जैसे लगता है बापू ही विचर रहे हों इस आश्रम में

चित्तौडग़ढ़। चितौडग़ढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने महात्मा गांधी से जुड़ी यादों को संजोने के लिए अनूठा कार्य कर दिखाया है। यूनिवर्सिटी में बेहद आकर्षक 'प्रभाष जोशी गांधी म्यूजियमÓ की स्थापना की गई है। म्यूजियम में स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान तत्कालीन समाचार पत्रों में प्रकाशित महात्मा गांधी से संबंधित घटनाओं के समाचारों की मूल कतरनों को शानदार तरीके से सजाया गया है। साथ ही महात्मा गांधी की ओर से निकाले गए विभिन्न समाचार पत्रों जैसे नवजीवन (अंक 19 जून 1930), हरिजन (अंक 13 फ रवरी 194

By: Avinash Chaturvedi

Published: 13 Sep 2021, 09:58 PM IST

मेवाड़ विश्वविद्यालय ने साकार किया गांधी म्यूजियम का सपना
चित्तौडग़ढ़। चितौडग़ढ़ जिले के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने महात्मा गांधी से जुड़ी यादों को संजोने के लिए अनूठा कार्य कर दिखाया है। यूनिवर्सिटी में बेहद आकर्षक 'प्रभाष जोशी गांधी म्यूजियमÓ की स्थापना की गई है। म्यूजियम में स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान तत्कालीन समाचार पत्रों में प्रकाशित महात्मा गांधी से संबंधित घटनाओं के समाचारों की मूल कतरनों को शानदार तरीके से सजाया गया है। साथ ही महात्मा गांधी की ओर से निकाले गए विभिन्न समाचार पत्रों जैसे नवजीवन (अंक 19 जून 1930), हरिजन (अंक 13 फ रवरी 1949) आदि को भी प्रदर्शित किया गया है। इसमें गांधी जी के लेख देखे जा सकते हैं।
विदेशी पत्र पत्रिकाओं में गांधी
म्यूजियम में कई विदेशी मैगजीन एवं पत्र-पत्रिकाओं के कवर पेज हैं जिन पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी हैं। ये मैगजीन एवं पत्र-पत्रिकाएं अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, इटालियन आदि भाषाओं में हैं। गांधी के जीवनकाल की अलग-अलग घटनाओं को तस्वीरों के माध्यम से एक क्रम में लगा कर प्रदर्शित किया गया है, जिसमें उनके पुराने अनदेखे फ ोटो और संक्षिप्त जानकारी है। यहां गांधी पर प्रकाशित कई डाक टिकटों का भी अनोखा कलेक्शन है। करीब सौ देशों द्वारा महात्मा गांधी पर निकाले गए स्टाम्प का संकलन भी यहां देखने को मिलता है। एक नजर में यह म्यूजियम गांधी के हमारे ही आसपास होने का अहसास कराता है।
साबरमती आश्रम की झांकी भी
गांधी म्यूजियम वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. चित्रलेखा सिंह (डीन) के निर्देशन में बने इस गांधी म्यूजियम में प्रवेश करते ही साबरमती आश्रम की छोटी सी झांकी दिखाई देती है, जिसमें महात्मा गांधी को चरखा चलाते हुए दिखाया गया है। इस मूर्ति को रामकृष्ण घोष और उनकी टीम ने बनाया है। मूर्ति के पास गांधी की ओर से उपयोग में ली गई सामग्रियों की प्रतिकृति (रेप्लिका) दिखाई गई है। गांधी की तस्वीर वाले पुराने सिक्कों एवं मेडल का भी यहां अनोखा कलेक्शन है। इसके साथ ही गांधी पर प्रकाशित दर्जनों पोस्ट कार्ड एवं लिफ ाफ ों को भी संजो कर रखा गया है।
वह दुखदायी खबर भी है संरक्षित
यहां समाचार पत्र 'द स्टेट्समेनÓ की दिनांक 31 जनवरी 1948 की प्रति भी संरक्षित है, जिसमें गांधी के शहीद होने के खबर छपी हुई है। गांधी के भाषणों का संग्रह की हुई कई पुरानी ***** भी यहां संभाल कर रखी गई हैं। म्यूजियम डायरेक्टर वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ चित्रलेखा सिंह बताती हैं कि क्षेत्र के सिद्दीक अहमद मंसूरी का इस संकलन में अहम योगदान रहा है। मंसूरी ने बचपन से ही महात्मा गांधी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का संग्रह किया है, जो इस म्यूजियम को बनाने में काम आया है।

Avinash Chaturvedi
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