देश के अन्नदाताओं को भ्रमित कर रही केन्द्र सरकार

निम्बाहेड़ा. केन्द्र सरकार किसानो के विरोध के बावजूद भी किसान विरोधी तीनो कृषि कानूनों को लागू करने के लिए अमादा है, जो की लोकतंत्र की भावनाओं व सिद्धांतो के खिलाफ है। केन्द्र के कृषि कानून से देश के किसान बर्बाद हो जाएंगे। देश में यह पहली घटना है कि किसी कानून को बनाने के लिए नहीं बल्कि कानून को वापस लेने के लिए देश के किसान इस कडाके की ठंड के बीच धरना दे रहे है। यह बात कांग्रेस के अखिल भारतीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने यहां रविवार को कृषि उपज मंडी में केन्द्र के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों

By: Avinash Chaturvedi

Published: 10 Jan 2021, 11:03 PM IST

निम्बाहेड़ा. केन्द्र सरकार किसानो के विरोध के बावजूद भी किसान विरोधी तीनो कृषि कानूनों को लागू करने के लिए अमादा है, जो की लोकतंत्र की भावनाओं व सिद्धांतो के खिलाफ है। केन्द्र के कृषि कानून से देश के किसान बर्बाद हो जाएंगे। देश में यह पहली घटना है कि किसी कानून को बनाने के लिए नहीं बल्कि कानून को वापस लेने के लिए देश के किसान इस कडाके की ठंड के बीच धरना दे रहे है।
यह बात कांग्रेस के अखिल भारतीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने यहां रविवार को कृषि उपज मंडी में केन्द्र के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों व कांग्रेस की ओर से दिए गए धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ने कही। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार तीनों कृषि बिलों को वापस लेकर इस बात का कानून बनाए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर खरीद करने वालों को जेल भेजा जाएगा। मोहन प्रकाश ने मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे देश के अन्नदाताओं को भ्रमित कर रहेे है । उन्होंने कहा कि हरित क्रांति कांग्रेस सरकार की देन है, कांग्रेस ही किसानों की हितेषी है, जबकि मोदी सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का कार्य कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी कंगना राणावत के मुद्दे पर तो बोल सकते है पर बार्डर पर धरना आन्दोलत के दौरान मृत किसानों की शहादत पर वे कुछ नहीं बोल रहे है, इससे बड़ी कोई असवेदंशीलता की कोई बात नही हो सकती है।

आन्दोलन को राजनीतिक रूप देने का प्रयास
सहकारिता मंत्री उदय लाल आंजना ने कहा कि गत दो माह से केन्द्र के कृषि कानून बिलों के विरोध में देश के किसान दिल्ली से सटे बार्डर पर आंदोलन कर रहे है, किंतु केन्द्र सरकार इस आंदोलन को कांग्रेस प्रायोजित बताकर उसे राजनीतिक रूप देकर तोडऩे की कोशिश कर रही है। मोदी भूल रहे है कि देश का अन्नदाता किसी के बहकावे में नहीं आता है। कृषि कानून बिलो के विरोध में सबसे पहले मोदी सरकार के सहयोगी ही साथ छोडकर भागे है।
चित्तौडगढ के पूर्व विधायक सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत, पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी ने भी संबोधित करते हुए किसान विरोधी काले कृषि कानून बिलो को अविलम्ब वापस लेने की वकालत की। यह कदम किसानों के हित में होगा। इस अवसर पर कांग्रेस पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि मनोहरलाल अंाजना, पुरूषोत्तम लाल झंवर, गोपाल आंजना, सुभाषचन्द्र शारद, परवेज अहमद, कपासन प्रधान भैरूलाल चौधरी, छोटीसादडी की प्रधान सपना मीणा, उपप्रधान विक्रम आंजना, जावद के राजकुमार अहीर सहित बडी संख्या में किसान व कांग्रेसजन उपस्थित थे। सभा के अंत में बार्डर पर चल रहे धरने के दौरान 42 मृत किसानों को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की व 42 मृत किसानो के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। सभा का संचालन रविप्रकाश सोनी ने किया।

ट्रैक्टर रैली निकाली
धरना प्रदर्शन के पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के नेतृत्व में किसानों व कांग्रेसजनो ने कृषि बिलो के विरोध में ट्रैक्टर रैली निकाली। भ्रमण करते हुए रैली कृषि उपज मंडी पहुंची।

Avinash Chaturvedi
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