अब हर घर में होंगे तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा व कालमेघ के पौधे

जिले के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए अब हर परिवार को तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और कालमेघ के पौधे नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिन्हें घरों में गमलों में लगाया जा सकेगा। वन विभाग ने ऐसे १४.४१ लाख पौधे तैयार कर लिए हैं। औषधीय योजना के तहत इन पौधों का वितरण किया जाएगा।
घर-घर औषधि योजना के तहत वन विभाग की ओर से प्रत्येक इच्छुक परिवार को यह पौधे नि:शुल्क दिए जाएंगे।

By: jitender saran

Published: 09 Jun 2021, 11:11 AM IST

चित्तौडग़ढ़
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला कलक्टर ताराचंद मीणा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसकी पहली बैठक डीआरडीए सभागार में रखी गई। बैठक में जिला कलक्टर ने पौधों के वितरण स्थलों का चिह्नीकरण करने, ग्राम पंचायत स्तर तक पौधों के परिवहन एवं वितरण के लिए प्रभावी व्यवस्था करने और विभिन्न विभागों से समन्वय करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था करने और जिला स्तर पर कुछ नवाचार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में डीएफओ सुगनाराम जाट ने घर-घर औषधि योजना में वितरित किए जाने वाले पौधों की विस्तार से जानकारी देकर स्वास्थ्य को इनसे होने वाले फायदों के बारे में बताया। जिले में 14 लाख 41 हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य मिला है। पचास प्रतिशत परिवारों को इस साल और शेष पचास प्रतिशत परिवारों को अगले साल पौधे वितरित किए जाएंगे।

इसलिए महत्वपूर्ण है औषधि योजना
राज्य में वन और वनों के बाहर हरियाली वाले क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों की प्रजातियों की उपलब्धता रही है। जिनका उपयोग आदिकाल से आयुर्वेद तथा स्थानीय परंपरागत ज्ञान के अनुरूप स्वास्थ्य रक्षण एवं चिकित्सा के लिए होता रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जीवनशैली में बदलाव के चलते लोग कई प्रकार के रोगों से ग्रस्त होते रहते हैं।
आयुर्वेद तथा स्थानीय परम्परागत ज्ञान व वनों में उपलब्ध औषधियों को लोगों के घरों, खेतों और निजी जमीनों के समीप उगाकर राज्य के निवासियों के स्वास्थ्य में सुधार करना इस योजना का मुख्य ध्येय है। इस योजना से राजस्थान में पाई जाने वाली वनौषधियों एवं औषधीय पौधों का संरक्षण भी होगा। औषधि योजना एक साथ कई उद्देश्यों को समेटे हुए है। राज्य में औषधीय पौधों को उगाने के इच्छुक परिवारों को स्वास्थ्य रक्षण के लिए बहु उपयोगी औषधीय पौधे वन विभाग की पौधाशालाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे। लोगों के स्वास्थ्य रक्षण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा चिकित्सा के लिए औषधीय पौधों की उपयोगिता के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए जन चेतना का विस्तार होगा। औषधीय पौधों के प्राथमिक उपयोग तथा संरक्षण व संवर्धन के लिए आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के सहयोग से प्रमाण आधारित जानकारी उपलब्ध होगी। जिला प्रशासन व वन विभाग, जनप्रतिनिधियों, पंचायतीराज संस्थाओं, विभिन्न राजकीय विभागों, संस्थानों, विद्यालयों और औद्योगिक घरानों का सहयोग लेकर जिले में घर-घर औषधि योजना को जन अभियान के रूप में क्रियान्वित किया जाएगा।

जिले में तैयार हो रहे पौधे
जिले की 21 नर्सरी में कुल 14 लाख 41 हजार पौधे तैयार किए जा रहे है। सबसे ज्यादा कपासन रेंज की नर्सरी में पौधे तैयार किए जा रहे हैं। यहां लगभग 3 लाख 70 हजार 05, विजयपुर नर्सरी में 3502, विजयपुर की दूधीतलाई नर्सरी में 31 हजार 800, विजयपुर की उदपुरा नर्सरी में 4500, मंगलवाड़ में 98 हजार 538, सांवलिया जी में 50 हजार, निंबाहेड़ा उप जिला मुख्यालय में 50 हजार, कन्नौज में 65 हजार 760, अरनोदा में 40 हजार, बड़ीसादड़ी में 1 लाख 10 हजार 893, बाड़ी में 89 हजार 489, बेगूं के पारसोली में 31 हजार 200, लाडपुरा में 30 हजार 468, पिपलिखेड़ा में 30 हजार 600, सामरिया में 10 हजार, रावतभाटा के एकलिंगपुरा में 69 हजार 762, बोराव में 35 हजार 548, जावदा में 23 हजार 756, चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय पर 1 लाख पौधे, हथनी ओदी में 1 लाख और सेमलपुरा में 69 हजार 588 पौधे तैयार किए जा रहे है।

jitender saran Reporting
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