उर्स समाप्त हुआ तो किसके दर्शनों के लिए जायरीन की कतार

उर्स समाप्त हुआ तो किसके दर्शनों के लिए जायरीन की कतार
उर्स समाप्त हुआ तो किसके दर्शनों के लिए जायरीन की कतार

Nilesh Kumar Kathed | Updated: 09 Oct 2019, 11:38:42 PM (IST) Chittorgarh, Chittorgarh, Rajasthan, India


कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन
भूमिगत मजार के दर्शनों के लिए भीड़
देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जायरीन


चित्तौडग़ढ़/कपासन. हजऱत दीवाना शाह की दरगाह शरीफ स्थित भूमिगत मजार के दर्शन के लिए बुधवार को खोली गई। दर्शन के लिए जायरीनों की कतारें लग गई। दरगाह वक्फ कमेटी के सैक्रेट्री मोहम्मद यासीन खां अशरफी के अनुसार 76 वें तीन दिवसीय उर्स सम्पन्न होने के बाद बुधवार प्रात: भूमिगत मज़ार के पट दरगाह वक्फ कमेटी के सदर निसार अहमद छीपा, सदस्य हाजी शरीफ खाँ मेवाती, असलम शेख ने प्रात: 4 बजे खोले। रात्रि 2 बजे से ही आशिके दीवाना की दर्शन के लिए लम्बी-लम्बी कतारें लग गई। औलिया मस्जिद की जानिब से बाबे नअमत से आस्ताना ए आलिया में जायरीन दाखिल होकर भूमिगत मज़ार के दर्शन करने के बाद बाब ए सलाम से बाहर निकलते रहे। देर रात के बाद हर जायरीन के दीदार के बाद ही भूमिगत मज़ार के पट वापस एक साल के लिए बन्द कर दिए। व्यवस्था के लिए वक्फ कमेटी सदस्य अशफाक तुर्किया, अब्दुल वहीद अंसारी, हाजी अब्दुल रहमान के साथ ही कई वॉलेयन्टियर्स लगे रह
दीवाना मुबारक हो की गूंज के साथ उर्स का समापन
संत हजऱत दीवाना शाह साहब का ७६वां उर्स दीवाना मुबारक हो के नारो अैर कुल की फातिहा के साथ सम्पन्न हो गया। दरगाह वक्फ कमेटी के सदर निसार अहमद छीपा के अनुसार मंगलवार प्रात: 3:30 बजे गुस्ल की रस्म अदा की गई। फजर की नमाज़ के बाद देग का खाना तकसीम किया गया। 8:30 बजे शाही महफिल खाने मे महफिले मीलाद के बाद बारी-बारी से कव्वाल पार्टीयो ने अपने-अपने कलाम पेश कर दाद बटोरी। हर कव्वाल को तीन से चार मिनट का समय दिया गया। आखिर मे हजऱत महबूबे ईलाही के मुरीदे खास चैदहवीं सदी के मशहूर कवि,खडी बोली के जनक हिन्दी-फारसी के शायर अमीर खुसरो द्वारा ब्रज भाषा मे रचित कलाम जो पीर की शान मे लिखा था उसे सभी कव्वाल ने मिलकर पढ़ा। आज रंग है री माँ रंग है री, पढ़ा तो मजमा पुरा झूम गया और कव्वालो को ईनाम देने वालो की होड लग गई। रंग पढने के बाद आकिल अख्तर कादरी ने कुरआन शरीफ की तिलावत की दरगाह वक्फ कमेटी के सैके्रट्री मोहम्मद यासीन खाँ अशरफी ने शिजरा पढ़कर मुल्क मे अमनो सुकून की दुआ की। कुल की फातिहा के बाद कुल के छींटे लेने के लिए हर जायरीने दीवाना मे होड लग गई। जिस-जिस पर कुल के छींटे पडे वे आशिक अपने घर के लिए यह सोचकर रवाना हो गया की मुझे बाबा हुजूर ने स्वंय विदाई दे दी हैं। बुलन्द दरवाज़ा ओर 28 नंबर गेट से जायरीन निकलते रहे।

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