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चित्तौड़गढ़

Jobs News : कॅरियर बनाने के लिए युवाओ के बीच ये फील्ड बन रही हैं पहली पसंद, 50 फीसदी से अधिक ने दिखाई रुचि

नवीं-दसवीं कक्षा से ही विद्यार्थी कॅरिअर को लेकर खासे गंभीर रहते हैं। ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में 50 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थी विज्ञान संकाय चुनते हैं। इसका उद्देश्य मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई और कॅरिअर बनाना है।

चित्तौड़गढ़Jun 12, 2024 / 02:18 pm

जमील खान

Chittorgarh News : चित्तौडग़ढ़. बदलते परिपेक्ष्य में युवा अब चिकित्सक और इंजीनियरिंग क्षेत्र में कॅरिअर बनाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक सेवा, शिक्षण, बैंकिंग, सीए सहित अन्य क्षेत्रों में भी कॅरिअर के विकल्प हैं। लेकिन, इनसे अलग ज्यादातर युवाओं की पहली पसंद इंजीनियरिंग और मेडिकल फील्ड है। यह ट्रेंड देश और प्रदेश में टॉप पर है। नवीं-दसवीं कक्षा से ही विद्यार्थी कॅरिअर को लेकर खासे गंभीर रहते हैं। ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में 50 फीसदी से ज्यादा विद्यार्थी विज्ञान संकाय चुनते हैं। इसका उद्देश्य मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई और कॅरिअर बनाना है।
मेडिकल-इंजीनियरिंग टॉप पर
देश और प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग फील्ड सबसे टॉप पर हैं। नीट परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या 25 लाख तक पहुंच चुकी है। इंजीनियरिंग से जुड़ी जेईई मेन और एडवांस परीक्षा का आंकड़ा भी 15 से 18 लाख तक पहुंच गया है। मेडिकल और इंजीनियरिंग से जुड़ी प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के मुकाबले देश की अन्य परीक्षाओं में 5 से 10 लाख विद्यार्थी ही बैठते हैं।
कॉमर्स के प्रति घट रहा रुझान
25 साल पहले तक कॉमर्स संकाय में सीबीएसई और देश के विभिन्न माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में 12 लाख से ज्यादा विद्यार्थी कॉमर्स से जुड़े विषय चुनते थे। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं। मौजूदा समय में देश के सभी बोर्ड में कॉमर्स में करीब 2 से 5 लाख विद्यार्थी भी पंजीकृत नहीं हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग में कॅरिअर के बेहतर विकल्प मिलते हैं। युवा एमबीबीएस, बीटेक, एमटेक करने के बाद नौकरी या निजी क्षेत्र में कामकाज कर सकते हैं। अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर हैं। लेकिन, यह दोनों क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से भी पसंद किए जाते हैं।
यह है रुझान की वजह
एमबीबीएस, पीजी डिग्री के बाद सरकारी नौकरी : 15

प्रतिशत निजी अस्पताल, क्लिनिक सेवा : 45 प्रतिशत

निजी अस्पताल में सेवा, परामर्श सेवा : 20 प्रतिशत
विदेश में जाकर मेडिकल सेवा : 20 प्रतिशत

इंजीनियरिंग के बाद स्टार्ट अप लगाना : 25 प्रतिशत

बीटेक के बाद सरकारी, निजी क्षेत्र में रोजगार : 35 प्रतिशत

इंजीनियरिंग के बाद कंसलटेंसी सेवा : 25 प्रतिशत
इंजीनियरिंग के बाद शिक्षण रिसर्च, स्वरोजगार : 15 प्रतिशत

70 प्रतिशत आबादी एलोपैथी सेवाओं पर निर्भर

20 प्रतिशत आबादी आयुर्वेद पर निर्भर

10 प्रतिशत होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पर निर्भर
20 प्रतिशत तक बढ़ा देश में सिविल कंस्ट्रक्शन वर्क

30 प्रतिशत तक मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्र में रोजगार

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