चित्तौड़ से उठी मांग से प्रदेश के लाखों लोग होंगे निहाल

प्रशासन शहरों के संग अभियान शुरू होने से पहले चित्तौडग़ढ़ से उठाई गई खाली भूखण्डों की पेनल्टी कम करने की मांग का फायदा अब प्रदेश के लाखों लोगों को मिलेगा।

By: jitender saran

Published: 04 Oct 2021, 09:12 PM IST

चित्तौडग़ढ़
प्रशासन शहरों के संग अभियान शुरू होने से पहले चित्तौडग़ढ़ से उठाई गई खाली भूखण्डों की पेनल्टी कम करने की मांग का फायदा अब प्रदेश के लाखों लोगों को मिलेगा।
अभियान शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूडीएच मंत्री के ओएसडी जीएस संधू व डीएलबी के निदेशक दीपक नंदी ने प्रदेश में कई जगहों पर दौरे कर लोगों को आने वाली परेशानियों के बारे में जानकारी ली थी। इस दौरान दोनों अधिकारियों से वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत व नगर परिषद सभापति संदीप शर्मा ने उदयपुर में उनसे मुलाकात की और अवगत कराया कि खाली भूखण्ड पेनल्टी बहुत ज्यादा होने से लोग निर्माण स्वीकृतियां नहीं ले पा रहे हैं और भूखण्ड होने के बावजूद अपने मकान नहीं बनवा पा रहे हैं, इस लिए खाली भूखण्ड पेनल्टी को कम करने की आवश्यकता है। आयुक्त रिंकल गुप्ता ने बताया कि नगर परिषद द्वारा निलामी, आवंटन एवं कृषि भूमि रूपान्तरण से जारी पट्टों में भवन निर्माण स्वीकृति में खाली भूखण्ड की पेनल्टी की राशि बहुत अधिक होने से आमजन में रोष था। दोनों अधिकारियों ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और भरोसा दिलाया था कि इस समस्या का समाधान जरूर किया जाएगा। अब राज्य सरकार ने खाली भूखण्डों पर लगने वाली पेनल्टी बहुत कम कर दी है।

बाईस साल तक मकान नहीं बना तो स्वत: निरस्त हो जाएगी लीज डीड
अब आवंटन तिथि से 7 वर्ष तक निर्माण नहीं करने पर शास्ती शून्य तथा 7 वर्ष बाद 14 वर्ष तक निर्माण नहीं करने पर 0.25 प्रतिशत प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर से शास्ती की गणना कर वसूलनीय होगी। 14 वर्ष बाद एंव 20 वर्ष तक निर्माण नहीं करने पर 0.50 प्रतिशत राशि प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर से वसूलनीय होगी। लेकिन 20 वर्ष पूर्ण होने के बाद परिषद द्वारा आवंटी को 2 वर्ष की अवधि में भवन निर्माण करने का सूचना पत्र जारी किया जाएगा, जिस पर 0.75 प्रतिशत प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर से शास्ति वसूलनीय होगी। 22 वर्ष पूर्ण होने के बाद लीज डीड स्वत: निरस्त मानी जाएगी।

फ्री होल्ड मामलों में यह व्यवस्था
फ्री होल्ड के प्रकरणों में आवंटन तिथि से 7 वर्ष तक भवन निर्माण नहीं करने की शास्ती में छूट दी गई है। 7 वर्ष बाद तथा 14 वर्ष तक भवन निर्माण नहीं करने पर 0.10 प्रतिशत प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर पर शास्ती वसूल होगी। 14 वर्ष बाद एवं 20 वर्ष तक 0.25 प्रतिशत प्रतिवर्ष से आरक्षित दर पर वसूलनीय होगी। 20 वर्ष पूर्ण होने पर परिषद द्वारा 2 वर्ष में भवन निर्माण करने के लिए सूचना पत्र जारी किया जाएगा, जिस पर 0.50 प्रतिशत प्रतिवर्ष तत्समय की आरक्षित पर शास्ती वसूलनीय होगी। 22 वर्ष बाद भी भवन निर्माण नहीं करने पर लीज डीड स्वत: निरस्त मानी जाएगी। इस तरह के मामलों में परिषद अगर संतुष्ट होती है कि उस क्षेत्र में न्यूनतम सुविधाओं जैसे - बिजली, पानी तथा पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भवन निर्माण नहीं करने की शास्ती में छूट दी जा सकेगी।

सरकार की मंजूरी के बाद बचेगा भूखण्ड
आवेदक द्वारा निर्धारित अवधी में भवन निर्माण नहीं करने के कारण निरस्त हुई लीज डीड को राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद पुन: प्रचलन में लाने के लिए अगर मूल आवंटी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बेचने की स्थिति में तथा लीजधारक द्वारा शास्ती के अतिरिक्त शास्ती 0.75 प्रतिशत प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर से जमा करानी होगी तथा फ्री होल्ड के मामलों में शास्ती 0.50 प्रतिशत प्रतिवर्ष से तत्समय की आरक्षित दर से जमा करानी होगी। जिसमें शास्ती 22 वर्ष के अतिरिक्त देय होगी।

jitender saran Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned