डेढ सौ डिटेन, 145 वाहन जब्त फिर भी आधी रात में रेत का खेल

खनन विभाग के साथ मिलकर पुलिस रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ रही। पिछले नौ माह में डेढ सौ वाहन चालकों को डिटेन कर 145 वाहन जब्त कर चुकी है। इनसे करीब तीन करोड़ रूपए का जुर्माना भी वसूल किया गया, फिर भी रेत माफिया बजरी के अवैध परिवहन से बाज नहीं आ रहे।

By: jitender saran

Updated: 08 Oct 2020, 11:12 AM IST

चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़ जिले में खनन विभाग ने किसी को भी बजरी खनन की लीज जारी नहीं कर रखी है। यहां बजरी का मुख्य स्त्रोत राशमी क्षेत्र से गुजरने वाली नदी है, जहां पुलिस और खनन विभाग के साथ ही पुलिस की जिला विशेष टीम की खास नजर रहती है। ऐसे में जिले में बजरी के अवैध खनन के मामलों में कमी आई है। लेकिन पड़ौसी जिले भीलवाड़ा की बनास नदी से अवैध रूप से बजरी का खनन लंबे समय से जारी है। वहां से ही चित्तौडग़ढ़ जिले सहित प्रतापगढ़ और यहां तक कि मध्यप्रदेश के कई इलाकों तक बजरी पहुंचाई जा रही है। भीलवाड़ा की बनास नदी से बजरी का अवैध खनन करने के बाद चित्तौडग़ढ़ शहर सहित जिले के गंगरार, चंदेरिया, सदर थाना चित्तौडग़ढ़, शंभूपुरा, बस्सी, पारसोली, बेगूं, निम्बाहेड़ा और कपासन थाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से बजरी पहुंचाई जा रही है। चित्तौडग़ढ़ जिले से होकर ही प्रतापगढ़ और मध्यप्रदेश के कई इलाकों तक बजरी का अवैध परिवहन हो रहा है।
जिला पुलिस और डीएसटी टीम की ओर से खनन विभाग के साथ मिलकर रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाइयां भी बहुत की जा रही है। इस साल एक जनवरी से लेकर १५ सितंबर तक पुलिस और खनन विभाग ने संयुक्त रूप से रेत माफियाओं के खिलाफ २१३ कार्रवाइयां करते हुए २०९ वाहन जब्त किए हैं। इन वाहनों पर कुल ३ करोड़, ९८ लाख ४४ हजार ३७० रूपए का जुर्माना लगाया गया है। कुल ८ हजार ३०० टन बजरी जब्त की गई है। इसके अलावा खनन विभाग की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर जिले के विभिन्न थानों में साठ प्रकरण रेत माफियाओं के खिलाफ दर्ज हुए हैं। इनके १४५ वाहन पुलिस ने जब्त किए हैं और डेढ सौ वाहन चालकों को डिटेन भी किया जा चुका है। वाहनों में भरी बजरी और इसके अवैध स्टॉक सहित १० हजार ७६१ टन बजरी जब्त की गई है। खनन विभाग की ओर से अब तक २ करोड़ ९३ लाख ५८ हजार ८५० रूपए का जुर्माना वसूल किया जा चुका है। पुलिस साठ में से तीस प्रकरणों में चालान पेश कर चुकी है।

चालक डिटेन, माफियाओं के हौसले बुलंद
पुलिस और खनन विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाइयों में सिर्फ चालकों और खलासियों को ही डिटेन किया गया है। जिन लोगों को डिटेन किया गया है, उनमें अधिकांश भीलवाड़ा जिले के निवासी है। लेकिन सफेदपोश रेत माफियाओं पर अब तक न तो पुलिस हाथ डाल पाई है और न ही खनन विभाग के अधिकारी।

सिर्फ मोहरा है चालक और खलासी
रेत के इस खेल में वाहन चालक और खलासी तो सिर्फ मोहरा है। असल में इस अवैध खेल के पीछे कई सफेदपोश चेहरे छिपे हुए हैं, जिन तक खनन विभाग और पुलिस नहीं पहुंच पा रही है। सुबह और शाम को पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई के डर से अब आधी रात बाद रेत का खेल हो रहा है। रात को बारह बजे से तड़के तीन चार बजे तक बजरी का अवैध रूप से परिवहन करते कई वाहन देखे जा सकते हैं। कई वाहन चालकों ने तो बजरी परिवहन के रास्ते भी बदल लिए हैं। कई बार तो चालक पुलिस के वाहनों को टक्कर मारकर दुर्घटनाग्रस्त करने से भी नहीं चूकते।

...तो सड़क पर ही खाली कर भाग जाते हैं चालक
जिले में कई बार ऐसे मौके भी आए हैं, जब पुलिस दल को देखकर चालक सड़कों पर ही बजरी खाली कर फरार हो गए तो कई चालकों ने जंगल में ही बजरी के ढेर लगा दिए।
निर्माण कार्यों तक पहुंच रही बजरी
पुलिस और खनन विभाग की लाख कोशिशों के बाद भी शहर और जिले में हो रहे विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए बजरी की आपूर्ति नियमित रूप से हो रही है। हालाकि पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई का डर बताते हुए रेत माफिया रेत की कई अधिक कीमत वसूल रहे है, लेकिन निर्माण कार्य करवाने वालों को मजबूरी में महंगे भाव भी बजरी खरीदनी पड़ रही है। वहीं सरकारी स्तर पर निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों को भी महंगे भाव में बजरी खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनका मुनाफा भी घट रहा है।
कर रहे है पूरी कोशिश
पुलिस और खनन विभाग की टीमें संयुक्त कार्रवाई में रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भीलवाड़ा जिले की बनास नदी से यहां तक अवैध रूप से बजरी पहुंच रही है। बड़ी संख्या में कार्रवाइयां की गई है और अब भी जारी रहेगी।
दीपक भार्गव, पुलिस अधीक्षक चित्तौडग़ढ़

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