डोडा चूरा की सूचना पर गई थी पुलिस, देखा तो कट्टों में मावा निकला

डोडा चूरा की सूचना पर गई थी पुलिस, देखा तो कट्टों में मावा निकला
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Jitender Saran | Updated: 12 Oct 2019, 11:30:03 PM (IST) Chittorgarh, Chittorgarh, Rajasthan, India

तस्करी के जरिए डोडा चूरा चित्तौड़ पहुंचने की गलत सूचना ने पुलिस की परेड करवा दी। सूचना को सही मानते हुए मौके पर पहुंची पुलिस ने कट्टों को खोलकर देखा तो उसमें मावा पाया गया। बदनामी के डर से पुलिस ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मावे के बारे में सूचना दी। शनिवार को उदयपुर से पहुंचे खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दोनों प्रतिष्ठानों पर पहुंच मावे के नमूने लिए।

चित्तौडग़ढ़
सूत्रों ने बताया कि पुलिस के एक बड़े अधिकारी को सूचना मिली थी कि बस के जरिए कट्टों में डोडा चूरा की तस्करी की जा रही है। सूचना पर भरोसा करते हुए कोतवाली पुलिस को मौके पर भेजा गया। वहां वाकायदा घेराबंदी कर पुलिस ने कट्टों की जांच की तो करीब चालीस कट्टेनुमा पैकेट्स में मावा पाया गया, जो चित्तौड़ शहर के दो प्रतिष्ठानों ने त्योहारी सीजन के चलते बाहर से मंगवाया था। किसी तरह की अफवाहों के चलते पुलिस की कथित बदमानी न हो, इसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. इन्द्रजीतसिंह को दी गई कि मावे की जांच करवाई जाए। सीएमएचओ ने विभाग के संयुक्त निदेशक उदयपुर से बात कर मावे के नमूने लेने के लिए टीम भिजवाने की मांग की। उदयपुर से खाद्य सुरक्षा अधिकारी आनंद चौधरी शनिवार को चित्तौडग़ढ़ पहुंचे और यहां कोतवाली के पीछे स्थित चौधरी मावा व कुंभा नगर स्थित वीर गुर्जर मावा वाले के यहां से मावे के नमूने लिए, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भिजवाया जाएगा।
पक्के बिल पर यहां हुई गड़बड़
सूत्रों ने बताया कि कट्टों में मावा निकलने के बाद पुलिस ने संबंधित प्रतिष्ठान के संचालकों से कोतवाली बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने पुलिस के डर से मावा उनका होने से इनकार कर दिया, इससे पुलिस को संदेह हुआ कि त्योहारी सीजन में कहीं यह मिलावटी मावा तो नहीं है। इसके लिए पुलिस ने सीएमएचओ को सूचना दी। बाद में बात समझ में आने पर दोनों प्रतिष्ठानों के संचालक भंवरलाल चौधरी व नन्दकिशोर गुर्जर ने पुलिस को मावे के पक्के बिल बताने के साथ ही स्वीकार किया कि मावा उन्होंने ही मंगवाया है, जो प्रतिष्ठित व्यापारी से मंगवाया गया है, जिसमें किसी तरह की मिलावट नहीं है। इसके बाद दोनों को पाबंद किया गया कि वे स्वास्थ्य विभाग की ओर से नमूने लेने से पहले मावे की बिक्री नहीं करें।

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