते है। मांगरोल के पास डालमिया सीमेंट का प्लान्ट लगने के लिए पर्यावरण आपत्ति पर जनसुनवाई की प्रक्रिया है। ईमामी सीमेंट का एक प्लान्ट भी जिले में लगने की चर्चा उद्योग क्षेत्र में है। यहां सीमेंट उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल की प्रचुरता उपलब्धता के कारण कारण कंपनिया प्लान्ट लगाने के लिए आकर्र्षित हो रही है।
अप्रत्यक्ष रोजगार भी दे रहा सीमेंट उद्योग
ऑटोमॉइजेशन के कारण सीमेंट प्लान्टों में सीधे मानव श्रम की मांग भले कम हो रही हो लेकिन इनके बढऩे से अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ रहा है। सीमेंट उद्योग के निरन्तर बढऩे से ट्रांसपोर्ट कारोबार को गति मिली है। प्रत्येक सीमेंट प्लांट के आसपास ट्रांसपोर्ट कारोबार बढ़ा है। इनके अलावा सीमेंट कंपनियों द्वारा शिक्षा, चिकित्सा आदि क्षेत्र में भी कार्य करने से अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
आगामी चालीस-पचास वर्ष तक सीमेंट उद्योग पर संकट नहीं
चित्तौडग़ढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार सीमेंट उद्योग बन चुका है। वर्ष १९६७ में बिरला सीमेंट का प्लांट लगने के बाद जिले में इस उद्योग ने निरन्तर प्रगति की है। सीमेंट उद्योग ने प्रत्यक्ष के साथ हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से भी आजीविका प्रदान की है। जिले में सीमेंट निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल का अभी इतना स्टॉक है कि ४०-५० वर्ष तक आराम से कार्य हो सकता है। कच्चा माल उपलब्ध होने व अनुकूल परिस्थितियों के कारण देश की लगभग सभी बड़ी सीमेंट कंपनियां चित्तौडग़ढ़ जिले में प्लान्ट लगाना चाहती है। सीमेंट उद्योग अधिक मजबूत होकर रोजगार व विकास का आधार बने इसके लिए सरकार को भी इससे जुड़ी समस्याओं का निदान प्राथमिकता से करना चाहिए। जिंदगी के ४१ वर्ष इस उद्योग से जुड़ाव रहा है। आने वाले समय में ये उद्योग जिले की अर्र्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख आधार होगा।
निरंजन नागौरी, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, सीमेंट कंपनी, चित्तौडग़ढ़

Nilesh Kumar Kathed
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