बहुचर्चित सॉल्वेंट काण्ड में मुख्य आरोपी को दस वर्ष का कारावास

अपर सेशन न्यायालय संख्या एक चित्तौडग़ढ़ ने शहर के बहुचर्चित सॉल्वेंट काण्ड के चौदह साल पुराने मामले में मुख्य आरोपी को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास व एक लाख एक हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है, वहीं आरोपी के पिता की ई.सी. एक्ट में अपील खारिज करते हुए सीजेएम कोर्ट का फैसला बहाल रखा गया है। इस काण्ड में २८ लोग झुलस गए थे, इनमें से १४ लोगों की मौत हो गई थी।

By: jitender saran

Published: 01 Mar 2020, 11:50 AM IST

चित्तौडग़ढ़
अपर लोक अभियोजक अनिल बोहरा ने बताया कि दो मई २००६ को सायं ६.४० बजे कोतवाली चित्तौडग़ढ़ के प्रभारी महेन्द्रसिंह भाटी को दूरभाष पर सूचना मिली कि पन्नाधाय बस स्टैण्ड के पास गांधी नगर कच्ची बस्ती में दीपक खींची की दुकान में आग लग गई है। पुलिस व फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच खासी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस जांच में पता चला कि संबंधित मकान श्यामलाल रेगर का था, जिसने गांधी नगर निवासी दीपक पुत्र मदनलाल खींची को दुकान दे रखी थी। दीपक ने गणपतलाल को दुकान में नौकर रख रखा था। पुलिस जांच में सामने आया कि दुकान में अवैध रूप से रखे सॉल्वेंट में आग लगी थी। इस आग से कुछ २८ लोग झुलस गए थे, इनमें से १४ लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने जांच में पाया कि दुकान में ऐसा कार्य किया जा रहा था, जिससे मानव जीवन को क्षति पहुंचकर विस्फोटक सामग्री से क्षतिकारित होने की पूरी संभावना थी। पुलिस ने इस मामले में दीपक खींची को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता ने शनिवार को अपने निर्णय में आरोपी दीपक खींची को विभिन्न धाराओं में दोषी करार देते हुए धारा २८६ में छह माह के कारावास व एक हजार रूपए अर्थदण्ड, धारा ३०४ भाग द्वितीय में सात वर्ष का कठोर कारावास व बीस हजार रूपए अर्थदण्ड, धारा ३ विस्फोटक पर्दार्थ अधिनियम १९०८ में दस वर्ष के कठोर कारावास व २० हजार रूपए अर्थदण्ड, धारा ४ विस्फोटक पर्दार्थ अधिनियम १९०८ में ७ वर्ष के कठोर कारावास व २० हजार रूपए अर्थदण्ड, धारा ५ विस्फोटक पर्दार्थ अधिनियम १९०८ में ७ वर्ष के कठोर कारावास व २० हजार रूपए अर्थदण्ड तथा धारा ६ विस्फोटक पर्दार्थ अधिनियम १९०८ में दस वर्ष के कठोर कारावास व २० हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
पिता की अपील खारिज, सजा यथावत
सॉल्वेंट काण्ड के बाद जिला रसद विभाग ने आरोपी मदनलाल खींची व दीपक खींची के यहां से अवैध रूप से भण्डारण किया सॉल्वेंट बरामद कर आवश्यक वस्तु अधिनियम में न्यायालय में चालान पेश किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में मदनलाल खींची को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कारावास व एक हजार रूपए अर्थदण्ड से दण्डित किया था। आरोपी ने इस आदेश के खिलाफ अपर सेशन न्यायालय संख्या एक चित्तौडग़ढ़ में अपील की थी। न्यायालय ने यह अपील खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से दिए गए फैसले को बहाल रखा है।

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