अलर्ट पर भारी सेहत महकमे की लापरवाही

चित्तौडग़ढ़. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब स्क्रब टाइफस बुखार ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। अब तक जिले में सौ से ज्यादा लोगों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। राज्य सरकार ने भले ही स्क्रब टायफस को लेकर प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया हो, लेकिन चित्तौडग़ढ़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पर इस अलर्ट का अब तक खास असर नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस के कई मामले सामने आ रहे हैं।

By: jitender saran

Updated: 13 Sep 2021, 01:01 PM IST

जितेन्द्र सारण
चित्तौडग़ढ़. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब स्क्रब टाइफस बुखार ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। अब तक जिले में सौ से ज्यादा लोगों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। राज्य सरकार ने भले ही स्क्रब टायफस को लेकर प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया हो, लेकिन चित्तौडग़ढ़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पर इस अलर्ट का अब तक खास असर नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस के कई मामले सामने आ रहे हैं।

तीन साल पहले मिला था पहला मामला
जिले में स्क्रब टायफस का सबसे पहला मामला १७ जुलाई २०१८ को भूपालसागर क्षेत्र के निलोद गांव में सामने आया था। इस वर्ष जनवरी २०२१ से अब तक जिले में करीब सौ लोगों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कागजों में अब तक यह आंकड़ा सिर्फ ३२ पर ही अटका हुआ है।

पिस्सुओं के काटने से होती है
पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं है, लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। पिस्सू के काटते ही उसकी लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु 'रिक्टशिया सुसुगामुशीÓ मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। इसकी वजह से लीवर, दिमाग व फेंफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और कई बार मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर तक की स्थिति में पहुंच जाता है।

यहां ज्यादा होते हैं पिस्सू
पिस्सू अमूमन पहाड़ी इलाके, जंगल और खेतों के आसपास ज्यादा पाए जाते हैं, लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घनी घास के पास पिस्सू के काटने का खतरा बना रहता है।

रक्त की जांच से होती है पहचान.
स्क्रब टाइफस की पहचान पिस्सू काटने के निशान को देखकर रक्त की जांच के जरिए सीबीसी काउन्ट, लीवर फंक्शनिंग टेस्ट से होती है। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाया जाता है। इसके लिए सात से चौदह दिन तक दवा का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज को कम तला-भुना व लिक्विड खुराक लेनी चाहिए। कमजोर इम्युनिटी या जिन लोगों के घरों के आसपास बीमारी फैली हुई हो, उन्हें भी प्रिवेंटिव दवा दी जाती है।

अब तक नहीं है पेटेंट दवा
डेंगू, चिकनगुनिया के साथ तीसरे बुखार स्क्रब टाइफस का सबसे ज्यादा जिक्र हो रहा है। यह बुखार जानलेवा है और अब तक इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं खोजा गया है। यह स्क्रब टाइफस के मामले गांवों में ज्यादा पाए जाते हैं। शरीर पर लाल दाने निकलने जैसे लक्षण होते हैं। रोग में सभी या कुछ लक्षण सामने आ सकते हैं।

रोग का वाहक चिगार माइट्स
इस रोग का वाहक चिगार माइट्स होती है, जो पशुओं में पाई जाती है और चूहों के द्वारा प्रसारित होती है। यह बीमारी अमूमन माइट्स के लार्वा अवस्था में काटने से मनुष्यों में होती है। यह माइट्स बड़ी घास के मैदानों, बगीचों, जंगलों, अत्यधिक वनस्पति वाले इलाकों में स्थित दरारों तथा नमी वाले इलाकों में पाई जाती है।

यह हैं लक्षण
पिस्सू काटने के दो सप्ताह के अन्दर मरीज को बुखार, सिरदर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द व कमजोरी महसूस होती है। पिस्सू काटने की जगह फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है।

किसने कहां इलाज कराया, अंधेरे में स्वास्थ्य विभाग
जानकारी के मुताबिक जिले के कई गांवों में स्क्रब टाइफस के रोगी पाए गए हैं, इनमें से कई लोगों ने उदयपुर और अहमदाबाद के निजी चिकित्सालयों में भी उपचार करवाया है, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास यह आंकड़े उपलब्ध नहीं है। जिले में लगातार बढ़ रहे स्क्रब टाइफस के मरीजों को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अब तक भी अलर्ट मोड पर नहीं आया है।

समय पर इलाज नहीं, तो गंभीर परिणाम
इसका समय रहते इलाज नहीं हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लीवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते। ऐसे मरीज बेहोशी की हालत तक में चले जाते हैं। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है।

कैसे बचें...
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के मुताबिक स्क्रब टायफस को शर्ब टायफस भी कहते हैं। स्क्रब टाइफस में लक्षण चिगर्स लार्वा माइट्स के काटने के 10 दिन के अंदर दिखने लगते हैं। सीडीसी के मुताबिक स्क्रब टायफस की कोई वैक्सीन तो नहीं है, लेकिन इससे बचा जा सकता है। इसमें किसी संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाना सबसे अहम है। इसके अलावा ऐसे इलाकों में जाने से बचना चाहिए जहां चिगर्स लार्वा माइट्स होते हैं।

बचाव के लिए यह करें
इस रोग से बचाव के लिए पूरे कपड़े पहनें, घर से बाहर जाते समय जूते मोजे पहनें, घर के आसपास सफाई रखें, गंदा पानी इक_ा नहीं होने दें। व्यस्ततम मार्ग, पार्क या ऊंची घास में नहीं जाएं, घर के आसपास झाडिय़ां नहीं उगने दें, पुराने टायर, मटकों या गमलों में पानी जमा हो तो खाली कर दें तथा साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।

इनका कहना है
स्क्रब टाइफस से घबराने की जरूरत नहीं है। लक्षण दिखते ही चिकित्सक की सलाह लेकर इसका उपचार कराया जा सकता है।
डॉ. मधुप बक्षी, वरिष्ठ फिजिशियन चित्तौडग़ढ़

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