इंसान हुए घरों में लॉक, परिन्दे भर रहे उन्मुक्त उड़ान

कोरोना वायरस की मार से बचने के लिए लॉकडाउन की घोषणा हुई तो करीब दो माह से शहर से लेकर गांव तक में लोग घरों में बंद है और बहुत जरूरी कार्य होने पर ही बाहर आ रहे है। लोगों के घरों में बंद हो जाने और वाहनों का धुआं थम जाने का असर प्रकृति पर दिख रहा है। खुले आसामान तले स्वच्छन्द विचरण करने वाले परिन्दे जो पहले शहरों व कस्बों में दिखना बंद से हो गए थे वे लॉॅकडाउन की देन ही मानेंगे कि फिर नजर आने लगे है।

By: Nilesh Kumar Kathed

Published: 30 May 2020, 11:53 PM IST

चित्तौडग़ढ़. कोरोना वायरस की मार से बचने के लिए लॉकडाउन की घोषणा हुई तो करीब दो माह से शहर से लेकर गांव तक में लोग घरों में बंद है और बहुत जरूरी कार्य होने पर ही बाहर आ रहे है। लोगों के घरों में बंद हो जाने और वाहनों का धुआं थम जाने का असर प्रकृति पर दिख रहा है। खुले आसामान तले स्वच्छन्द विचरण करने वाले परिन्दे जो पहले शहरों व कस्बों में दिखना बंद से हो गए थे वे लॉॅकडाउन की देन ही मानेंगे कि फिर नजर आने लगे है। घरों की मुंडेर पर गौरेया से लेकर कपासन के तालाब में विदेशी परिन्दे तक दिख रहे है। शहरों में बढ़ते क्रंकीट जंगल ने परिन्दों को लुप्त करना शुरू कर दिया था। गौरेया हो या कौंआ सभी घर की छत से लेकर मुंडेर तक नजर आना बंद ही हो गए थे। पिछले 2 माह के लॉकडाउन ने इंसान के बनाएं जंगल का शोर कम कर दिया है। फिर से नील गगन के तले रंग बिरंगे पक्षी अठखेलियां करते देखे जा रहे हैं। पक्षियों का कलरव अब सुबह से देर शाम तक छत की मुंडेर से सुना जा सकता है। लॉकडाउन पक्षियों की दिनचर्या के लिए अच्छे दिन लाना वाला साबित हो रहा है। ध्वनि व वायु प्रदूषण कम होने से पक्षियों को वातावरण अपने अनुकूल प्रतीत हो रहा है। कई दशकों बाद पक्षियों की चहचहाहट फिर से सुनाई देने लगी है। पक्षियों का कलरव पहले की तुलना में अधिक सुनाई दे रहा है।
जिले के कपासन निवासी पर्यावरण क्षेत्र में सक्रिय युवा उज्जवल दाधीच लॉकडाउन में अपने घर की छत से पक्षियों की दिनचर्या को नियमित रूप से ऑब्जर्व कर रहे हैं। गत दो माह के अनुभव के आधार पर दाधीच ने बताया कि लॉक डाउन की घोषणा होते ही सोचा था कि इस शांत वातावरण में पक्षियों के जीवन पर पडऩे वाले प्रभाव का विश्लेषण होना चाहिए। पक्षी प्रेमी दाधीच के अनुसार बढ़ते प्रदूषण, सिमटते जल और खाद्यान स्रोत कम हो जाने के कारण भारत सहित कई देशों में पक्षियों का जीवन खतरे में है।
परिन्दों को प्रजनन व भोजन के लिए मिला अनुकूल माहौल
वर्तमान माहौल देशी पक्षियों के अधिक अनुकूल होने के कारण इनकी गतिविधियों को आश्चर्यजनक रूप से शहरों के विभिन्न भागों में देखा जा रहा है। गत 5 वर्षों से पक्षी संरक्षण कार्यो में लगे दाधीच के अनुसार हर जगह मानव जनित गतिविधियों पर 90 प्रतिशत तक अंकुश लग गया है। परिणाम स्वरूप पक्षियों को अपनी गतिविधियों के लिए अधिक भौगोलिक क्षेत्र मिल रहा है। शहरों के प्रदूषण के कारण पक्षियों का पलायन शहरी सीमाओं से बाहर हो जाता था लेकिन लॉकडाउन की वजह से अब पक्षियों को शहर में ही प्रदूषण मुक्त पर्यावरण मिल रहा है। मनुष्यों की कम गतिविधियों से परिन्दों की प्रजनन व भोजन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां बिना किसी बाधा के चल रही हैं। उद्योग व वाहन बंद रहने से वायु व जल प्रदूषण में बड़ी कमी आने का भी सकारात्मक परिणाम मिला है।
गुलाब सागर बना पक्षियों का केन्द्र
पक्षियों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखे हुए उज्जवल दाधीच ने बताया कि ठीक घर की छत के ऊपर सुबह 6.४5 बजे पक्षियों का कारवां नगर के राजराजेश्वर सरोवर से उड़ान भर के बस स्टैंड समीप जल स्त्रोत गुलाब सागर पहुंचता है। कपासन के मध्य स्थित गुलाब सागर में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पक्षियों का कलरव बढ़ा है। मानवीय दखल ना होने के कारण वंश वृद्धि के साथ.साथ परिंदे किनारों पर धूप सेकते नजर आ रहे हैं।गुलाब सागर में इन दिनों समूह में कोंब डक, पर्पल हेरॉन, ग्रे हेरॉन,सुर्खाब,स्पॉटेड बिल डक, लिटिल ग्रीब, ब्लैक विंग स्टिल्ट सहित कई प्रजातियां देखी जा सकती है। तालाब से शाम करीब 6 बजे पर्पल हेरॉन का वापस अपने आशियाने के लिए निकलना होता है। आने वाले समय में गुलाब सागर अच्छा पक्षी विचरण केन्द्र बन सकता है।
लॉकडाउन में येे भी आया सामने
- शहरी क्षेत्र में विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी घरेलू चिडिय़ा गौरैया फिर से अपने घोंसले बनाती दिख रही है
- शुद्ध वातावरण होने से नीले आसमान में पहले की तुलना में पक्षियों का कलरव ज्यादा दिख रहा है
- बंद पड़ी कारों के साइड ग्लास में भी पक्षी घोंसला बनाते दिखाई दिए है।

Nilesh Kumar Kathed Bureau Incharge
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