जोखिम में जान फिर भी चेहरा तक नहीं ढंक रहे लोग

कोरोना संक्रमितों की जान बचाने के लिए एक तरफ जहां चिकित्सा टीमे दिनरात सेवा में लगी है, पुलिस सब कार्य छोड़ लोगों की सेहत सुरक्षा के लिए उनको घर में रोकने के लिए सड़कों पर खड़ी है,वहीं दूसरी ओर कई लोग अब भी स्वयं की सेहत खतरे में डालकर भी सड़कों पर आने का मोह नहीं छोड़ पा रहे है।

By: Nilesh Kumar Kathed

Published: 27 Mar 2020, 11:59 PM IST

चित्तौडग़ढ़. कोरोना संक्रमितों की जान बचाने के लिए एक तरफ जहां चिकित्सा टीमे दिनरात सेवा में लगी है, पुलिस सब कार्य छोड़ लोगों की सेहत सुरक्षा के लिए उनको घर में रोकने के लिए सड़कों पर खड़ी है,वहीं दूसरी ओर कई लोग अब भी स्वयं की सेहत खतरे में डालकर भी सड़कों पर आने का मोह नहीं छोड़ पा रहे है। हालात ये है कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े या सरकारी सेवा में होने से जिनको कार्य पर बुलाया गया है उनमें से कई लोग भी संक्रमण के खतरे के बेपरवाह नजर आ रहे है। ऐसे लोग बिना मॉस्क का उपयोग किए ही वाहनों पर घूमते नजर आए। पुलिस ऐसे लोगों को कहीं समझाती रही तो कहीं सख्ती भी दिखाती रही। चिकित्सक भी कह रहे है कि इस समय हालात की संवेदनशीलता को समझते हुए हम अति आवश्यक कार्य नहीं होने पर घरों में ही रहे एवं बाहर निकलना भी पड़े तो संक्रमण से बचाव के लिए सेनिटाइजर आदि का प्रबंध जरूर रहे। जिला कलक्टर चेतन देवड़ा के कोरोना से मुकाबले के लिए घर में ही रहने की प्रेरणा देने वाले कुछ ऑडियो-वीडियो संदेश भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इनमें कलक्टर सप्लाई की चेन जोडऩे एवं कोरोना की चेन तोडऩे का आह्वान करते रहे।

चौराहो पर रहा सन्नाटा, गलियों में हलचल
चित्तौडग़ढ़. कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति में देशव्यापी लॉकडाउन के पांचवे दिन शुक्रवार को पहले से अधिक लोग घरों में बंद दिखे। इसका असर सुबह से लेकर शाम तक शहर के प्रमुख चौराहों व मार्गो पर भी नजर आया, जहां न के बराबर लोग सड़कों पर नजर आए। सुबह किराणा, सब्जी आदि आवश्यक सामग्री की दुकाने खुलने के समय कुछ भीड़ दिखी लेकिन उसके बाद पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी और लोगों को मुख्य सड़क तक नहीं आने दिया और गलियों में घूमने वालों को भी घर जाने के लिए प्रेरित करती रही।
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सुबह-शाम खुलने का समय तय
प्रशासन ने डोर टू डोर वितरण व्यवस्था शुरू नही होने तक राशन, दूध व सब्जी की दुकानों को सुबह-शाम खुलने की फिलहाल अनुमति दे रखी है। इसके तहत राशन, दूध व सब्जी की दुकाने सुबह ६ से १०.३० एवं शाम ४ से ७ बजे तक खोली जा सकती है। इस दौरान भी यहां अधिक भीड़ न हो जाए ये पुलिस ध्यान रख रही है।
फोन पर पूछते रहे हालचाल
लॉकडाउन के चलते घर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे लोग शहर में ही एवं अन्य शहरों में रहने वाले परिजनों व मित्रों के हाल जानने के भी व्यग्र नजर आए। लोग फोन करके यहीं पूछते रहे कि उनके क्षेत्र में कोरोना वायरस संक्रमण की क्या स्थिति एवं किस तरह के प्रबन्ध किए गए है। लोग एक दूसरे को ये सलाह अवश्य देते नजर आए कि जब तक सरकार लॉकडाउन समाप्त ना करे हमे घर से बाहर नहीं निकलना है।

Nilesh Kumar Kathed
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