scriptThe agitators on inflation have now forgotten inflation | महंगाई पर आंदोलन करने वाले अब महंगाई को ही भूल गए | Patrika News

महंगाई पर आंदोलन करने वाले अब महंगाई को ही भूल गए

महंगाई की मार का नारा देकर सत्ता में आई केन्द्र सरकार अब महंगाई करने का अपना वादा भूल चुकी है। चौदह दिन में पेट्रोल के दाम प्रति लीटर सवा नौ रूपए बढ गए हैं। डीजल भी इसी अनुपात में महंगा हुआ है। ट्रांसर्पोटेशन महंगा होने से आम जरूरत की सामग्री के भाव आसमान छू रहे हैं।

चित्तौड़गढ़

Published: April 06, 2022 11:15:54 am

चित्तौडग़ढ़
महंगाई की मार का नारा देकर सत्ता में आई केन्द्र सरकार अब महंगाई करने का अपना वादा भूल चुकी है। चौदह दिन में पेट्रोल के दाम प्रति लीटर सवा नौ रूपए बढ गए हैं। डीजल भी इसी अनुपात में महंगा हुआ है। ट्रांसर्पोटेशन महंगा होने से आम जरूरत की सामग्री के भाव आसमान छू रहे हैं।
राज्यमंत्री सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत ने महंगाई के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले महंगाई को लेकर आंदोलन किया और महंगाई कम करने का वादा कर सत्ता में आ गई, लेकिन अब बढती महंगाई पर अपना ही वादा भूल गई। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार हर चीज के दाम बढाकर जनता पर महंगाई का बोझ लाद रही है। चौदह दिन में डीजल भी प्रति लीटर साढ़े आठ रूपए महंगा हुआ है। घरेलू गैस के दाम 50 रूपए और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 250 रूपए बढ़ा दिए गए है। स्टील, सीमेंट, खाद्य तेल, दालें, आटा सहित रोजमर्रा की वस्तुओं सहित हर चीज महंगी होती जा रही है। ऐसी महंगाई की मार से गरीब आदमी कहां से जिन्दा रहा पाएगा। जाड़ावत ने कहा कि इन सब के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। राज्यमंत्री जाड़ावत ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले महंगाई रोक दी गई ओर चुनाव होते ही महंगाई कई गुना बढा दी गई।
सोयाबीन तेल ग्यारह सौ रूपए प्रति टीन था, जो अब छब्बीस सौ रूपए हो गया है। पिछले दो साल में चवांलीस खाद्य पदार्थों की कीमत बढी है। गृहिणियों और मजदूरों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। मकान निर्माण की लागत पच्चीस फीसदी बढ गई है। जाड़ावत ने कहा कि वर्ष २०१२-१३ में भाजपा के नेता सब्जी और सिलेण्डर लेकर प्रदर्शन करते थे, तब सिलेण्डर की कीमत मात्र ३९९ रूपए ही थी। अब सिलेण्डर ग्यारह सौ रूपए में मिल रहा है तो केन्द्र सरकार कहती है कि देश तरक्की कर रहा है। दो करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा भी जुमला साबित हुआ है।
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