मानसून लेगा मास्टर प्लान की असली परीक्षा

मानसून दस्तक दे चुका है, अब समय नगर परिषद की असली परीक्षा का है। शहर के कई इलाकों में बारिश के दिनों में जल भराव की समस्या सालों से बरकरार है। शहर में हर साल बारिश के दिनों में परेशानी वाले कई पॉइंट चिह्नित किए जाते रहे हैं पर जब बात समाधान की आती है तो नगर परिषद प्रशासन असहाय नजर आता है। इसकी वजह यह है कि शहर का ड्रेनेज सिस्टम बरसों से गड़बड़ाया हुआ है। कई जगह अतिक्रमण किए हुए हैं, जिनको हटाया नहीं जा पा रहा है।

By: jitender saran

Published: 27 Jun 2021, 11:01 AM IST

चित्तौडग़ढ़
नगर परिषद प्रशासन जल भराव की समस्या को लेकर इसलिए भी असहाय है, क्यों कि बरसों पहले शहर के कई प्राकृतिक नालों का स्वरूप छोटा कर दिया गया। कई जगह दुकानें बन चुकी हैं तो कई जगह प्राकृतिक नाले अब अस्तित्व में ही नहीं रहे। कुछ जगहों पर पुराने नाले पूरी तरह ब्लॉक हो चुके हैं तो कई नालों को लोगों ने अपनी सुविधा के लिए छोटे कर दिए हैं। अब बरसों पहले हो चुके बड़ी संख्या में निर्माण को ध्वस्त करना भी संभव नहीं है। यही वजह है कि शहर के कई इलाकों में बारिश के पानी से जल भराव की समस्या रहती हैं।

बीस साल बाद हो सकी एक नाले की सफाई
रेलवे स्टेशन के अन्दर से होकर गुजरने वाले नाले की तो बीस सालों से सफाई भी नहीं हुई। जबकि इस नाले से होकर मधुवन, सेंती, स्टेशन आदि इलाकों का पानी गंभीरी नदी में जाकर मिलता था। नगर परिषद ने बीड़ा उठाते हुए पिछले साल ही इस नाले की सफाई करवाई थी।

यह नाले भी जल भराव के लिए जिम्मेदार
शहर में रेलवे स्टेशन क्षेत्र में नाला, पावटा चौक क्षेत्र का नाला, गोल प्याऊ से अप्सरा टॉकिज की ओर जाने वाला नाला व नगर पालिका कॉलोनी का नाला भी बारिश के दिनों में जल भराव के लिए जिम्मेदार है। इन नालों सहित शहरी क्षेत्र के करीब १२० नालों की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं वन विभाग से उदयपुर रोड़ की तरफ आने वाले मार्ग पर भी जल भराव की समस्या बरसों से चली आ रही है। इसका कारण यह है कि एक कच्चा नाला वन विभाग की जमीन में से होकर गुजर रहा है। यह नाला भी कच्चा होने के कारण ब्लॉक हो जाता है, इससे क्षेत्र में जल भराव की भारी समस्या रहती है। नगर परिषद सभापति संदीप शर्मा के निर्देश पर इस समस्या के समाधान के लिए अब होटल पन्ना के निकट एक और नाला बनवाया जा रहा है, ताकि क्षेत्र में जल भराव की समस्या नहीं हो।

दस साल से अटका है सीवरेज सिस्टम
शहर में आधा-अधूरा सीवरेज सिस्टम भी बारिश के दिनों में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। वर्ष २०१०-११ में शहर में सीवरेज का काम शुरू हुआ था। संबंधित विभाग की लापरवाही के चलते दस साल में भी शहर में सीवरेज का काम पूरा नहीं हो पाया है। जबकि इस पर करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हैं। सीवरेज सिस्टम में कई जगहों पर ढक्कन लगे हुए नहीं है, इससे बारिश के दिनों में पानी भरने से लोगों को गड्डे नजर नहीं आते, ऐसे में दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा भी शहर में बनाए जा रहे सीवरेज सिस्टम में कई तरह की खामियां है, जो बारिश के दिनों में बाधा बन जाती है।

यहां है जल भराव की समस्या
शहर में बारिश के दिनों में जल भराव की समस्या रेलवे स्टेशन क्षेत्र, वन विभाग के पास उदयपुर रोड़, रेलवे अण्डर ब्रिज के साथ ही डूब क्षेत्र में है। शहर में वर्ष १९९२ में बाढ आई थी, इसके बाद डूब क्षेत्र के इलाके चिह्नित किए गए थे। इसके बावजूद डूब क्षेत्रों में धड़ल्ले से निर्माण होते रहे, जिन्हें प्रशासन ने रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। ज्यादा बारिश होने पर शहर में यही डूब क्षेत्र परेशानी का कारण बनते हैं। नगर परिषद के तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही से डूब क्षेत्रों में बड़े-बड़े कॉम्पलेक्सों का निर्माण हो चुका है। बारिश के दिनों में इन कॉम्पलेक्सों के तलघर भी तलैया में तब्दील हो जाते हैं।

120 नालों की सफाई करवा रहे
बारिश के दिनों में जल भराव नहीं हो, इसके लिए नगर परिषद क्षेत्र के १२० नालों की सफाई करवाई जा रही है। जिन नालों से ज्यादा परेशानी आने की संभावना है, उनकी सफाई पहले करवाई जा रही है।
संदीप शर्मा, सभापति
नगर परिषद चित्तौडग़ढ़

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