चित्तौड़गढ़

खोदकर भूल जाते सड़कें, परेशाान होते लोग

सीवरेज कार्य या टेलीफोन, बिजली, पानी की लाइन किसी भी नाम पर सड़के उधेेड़ी जा रही है। खोदी जा रही सड़कों को वापस समय पर ठीक कराना याद ही नहीं रहता। ऐसे में सड़कों की खुदाई के बाद भी डामरीकरण नहीं होने से उखड़ी सड़के मिट्टी तो हवा में उड़ाती ही है,साथ ही हादसों का कारण भी बन जाती है।

चित्तौड़गढ़Mar 17, 2019 / 12:25 pm

Nilesh Kumar Kathed

खोदकर भूल जाते सड़कें, परेशाान होते लोग

चित्तौडग़ढ़. सीवरेज कार्य या टेलीफोन, बिजली, पानी की लाइन किसी भी नाम पर सड़के उधेेड़ी जा रही है। खोदी जा रही सड़कों को वापस समय पर ठीक कराना याद ही नहीं रहता। ऐसे में सड़कों की खुदाई के बाद भी डामरीकरण नहीं होने से उखड़ी सड़के मिट्टी तो हवा में उड़ाती ही है,साथ ही हादसों का कारण भी बन जाती है। चित्तौडग़ढ़ शहर में इन दिनों विभिन्न स्थानों पर सड़कों की खुदाई का मंजर दिख जाता है। मुख्य मार्गो पर अधिकतर जगह तो सीवरेज कार्य के नाम पर खुदाई हो रही है तो कुछ जगह अन्य कार्यो के लिए भी जेसीबी आदि से सड़के खोदी जा रही है। खोदी जा रही सड़कों की बाहर आ रही मिट्टी को वहीं छोड़ देने या फैला देने से राहगीर परेशान है। वाहन चालकों को भी रात के समय ऐसे स्थानों से गुजरते समय दुर्घटना का डर बना रहता है। खुदाई के कारण शहर में दुर्ग रोड व महाराणा प्रताप सेतु रोड पर इस समय सड़के सर्वाधिक क्षतिग्रस्त दशा में है। इन सड़कों से प्रतिदिन चित्तौड़ दुर्ग दर्शन के लिए आने वाले देशी-विदेशी सैलानी भी गुजरते है। ऐसे में उनके मन में भी शहर की प्रतिकूल छवि निर्मित होती है। इसके बावजूद शहरी निकाय व सरकारी तंत्र सड़कों की दशा सुधारने के लिए गंभीर नजर नहीं आता।
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गांधीनगर कच्ची बस्ती : गड्ढे में गिरा सांड
चित्तौडग़ढ़. गांधी नगर कच्ची बस्ती में शनिवार सुबह पानी की लाइन की खुदाई चल रही थी। इस दौरान एक सांड गड्ढे में जा गिरा। कर्मियों ने जेसीबी बुलवा कर गड्ढे को चौड़ा किया और अकरम अली, नसीब खां, राकेश आदि लोगों ने सांड को बाहर निकलवाने में मदद की।

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