चित्तौडग़ढ़. पांच माह का चातुर्मास शुरू होने से पहले सोमवार को भड़ल्या नवमी के अबूझ मुर्हुत पर बड़ी संख्या में शादियां हुई। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच कई युवा जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। शादियों में आमंत्रितों की अधिकतम पचास की संख्या तय होने व कोरोना बचाव के एहतियाती उपाय करने का असर साफ दिखा। संख्या सीमित होने से कई रिश्तेदारों को शादियों में नहीं बुलाया जा सका। वर-वधु सहित प्रत्येक अतिथि के मास्क लगाने के साथ विवाह स्थल सेनिटाइज भी कराए गए। आने वालों के लिए सेनिटाइजर का इंतजाम भी रहा। मेहन्दी लगे हाथ भी संक्रमण के डर से बचने के लिए सेनिटाइज होते रहे। शहर के गणगौर गार्डन में दुल्हा-दुल्हन ने अपने आप को सेनेटाईज कर एवं मास्क लगा आयोजन स्थल मे प्रवेश किया। यहां थर्मोस्केन जांच का प्रबंध भी किया गया।
कोरोना संक्रमण के निरन्तर बढ़ते खतरे के बीच बड़ी संख्या में होने जा रही शादियां प्रशासन के लिए चिंता का कारण बनी रही। हालांकि प्रशासन ने प्रत्येक शादी के लिए उपखण्ड अधिकारी स्तर से पूर्व अनुमति लेना जरुरी किया था। शादियों में नियमों की पालना के लिए थानेदार व सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी तक को सर्तक किया हुआ था। जिला प्रशासन के अधिकारी निरन्तर उपखण्ड अधिकारियों व अन्य अधिकारियों से शादियों में नियमों की पालना को लेकर फीडबैक लेते रहे
आज अंतिम सावा, कल से पांच माह मांगलिक कार्य बंद
जिले में मंगलवार को वर्तमान सीजन के अंतिम वैवाहिक लग्न है। इस दिन भी कई शादियां है। इसके बाद मंगलवार को देवशयन एकादशी के साथ आगामी पांच माह के लिए मंागलिक कार्य थम जाएंगे। सामान्यतया चार माह ही ये कार्य बंद रहते है लेकिन इस बार चातुर्मास पुरूषोत्तम मास के कारण पांच माह का होने से ऐसा हो रहा है।
क्वारंटीन रिश्तेदार नहीं हो सके शादी में शामिल
प्रशासन ने संक्रमण का खतरा टालने के लिए शादियों में आने वालों को लेकर विशेष सतर्कता दिखाई। आवेदक को स्पष्ट बता दिया गया था कि कोई भी ऐसा व्यक्ति भी विवाह समारोह में नहीं आ सकता जो संस्थागत या होम क्वांरटीन चल रहा हो। किसी में कोरोना के लक्षण भी नजर आए तो उसे शादी में नहीं बुलाया जाए। इस सख्ती के चलते परिणयसूूत्र में बंधने वाले दुल्हा-दुल्हन के कर्ई नजदीकी रिश्तेदार व मित्र भी शादी समारोह में नहीं आ सके।
सीजन में भी बाजारों में नहीं दिखी रौनक
कोरोना संकट के चलते शादियां तो हो रही लेकिन उनमें धूमधड़ाका गायब दिखा। ऐसे में बैंड के स्थान पर ढोल अधिक बजते रहे मेहमानों की संख्या ५० तक सीमित होने से बड़े मैरिज गार्डन लेना भी लोगों ने कम पसंद किया। शादियों की सीजन होने पर भी केटेरिंग से लेकर हलवाई तक के पास अधिक काम नहीं रहा।

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