स्कूल जाना नहीं फिर भी पहनों स्कूल डे्स

चित्तौडग़ढ़. ऑनलाइन कक्षाओं से जहां एक और बच्चों को घंटो मोबाइल एवं लेपटॉप, कम्प्युटर के समाने बैठाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों को इन कक्षाओं को लेने में परेशानी हो रही है। वहीं अब कुछ निजी विद्यालयों ने बच्चों पर नए नियम लागू कर उन्हें परेशानी में डाल दिया है। जिससे बच्चों एवं उनके अभिभावकों के समाने परेशानी खड़ी हो गई है।

By: Avinash Chaturvedi

Published: 07 Jul 2020, 11:36 AM IST

चित्तौडग़ढ़. ऑनलाइन कक्षाओं से जहां एक और बच्चों को घंटो मोबाइल एवं लेपटॉप, कम्प्युटर के समाने बैठाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों को इन कक्षाओं को लेने में परेशानी हो रही है। वहीं अब कुछ निजी विद्यालयों ने बच्चों पर नए नियम लागू कर उन्हें परेशानी में डाल दिया है। जिससे बच्चों एवं उनके अभिभावकों के समाने परेशानी खड़ी हो गई है।
ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर पहले तो अभिभावकों से कोरोना काल की फीस वसूल की जा रही है। ऐसे में आर्थिक संकट के इस दौर में लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं अब कुछ निजी विद्यालयों ने बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं में भी बच्चों को स्कूल यूनिफार्म, टाई एवं बेच गले में लगाकर बैठने का फरमान सुना दिया है। ऐसे में बच्चों को कई घंटे अपने ही घरों में ही स्कूल यूनिफार्म पहनकर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं कई विद्यालयों ने तो बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के बाद भी कॉपियां, कोर्स की किताबे आदि खरीदने के लिए भी पाबंद कर दिया है। जो बच्चे स्कूल यूनिफार्म में ऑनलाइन कक्षाओं में नहीं बैठ रहे है उन्हें विद्यालय प्रबंधन की ओर से फटकार भी लगाई जा रही है। जिससे कई बच्चों का मनोबल टूट रहा है।
आर्थिक संकट में नई परेशानी
कोरोना काल के कारण वर्तमान में बच्चों की स्कूल एवं रजिस्टे्रशन फीस आदि का भुगतान करने में ही वर्तमान में परेशानी हो रही है। ऐसे में बच्चों की विद्यालय नहीं चलने के बाद भी स्कूल यूनिफार्म खरीदने का आर्थिक बोझ भी डाला जा रहा है। वहीं कुछ विद्यालयों ने किताबे एवं कॉपियां खरीदने के लिए भी विद्यालय में बुलाना शुरू कर दिया है।
कहीं कमीशन का खेल तो नहीं
विद्यालयों के बंद होने से इस बार स्कूल यूनिफार्म एवं कोपी किताबों का व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। ऐसे में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों ने विद्यालयों के प्रबंधन को इस नए नियम को लागू करने के लिए कमीशन का खेल भी खेला जा रहा है। ऐसे में इस खेल का खामियाजा मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवार के लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
ये भी नहीं कर रहे सुनवाई
अभिभावकों की ओर से इस सम्बन्ध में जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला कलकटर तक से शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों की ओर से अभिभावकों की पीड़ा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है।

Avinash Chaturvedi
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