डेढ़ दशक पुराने भुगतान के लिए अभी भी भटक रहे है

चित्तौडग़ढ़. जिला साक्षरता अभियान में लगे प्रेरकों को अब भी करीब डेढ़ दशक पुराना भुगतान के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सरकार ने पांच माह पूर्व ही प्रेरकों का बकाया भुगतान करने के आदेश भी जिला साक्षरता समितियों को जारी कर दिए लेकिन विभाग एक दूसरे टाल कर भुगतान नहीं कर रहा है। वहीं जिले में प्रेरक अपने मानदेय भुगतान के लिए इधर-उधर चक्कर लगा रहे है।

By: Avinash Chaturvedi

Published: 29 Jun 2020, 12:19 PM IST

साक्षरता प्रेरकों को वित्तीय वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 का भुगतान बकाया
चित्तौडग़ढ़. जिला साक्षरता अभियान में लगे प्रेरकों को अब भी करीब डेढ़ दशक पुराना भुगतान के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सरकार ने पांच माह पूर्व ही प्रेरकों का बकाया भुगतान करने के आदेश भी जिला साक्षरता समितियों को जारी कर दिए लेकिन विभाग एक दूसरे टाल कर भुगतान नहीं कर रहा है। वहीं जिले में प्रेरक अपने मानदेय भुगतान के लिए इधर-उधर चक्कर लगा रहे है।
जिले में वर्ष 2003 से 2009 तक सतत शिक्षा के तहत साक्षरता अभियान चलाया गया। इसके लिए जिले में करीब 282 साक्षरता केन्द्र बनाकर उन्हें संचालित करने के लिए प्रेरकों एवं सहायक प्रेरकों को लगाया गया था। जिले में 52 नोटल प्रेरक एवं 52 ही सहायक नोडल प्रेरक भी लगाए गए थे। बाद में मार्च 2009 में बंद हो गया। इसके बाद अप्रेल 2011 में साक्षर भारत के नाम से इसे शुरू किया गया। इसके बाद फिर सरकार ने मार्च 2018 में इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। पूर्व में चले सतत शिक्षा केन्द्रों पर लगे प्रेरकों को वित्तीय वर्ष २००५-०६ एवं वित्तीय वर्ष २००६-०७ को भुगतान आज तक नहीं हुआ है। लगातार प्रेरकों के न्यायालय एवं सरकार से गुहार लगाने के बाद सरकार ने वर्ष २०१४ में इसके लिए बजट तो जारी कर दिया लेकिन फिर भी इनका भुगतान नहीं किया गया। फरवरी २०२० में एक बार फिर सरकार ने प्रेरकों का बकाया भुगतान करने के आदेश जारी किए लेकिन इस आदेश को भी छह माह होने आए लेकिन अब तक प्रेरकों का भुगतान की प्रक्रिया ही पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई है। इसलिए प्रेरकों को अब भी सरकारी विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे है।
बना दी कमेटी
जिला साक्षरता अधिकारी ने 17 मार्च 2020 ओर से पंचायत समिति वार विकास अधिकारी एवं पीओ सहित तीन लोगों की एक कमेटी बनाकर उनसे उन वर्षों की उपस्थिति सत्यापित करने के लिए कहा गया है। वहां से उपस्थिति सत्यापित होकर आने पर ही भुगतान होगा।
ब्लॉक समन्वयक ही नहीं कौन बताए
भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से पहले ही करीब आठ माह पूर्व पंचायत समिति में साक्षरता में लगे ब्लॉक समन्वयकों को हटा कर उनके मूल विभागों में भेज दिया गया। अब रिकॉर्ड को संभालने एवं उनकी उपस्थिति तैयार करने वाला भी पंचायत समितियों में कोई नहीं है। ऐसे में पंचायत समिति से भी सूचनाएं नहीं जा पा रही है। इसलिए भुगतान नहीं हो रहा है।
जूझना पड़ रहा है आर्थिक संकट से
प्रेरकों को बकाया भुगतान नहीं मिलने से वह कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रहे है। ऐसे में वे बार-बार पंचायत समिति, जिला साक्षरता अधिकारी एवं जिला परिषद में अपनी गुहार लगा रहे है लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

इनका कहना है...
हम भुगतान करने को तैयार है लेकिन जो कमेटी बना रखी है वह प्रेरकों की उपस्थिति आदि तैयार करके नहीं भेज रही है। इसलिए भुगतान में देरी हो रही है। इस सम्बन्ध में सीईओ जिला परिषद के भी चर्चा की गई है। हम चाहते है कि प्रेरकों को उनका मानदेय मिले।
नरेश डांगी, जिला प्रभारी अधिकारी साक्षरता मिशन एवं मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी

कोई सुनने वाला नहीं
हम भुगतान के लिए छह माह से परेशान हो रहे है। पहले १५ साल सरकार ने लगा दिए और जब सरकार ने आदेश कर दिया तो छह माह से भुगतान नहीं मिल रहा है। पंचायत समितियों में प्रेरकों की सुनने वाला भी कोई नहीं बचा है। प्रेरकों को भुगतान नहीं हुआ तो आन्दोलन किया जाएगा।
प्रकाश चन्द्र मुरोठिया, जिलाध्यक्ष अखिल राजस्थान प्रेरक संघ चित्तौडग़ढ़

फैक्ट फाइल
नोडल प्रेरक- 52
सहायक नोडल प्रेरक-52
प्रेरक-282
सहायक प्रेरक- 282

यह मिलता था मानदेय
नोडल प्रेरक 1200
सहायक नोडल प्रेरक -700
प्रेरक-700
सहायक प्रेरक- 500

Avinash Chaturvedi
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